- पुरानी गाड़ी खरीदने और बेचने वाले RC ट्रांसफर नियम को समझ लें.
- गाड़ी की RC ट्रांसफर के लिए विक्रेता-खरीदार दोनों जिम्मेदार होते हैं.
- RC ट्रांसफर होने तक पुराने मालिक कानूनी-वित्तीय जिम्मेदार होते हैं.
अगर आप पुरानी गाड़ी खरीद या बेच रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि पैसे लेकर चाबी सौंप देना, बल्कि गाड़ी बेचने या खरीदने के बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) नए खरीदार के नाम पर ट्रांसफर होना जरूरी है. RTO और सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, वाहन के पुराने मालिक सभी कानूनी और वित्तीय नुकसानों के लिए उत्तरदायी माना जाएगा. RC ट्रांसफर नहीं होने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. वैसे RC ट्रांसफर के लिए वाहन बेचने और खरीदने वाले दोनों जिम्मेदार होते हैं. बेचने वाले की तरफ से ट्रांसफर की प्रक्रिया की शुरुआत की जाती है, जबकि खरीदार ट्रांसफर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है.
अगर ट्रांसफर की प्रक्रिया को खरीदार पूरा नहीं करवा रहा है तो, वाहन के पुराने मालिक RTO से संपर्क करके अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. वहीं खरीद-बिक्री के दस्तावेज और अन्य कागज संभाल के रखने चाहिए. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होने तक कानूनी और वित्तीय नुकसान के लिए पुराने वाहन मालिक को जिम्मेदार माना जाएगा.
दुर्घटना या अपराध होने पर कौन होगा जिम्मेदार?
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 2(30) के तहत RTO रिकॉर्ड में जिसका नाम दर्ज है, वही वाहन का असली कानूनी मालिक माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जैसे सुरेंद्र कुमार भिलवाले बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस) में साफ किया गया है कि गाड़ी बिकने और चाबी सौंपने के बाद भी, जब तक आरसी ट्रांसफर नहीं होती, तब तक सड़क दुर्घटना या किसी आपराधिक गतिविधि में गाड़ी के शामिल होने पर पुराना मालिक ही जिम्मेदार होगा. कोर्ट क्लेम या मुआवजे का भुगतान भी पुराने मालिक को ही करना पड़ सकता है.
गाड़ी का खरीदार अगर कोई ट्रैफिक नियम तोड़ता है, तो सभी ई-चालान और जुर्माने पुराने मालिक के पते पर ही आएंगे.
आरसी ट्रांसफर के लिए समय सीमा
RTO के नियम के अनुसार, एक ही राज्य के भीतर गाड़ी बेचने पर 30 दिनों के भीतर RC ट्रांसफर के लिए आरटीओ में आवेदन करना जरूरी होता है. वहीं अगर खरीदार दूसरे राज्य का है, तो यह अवधि 45 दिनों की होती है. गाड़ी बेचते समय विक्रेता को फॉर्म 29 (बिक्री का नोटिस) और खरीदार को फॉर्म 30 (ऑनरशिप ट्रांसफर का आवेदन) पर साइन करके आरटीओ में जमा करना होता है. इसके साथ पुरानी आरसी, वैध बीमा, PUC और खरीदार की ID की जरूरत होती है.
सेकंड-हैंड डीलरों के लिए सरकार का नया ड्राफ्ट नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नियमों को और सख्त करने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है. इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी किसी अधिकृत सेकंड-हैंड कार डीलर को बेचता है और वह गाड़ी 6 महीने (180 दिन) के भीतर किसी नए खरीदार को नहीं बिकती है, तो उस गाड़ी का मालिकाना हक कानूनी रूप से खुद ही डीलर के नाम पर दर्ज हो जाएगा. इससे पुराने मालिकों को बिना वजह आरटीओ के चक्कर काटने और चालान की मानसिक प्रताड़ना से बड़ी राहत मिलेगी.
यात्री और वाहन मालिक किसी भी समय डिजिटल माध्यम से परिवहन सेवा पोर्टल पर जाकर 'नो योर एप्लीकेशन स्टेटस' के जरिए अपने आरसी ट्रांसफर की लाइव स्थिति ट्रैक कर सकते हैं.
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