Operation Sindoor Effect 2026: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद जब भारत-पाकिस्तान का मैदानी बॉर्डर पूरी तरह सील कर दिया गया, तो ऐसा लगा मानो दो दिलों का मिलन और रिश्तों की डोर हमेशा के लिए टूट गई है. दरअसल, दोनों देशों के बीच तनाव के बाद अटारी-वाघा गेट पर ताले लटका दिए गए थे . ऐसे में शादी के इंतजार में बैठे जोड़ों की उम्मीदें भी धुंधली पड़ने लगी थीं.
इस बीच एक बार फिर प्यार ने सारी सीमाओं को तोड़ने का काम किया है. कहा जाता है न कि प्यार सीमाओं और बंदिशों का मोहताज नहीं होता. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ करीब डेढ़ साल के लंबे और थकाऊ इंतजार के बाद आखिरकार प्यार की जीत हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेकर भारत पहुंचीं और नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे व भोपाल जैसे शहरों में अपने जीवनसाथी संग विवाह के बंधन में बंध गईं.
450 रिश्तेदारों के साथ हवाई रास्ते से भारत पहुंचीं दुल्हनें
आमतौर पर पाकिस्तानी नागरिक वाघा बॉर्डर के रास्ते आसानी से भारत आते-जाते थे, लेकिन बॉर्डर बंद होने की वजह से उन्हें हजारों किलोमीटर का लंबा और घुमावदार हवाई रास्ता अपनाना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच ये दुल्हनें करीब 450 रिश्तेदारों के साथ भारत पहुंचीं. दरअसल, भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने सिंध के एक सम्मानित धार्मिक स्थल की पहल पर इन परिवारों को विशेष छूट दी. इसके बाद परिजनों के लिए तय समय के भीतर लौटने की पाबंदी की वजह से ज्यादातर शादियां बेहद सादगी के साथ संपन्न कराई गईं.
बहुत ही भावुक है आरती और इंकेश की कहानी
भारत में लंबे समय के वीजा पर रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले हुई थी. उनकी मंगेतर आरती मई 2025 में वाघा बॉर्डर से महज एक किलोमीटर दूर थीं, तभी अटारी गेट बंद कर दिया गया. एक साल बाद आरती मस्कट के रास्ते नागपुर आईं, तब जाकर शादी हो पाई. हालांकि, वीजा पाबंदियों की वजह से उनके माता-पिता पाकिस्तान में ही छूट गए और सिर्फ भाई ही साथ आ सके.
काजल और संजय का 3 साल का इंतजार
नागपुर के रहने वाले संजय कलानी की सगाई पाकिस्तान के सिंध की काजल से तीन साल पहले हुई थी. इस बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद बॉर्डर पार न कर पाने से दोनों ने शादी की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन 5 महीने पहले काजल कराची से मस्कट, फिर दिल्ली होते हुए नागपुर पहुंचीं, तब जाकर दोनों की शादी संपन्न हो पाई.
भारत में बसने आया दूल्हा
पाकिस्तान के सिंध से आए राभेल जसवानी अपनी दुल्हन श्रेया से शादी करने के लिए अपने माता-पिता के साथ नागपुर आए. राभेल अब भारत में ही बसना चाहते हैं.
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पाकिस्तानी दुल्हनों को भारत का वीजा दिलाने और उनके अटके विवाह को संपन्न कराने में सिंध के घोटकी स्थित मशहूर शादानी दरबार ने बेहद निर्णायक भूमिका निभाई. दरबार के पीठाधीश संत युधिष्ठिर लाल शादानी, जो अब रायपुर में निवास करते हैं. उन्होंने भारत सरकार और गृह मंत्रालय के सामने पाकिस्तान में फंसी इन दुल्हनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. उनकी ही कोशिशों का नतीजा रहा कि केंद्र सरकार ने मानवीय आधार पर इन परिवारों को भारत आने की विशेष अनुमति प्रदान की, तब जाकर इन लोगों की शादी संपन्न हो पाई.
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