क्या आप भी ट्रेन के एसी (AC) कोच में सफर करते ही सबसे पहले ओढ़ने वाली चादर की सफेदी और कम्बल की महक चेक करते हैं? ट्रेन में मिलने वाली बेडशीट, तकिया और कम्बल (Bedroll) को लेकर हर यात्री के मन में एक बात जरूर आती है कि क्या यह चादर वाकई धुली हुई है? क्या यह कम्बल मेरे इस्तेमाल के लायक है? अगर आपके मन में भी ये सवाल उठते हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रेलवे के इन कम्बलों, चादरों और तकियों की सफाई को लेकर चौंकाने वाले बड़े खुलासे किए हैं.
उन्होंने कहा कि रेलवे अब आपकी चादर की धुलाई और दाग-धब्बों पर AI (Artificial Intelligence) कैमरों से नजर रख रहा है.आइए जानते हैं कि ट्रेन में मिलने वाला तकिया, कम्बल और चादर कितने समय बाद बदले और धोए जाते हैं और सफाई को लेकर रेलवे का क्या नियम है...
बेडरोल किट का क्या है नियम?
रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे एसी क्लास के यात्रियों को हर यात्रा के दौरान दो बेडशीट, एक तकिया कवर और एक हैंड टॉवल देता है.पहली बेडशीट का इस्तेमाल बर्थ (सीट) पर बिछाने के लिए किया जाता है.जबकि दूसरी बेडशीट का इस्तेमाल कम्बल के नीचे कवर के रूप में बिछाने के लिए किया जाता है ताकि ऊनी कम्बल सीधे यात्री के शरीर के संपर्क में न आए. इस कवर को हर यात्रा यानी सिंगल यूज के बाद धोया जाता है.
इसके अलावा, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर पश्चिम रेलवे और कामाख्या-हावड़ा के बीच चलने वाली नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को स्पेशल कम्बल कवर दिए जा रहे हैं, जिन्हें हर ट्रिप के बाद धोया जाता है.
ट्रेन में कंबल-चादर की सफाई पर AI-कैमरे और CCTV रख रहे नजर
कपड़ों की धुलाई और स्वच्छता का स्तर बनाए रखने के लिए रेलवे एडवांस टेक्नोलॉजी का सहारा ले रहा है.कपड़ों की सफाई और दाग-धब्बे का पता लगाने के लिए रेलवे के पुणे, जयपुर और जोधपुर डिवीजनों की लॉन्ड्री में AI-कैमरा स्टेन्स डिटैक्शन तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. लॉन्ड्री में AI ऑटोमेटेड कैमरे लगाए गए हैं.वहीं, सभी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में कपड़ों की सफेदी,चमक और सफाई की जांच के लिए Whito-Meters का इस्तेमाल किया जा रहा है और पूरी लॉन्ड्री प्रक्रिया पर CCTV कैमरों से निगरानी रखी जा रही है.
जानिए आपकी चादर, तकिए और कम्बल की कितनी होती है 'लाइफ'
रेलवे नियमों के अनुसार, ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले सामानों की एक निश्चित समय-सीमा तय होती है, जिसके बाद उन्हें बदल दिया जाता है.ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली सूती या हैंडलूम बेडशीट की लाइफ 12 महीने (1 साल) और पॉलिवस्त्र बेडशीट की 24 महीने (2 साल) होती है. इसके बाद ये बदल दिया जाता है.
वहीं, यात्रियों को दिए जाने वाले तकिया कवर (Pillow Cover)और सफाई के लिए दिए जाने वाले फेस टॉवल(Face Towel) की लाइफ 9 महीने तय की गई है, जबकि एसी कोच में मिलने वाले तकिया (Pillow) और यात्रियों को ठंड से बचाने के लिए दिए जाने वाले ऊनी कम्बल (Woollen Blanket) को 24 महीने (2 साल) इस्तेमाल किया जाता है.
रेलवे के मुताबिक, जो सामान इस्तेमाल के योग्य नहीं रहते या खराब हो जाते हैं, उन्हें तय नियमों के तहत समय-समय पर हटाकर नए सामान शामिल किए जाते हैं.
ये भी पढ़ें- Aadhaar यूजर्स के लिए जरूरी अपडेट: सिस्टम मेंटेनेंस के चलते बंद रहेगा नया ऐप, तुरंत निपटा लें जरूरी काम
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं