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महिला आरक्षण बिल के लिए सरकार का प्लान, इसी सत्र में ला सकती है संविधान संशोधन बिल

विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने पर आपत्ति की थी. विपक्ष का कहना था कि इसके कारण देरी होगी. विपक्ष ने इसे लेकर सरकारी की नीयत पर भी सवाल उठाया था. अब देखना होगा कि विपक्ष सरकार के ताजा रुख पर क्या स्टैंड लेता है.

महिला आरक्षण बिल के लिए सरकार का प्लान, इसी सत्र में ला सकती है संविधान संशोधन बिल
महिला आरक्षण जल्द लागू करने की कोशिश.
  • सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 % आरक्षण लागू करने का प्रयास कर रही है
  • नारी शक्ति वंदन कानून परिसीमन के बाद ही लागू किया जाना था, लेकिन परिसीमन अभी शुरू नहीं हुआ है
  • जनगणना प्रक्रिया को 12 दिसंबर 2025 को मंजूरी मिली है और यह दो चरणों में पूरी की जाएगी
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नई दिल्ली:

संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने में देरी को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है. सरकार की कोशिश है कि 2029 के लोक सभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए. इसके लिए जरूरत पड़ने पर सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन बिल ला सकती है.इसके लिए विपक्षी दलों को टटोला जा रहा है.

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परिसीमन के बाद लागू होना है नारी शक्ति वंदन कानून

दरअसल, महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं मे 33% आरक्षण देने के लिए 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून बना था. इसकी धारा पांच में यह प्रावधान है कि जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन पूरा होने के बाद यह कानून लागू किया जाए. लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया अभी तक प्रारंभ नहीं हो सकी है, इसके लिए पहले जनगणना की जानी है और उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा.  कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2025 को जनगणना को मंजूरी दी है जो दो चरणों में की जानी है.

सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी है कि अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने पर विचार किया जा रहा है. यह संशोधन लाया जा सकता है कि परिसीमन के बिना भी 2029 के लोक सभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू किया जा सके. यानी कोशिश यह होगी कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर दिया जाए ताकि परिसीमन में देरी के कारण महिला आरक्षण लागू करने में देरी न हो.

परिसीमन लागू करने में लग सकते हैं 2–3 साल

अनुमान है कि जनगणना  प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी हो जाएगी और उसके बाद परिणाम प्रकाशित किए जाएंगे. इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिससे परिसीमन लागू करने में कम से कम 2–3 साल लग सकते हैं, क्योंकि इस बार जनगणना डिजिटल रूप से दर्ज की जा रही है. वैसे सामान्यतः इसमें 3-4 वर्ष का समय लगता है. जाहिर है तब तक 2029 का लोक सभा चुनाव आ जाएगा और महिला आरक्षण तब लागू नहीं हो सकेगा.

गौरतलब है कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने पर आपत्ति की थी. विपक्ष का कहना था कि इसके कारण देरी होगी. विपक्ष ने इसे लेकर सरकारी की नीयत पर भी सवाल उठाया था. अब देखना होगा कि विपक्ष सरकार के ताजा रुख पर क्या स्टैंड लेता है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इशारा दिया है कि सरकार मौजूदा सत्र में ही कोई महत्वपूर्ण बिल ला सकती है, हालांकि उन्होंने यह खुलासा करने से इनकार कर दिया कि यह कौन सा बिल होगा.
 

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