टेलीकॉम यूजर्स को लगातार मिलने वाले लोन, इंश्योरेंस और प्रमोशन से जुड़े रोबोकॉल्स और स्पैम कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन में नए संशोधन लागू किए हैं. इसके तहत एप्लिकेशन-टू-पर्सन (A2P) कॉल्स के लिए 5 पैसे प्रति मिनट का टर्मिनेशन चार्ज तय किया गया है.
किस पर लागू होगा यह नियम
यह नियम उन कंपनियों और टेलीमार्केटर्स पर लागू होगा, जो ऑटोमेटेड सिस्टम या सॉफ्टवेयर के जरिए बल्क में कॉल्स करते हैं.
A2P कॉल्स क्या होती हैं
A2P कॉल्स वे कॉल्स होती हैं जिन्हें किसी व्यक्ति द्वारा सीधे नंबर डायल करके नहीं, बल्कि ऐप, सॉफ्टवेयर या ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म के जरिए जनरेट किया जाता है. इसमें रोबोकॉल्स, ऑटो-डायल कॉल्स, प्री-रिकॉर्डेड और आर्टिफिशियल वॉयस कॉल्स शामिल हैं.
चार्ज किसे देना होगा
आम मोबाइल उपभोक्ताओं को इससे बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, यह यह टर्मिनेशन चार्ज ओरिजनेटिंग एक्सेस प्रोवाइडर यानी जिस नेटवर्क से कॉल शुरू हुई है, इसकी ओर से उस टेलीकॉम ऑपरेटर को दिया जाएगा, जिसके नेटवर्क पर कॉल खत्म होती है. इसका निजी बातचीत पर कोई असर नहीं होगा. आम यूजर्स की ओर से एक-दूसरे को की जाने वाली सामान्य यानी पर्सन-टू-पर्सन कॉल्स पर यह नियम लागू नहीं होगा और यह पूरी तरह मौजूदा प्लान के तहत रहेगी. इस फैसले पर जायज ठहराते हुए ट्राई चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि 5 पैसे प्रति मिनट एक अधिकतम सीमा है. टेलीकॉम कंपनियां आपस में कमर्शियल बातचीत के आधार पर वास्तविक दर तय कर सकती हैं.
बिना जानकारी की गई A2P कॉल मानी जाएगी स्पैम
A2P सिस्टम का उपयोग करने वाली संस्थाओं या टेलीमार्केटर्स को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को पहले से सूचित करना होगा और कॉलिंग लाइन आइडेंटिटीज की पूरी सूची देनी होगी. अगर कोई कंपनी बिना पूर्व डिक्लेरेशन के ऑटोमेटेड या ऐप आधारित कॉल करती पाई जाती है, तो उसे अनचाही व्यावसायिक संचार माना जाएगा और उस पर दंडात्मक कार्रवाई होगी. हालांकि, ट्राई की विशेष रूप से रेगुलेटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए अलॉट की गई नंबरिंग सीरीज़ जैसे 140xx, 1600xx, 1601xx और अथॉरिटी की ओर से अधिकृत कॉल्स को इस चार्ज से बाहर रखा गया है.
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सिर्फ आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि ट्राई ने स्पैम कॉल्स पर शिकंजा कसने के लिए अत्याधुनिक तकनीक को भी शामिल किया है. इसके तहत टेलीकॉम कंपनियां अपने सिस्टम में AI और Machine Learning टूल्स का इस्तेमाल करके ऐसे कॉलिंग नंबरों का पता लगाएंगी, जिनसे बहुत ज्यादा मात्रा में स्पैम कॉल्स किए जाने की संभावना है.अगर किसी एक सेंडर से जुड़े 5 या उससे ज्यादा नंबर 10 दिनों के भीतर स्पैम के रूप में फ्लैग होते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियां उनका री-केवाईसी, फिजिकल वेरिफिकेशन और बार-बार नियम तोड़ने पर कनेक्शन काटने जैसी सख्त कार्रवाई करेंगी.
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