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पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाता है, तो उसको रोकने का क्या है इलाज, हाई कोर्ट के वकील से जानिए अपने कानूनी अधिकार

Public Nuisance: अगर आपका पड़ोसी रात देर तक तेज म्यूजिक, शोर करता है और आपकी नींद व शांति में खलल डालता है, तो यह सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि कानूनी उल्लंघन भी हो सकता है. हाई कोर्ट के वकील से जानिए अपने कानूनी अधिकार.

पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाता है, तो उसको रोकने का क्या है इलाज, हाई कोर्ट के वकील से जानिए अपने कानूनी अधिकार
पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाता तो उसका इजाल क्या है?
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Public Nuisance: अगर, आप भी अपने पड़ोसी परेशान हैं. आपका पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाता है. आप कई बार पड़ोसी को इस संबंध में बोल चुके हैं. इसके बाद भी पड़ोसी नहीं मानता, बल्कि लड़ने-झगड़ने के आतुर रहता है. ऐसे में आपके पास बिना किसी झगड़े के पड़ोसी को ठीक करने का इलाज भी है. आपके पास कानूनी रूप से कुछ अधिकार हैं, जिससे आप पड़ोसी की शिकायत कर सकते हैं और उसे रात में म्यूजिक बजाने से रोक सकते हैं. चलिए हाई कोर्ट के वकील विभु त्यागी से जानते हैं पड़ोसी रात में देर तक म्यूजिक बजाता है, तो उसको रोकने का क्या इलाज है?

एडवोकेट विभु त्यागी ने बताया कि अगर आपका पड़ोसी रात देर तक तेज म्यूजिक, पार्टी या शोर करता है और आपकी नींद व शांति में खलल डालता है, तो यह सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि कानूनी उल्लंघन भी हो सकता है. Public Nuisance का मतलब है, ऐसा कृत्य जो आम जनता या आसपास रहने वाले लोगों के आराम, स्वास्थ्य या शांति में बाधा डाले, तो अब आप इसके तहत कार्रवाई की मांग कर सकते हैं. भारतीय कानून ऐसे मामलों में आम नागरिकों को स्पष्ट अधिकार देता है.

क्या है कानूनी अधिकार

रात में देर तक तेज म्यूजिक बजाना ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत गैर-कानूनी है. आप 10 बजे रात से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर या डीजे के खिलाफ 112 पर पुलिस शिकायत या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कार्रवाई की मांग कर सकते हैं, क्योंकि यह आपके शांत वातावरण के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. भारतीय कानूनों के तहत, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच तेज ध्वनि वाले लाउडस्पीकर या ध्वनि यंत्रों का उपयोग निषिद्ध है. दोषी पाए जाने पर पुलिस द्वारा फाइन जैसे 10,000 तक का जुर्माना या उपकरण जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है.

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पड़ोसी को रोकने का इलाज

बातचीत- सबसे पहले शांति से पड़ोसी से मिलकर अपनी समस्या बताएं. कई बार उन्हें पता ही नहीं होता कि उनके कृत्य से परेशानी हो रही है.

मध्यस्थता- अगर सीधे बात न बने, तो समझदार पड़ोसियों या आरडब्ल्यूए (RWA) के सदस्यों को बीच में डालकर मामला सुलझाएं.

पुलिस शिकायत- मामला गंभीर होने पर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराएं. पुलिस चालान, जुर्माना या सामान जब्त कर सकती है.

कोर्ट का रूख- वकील के जरिए लीगल नोटिस भेजा जा सकता है. अंतिम विकल्प के तौर पर कोर्ट का रुख भी किया जा सकता है.

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