उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को कानपुर से जोड़ने वाली एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह सड़कें खराब होने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए NHAI ने टोल वसूली रोक दी है. जब तक सड़क मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक के लिए एक्सप्रेसवे को टोल फ्री कर दिया गया है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने बुधवार को कहा कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली तब तक के लिए रोक दी गई है, जब तक क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती.
NHAI ने साथ ही, प्रोजेक्ट को पूरा करने और उसकी निगरानी में कथित कमियों के लिए ठेकेदार, इंजीनियर और कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की. 13 जुलाई को उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हिस्सों और पैचवर्क (मरम्मत के काम) के बारे में बड़े पैमाने पर आई शिकायतों के बाद ये कदम उठाया गया है.
टूटी सड़क पर ले रहे थे 275 रुपये टोल
कई यात्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट करके करोड़ों रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेसवे, खासकर उन्नाव-लखनऊ कैरिजवे के निर्माण की क्वालिटी पर चिंता जताई थी. यात्रियों से कार/जीप/वैन के लिए 275 रुपये का वन-वे शुल्क लिया जा रहा था. हालांकि, टोल पर सालाना पास की सुविधा भी थी.
NHAI ने बुधवार को एक बयान में कहा, 'पूरी तरह से ठीक होने तक टोल वसूली रोक दी गई है. इस एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा. टोल से हुए नुकसान की भरपाई कंसेशनियर से की जाएगी.'
अथॉरिटी ने कहा कि यह कार्रवाई 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के 64वें किलोमीटर के पास सड़क धंसने (स्लिपेज) की घटना की रिपोर्ट के बाद की गई है. NHAI ने बताया कि घटना के तुरंत बाद मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया था और प्रभावित जगह पर ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया था. अथॉरिटी ने कहा, 'फिलहाल, इस जगह पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और गाड़ियां आसानी से चल रही हैं.'
ठेकेदार कंपनी को शो-कॉज नोटिस, 3 साल तक बैन
NHAI ने कहा कि उसने ठेकेदार कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को 'नॉन-परफॉर्मर' (खराब प्रदर्शन करने वाला) घोषित करने का प्रस्ताव देते हुए एक नोटिस जारी किया है. इससे कंपनी भविष्य में NHAI के प्रोजेक्ट्स की बोली में शामिल होने के लिए अयोग्य हो जाएगी.
इसमें कहा गया है कि कंसेशनियर (ठेकेदार) को प्रभावित हिस्से को अपने खर्च पर ठीक करने का निर्देश भी दिया गया है, इस काम पर अभी लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है.
अथॉरिटी ने कंस्ट्रक्शन एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को प्रोजेक्ट से हटा दिया और उन्हें दो साल के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और NHIDCL के प्रोजेक्ट्स से प्रतिबंधित कर दिया.
प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर भी कार्रवाई
अथॉरिटी ने मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया और कहा कि कथित लापरवाही के लिए उनके और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया के खिलाफ चार्जशीट जारी की जा रही है. NHAI ने कहा कि वह 'थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' (जो इस प्रोजेक्ट की इंडिपेंडेंट इंजीनियर थी) को भविष्य के NHAI प्रोजेक्ट्स में भाग लेने से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव देते हुए एक नोटिस भी जारी कर रहा है.
अथॉरिटी ने कहा कि वह पूरे प्रोजेक्ट एरिया में सड़क की सतह (पेवमेंट) की स्थिति का लेज़र प्रोफ़िलोमीटर-आधारित मूल्यांकन करेगी. साथ ही, सड़क खिसकने (स्लिपेज) के कारणों की जांच करने और सुधार के उपाय सुझाने के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी की अगुवाई में विशेषज्ञों की एक टीम को काम पर लगाया गया है. बयान में कहा गया, 'NHAI राष्ट्रीय राजमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और रखरखाव में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.'
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