National Girl Child Day: हर साल 24 जनवरी को नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया जाता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य समाज में लड़कियों के अधिकार और उनके सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि बेटियों की शिक्षा और विकास पर ध्यान देना कितना जरूरी है. शिक्षा ही वह ताकत है जो लड़कियों को आत्मनिर्भर बना सकती है और समाज में बराबरी का दर्जा दिला सकती है. हालांकि, कई बार आर्थिक समस्या या घर के जिम्मे के चलते बेटियों की पढ़ाई बीच में रुक जाती है. माता-पिता अपनी बच्चियों को पढ़ाना तो चाहते हैं लेकिन पैसे की तंगी के आगे मजबूर हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में क्या कर सकते हैं, आइए जानते हैं-
सरकारी स्कॉलरशिप और योजनाओं का लाभ उठाएं
बता दें कि सरकार बेटियों की पढ़ाई में मदद करने के लिए कई योजनाएं चला रही है. जैसे कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना. इसमें आर्थिक मदद, स्कॉलरशिप और किताबों के लिए सहायता दी जाती है. सुकन्या समृद्धि योजना के तहत आप बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचत कर सकते हैं. National Scheme of Incentive to Girls for Secondary Education के तहत लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा तक पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक मदद मिल सकती है. इसके अलावा State-specific scholarships जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए फ्री फीस या स्टाइपेंड मिलती है. आप अपने राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट या नजदीकी शिक्षा कार्यालय से इसकी जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकते हैं. इन योजनाओं में आवेदन करने से न केवल फीस का बोझ कम होता है, बल्कि बेटी को पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा भी मिलती है.
कई गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी लड़कियों के लिए शिक्षा के विशेष कार्यक्रम चलाते हैं. NGO और महिला फाउंडेशन लड़कियों को मुफ्त ट्यूशन, ऑनलाइन क्लास और स्किल ट्रेनिंग देते हैं. अगर परिवार को आर्थिक कठिनाई हो रही है तो ऐसे कार्यक्रमों से मदद ली जा सकती है. आप अपने शहर या जिले में छोटे NGO ढूंढकर बेटी को क्लासेस में शामिल कर सकते हैं.
इन बातों का भी रखें ध्यानशिक्षा के साथ-साथ माता-पिता को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बेटी सुरक्षित और प्रोत्साहित महसूस करे. स्कूल और शिक्षक भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं. स्कूल में अगर कोई छात्र कठिनाई महसूस करता है, तो शिक्षक उन्हें सही मार्गदर्शन और एक्स्ट्रा समय दे सकते हैं.
नेशनल गर्ल चाइल्ड डे सिर्फ एक दिन नहीं है, बल्कि यह हर दिन लड़कियों के अधिकार और शिक्षा के महत्व को याद रखने का संदेश देता है. अगर बेटियों को पढ़ाई में कठिनाई हो रही है, तो परिवार, शिक्षक और समाज मिलकर उन्हें प्रोत्साहित करें, योजनाओं का लाभ दें और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करें. इससे न सिर्फ उनकी पढ़ाई जारी रहेगी, बल्कि वे समाज में आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनेंगी.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं