- रेलवे में शराब ले जाने की अनुमति और मात्रा आपके यात्रा मार्ग के राज्यों के आबकारी नियमों पर निर्भर करती है.
- बिहार और गुजरात जैसे ड्राई स्टेट में ट्रेन में सीलबंद शराब ले जाना भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है.
- रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत ट्रेन में शराब पीना या नशे में होना सजा योग्य अपराध है.
Indian Railways Alcohol Carrying Rules: हर दिन करोड़ों यात्री भारतीय रेलवे (Indian Railway) से सफर करते हैं, लेकिन ट्रेन में शराब (Liquor) ले जाने को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है. कई लोग मानते हैं कि अगर शराब की बोतल सीलबंद है और उसकी रसीद पास में है, तो उसे ट्रेन में ले जाना पूरी तरह से कानूनी है.
हालांकि, सच्चाई इससे बिल्कुल इससे अलग है. सच्चाई ये है कि ट्रेन में शराब ले जाने की कोई एक राष्ट्रव्यापी सीमा (Nationwide Limit) तय नहीं है. दरअसल, शराब ले जाने की अनुमति और उसकी मात्रा पूरी तरह से आपके शुरुआती स्टेशन, रास्ते में पड़ने वाले राज्यों और गंतव्य (Destination) राज्य के आबकारी नियमों (Excise Laws) पर निर्भर करती है.
सीलबंद शराब की बोतल भी पहुंचा सकती है जेल
अगर आपने किसी एक राज्य से कानूनी रूप से शराब खरीदी है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप उसे ट्रेन के जरिए किसी भी राज्य में ले जा सकते हैं. दरअसल, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है. ऐसे में अगर आपकी ट्रेन इन राज्यों से गुजरती हैं या आपकी मंजिल इन्हीं राज्यों से एक है, तो सील बंद बोतल होने के बावजूद यात्री के खिलाफ संबंधित राज्य के आबकारी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. दरअसल, किसी भी एक राज्य में कानूनी मानी जाने वाली चीजें दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश करते ही वहां के कानून के हिसाब से अवैध हो सकती है. इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले अपने पूरे रूट पर पड़ने वाले राज्यों के आबकारी नियमों की जांच करना जरूरी है.
ट्रेन के भीतर शराब पीना है गुनाह
ट्रेन में सफर के दौरान राब साथ लेकर चलना और ट्रेन के अंदर उसका सेवन करना ये दोनों पूरी तरह से अलग मामले हैं. ट्रेन के भीतर या स्टेशन परिसर में शराब पीना या उपद्रव करना पूरी तरह गैरकानूनी है. रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत ट्रेन में शराब पीने, नशे की हालत में पाए जाने या सह-यात्रियों को परेशान करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर यात्री को 6 महीने तक की जेल या 5000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है. दरअसल, इस कानून के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल हो सकती है. वहीं, दूसरी बार यही गलती करने पर जुर्माना बढ़ाकर 5,000 रुपये तक किया जा सकता है. इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात रेलवे अफसर या पुलिस के जवान शराबी यात्री का टिकट जब्त कर सकती है और उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार भी सकती है.
ट्रेंन में खाली बोतल रखना और भी खतरनाक
अगर आपके पास शराब की खुली हुई बोतल पाई जाती है, तो रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या जीआरपी (GRP) परिस्थिति के मुताबिक सख्त कदम उठा सकती है. खुली बोतल होने पर यह माना जा सकता है कि आप यात्रा के दौरान इसका सेवन कर रहे थे. इसलिए सबसे सुरक्षित यही है कि ट्रेन यात्रा में कभी भी खुली बोतल साथ न रखें.
दिल्ली मेट्रो और रेलवे के नियमों को एक न समझें
अक्सर लोग दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) के नियमों को भारतीय रेलवे पर भी लागू मान लेते हैं, जो कि गलत है. DMRC ने नियमों के तहत यात्रियों को केवल मेट्रो नेटवर्क में अधिकतम 2 सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति दी है. यह छूट केवल मेट्रो सिस्टम तक सीमित है. इसे भारतीय रेलवे के सामान्य नियम के रूप में नहीं देखा जा सकता. इसके अलावा, दिल्ली से हरियाणा या किसी दूसरे राज्य में प्रवेश करते ही संबंधित राज्य की आबकारी सीमाएं लागू हो जाती हैं. लिहाजा, वहां की शराब ले जाने से पहले वहां के आबकारी कानून की जानकारी भी हासिल कर लें. वरना स्थानीय पुलिस आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
शराब के लिए उम्र की सीमा भी है जरूरी
केवल बोतलों की संख्या ही नहीं, बल्कि शराब खरीदने और पास में रखने की कानूनी उम्र भी अलग-अलग राज्यों में अलग होती है, जैसे दिल्ली में कानूनी उम्र 21 वर्ष है, जबकि कुछ राज्यों में यह 25 वर्ष है. इसलिए उम्र की पात्रता भी ध्यान में रखना जरूरी है.
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दरअसल, ट्रेन में शराब ले जाना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस राज्य से किस राज्य की यात्रा कर रहे हैं. अगर आपका रूट किसी ड्राई स्टेट से होकर गुजरता है, तो शराब साथ ले जाने से पूरी तरह बचें. शराब ले जाने के संबंध में सबसे जरूरी बात ये है कि भले ही आपको सीलबंद बोतल ले जाने की छूट मिली हो, ट्रेन के भीतर शराब का सेवन करना आपको कानूनी मुसीबत के साथ ही जेल भी पहुंचा सकता है.
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