- भारत की 2026-27 जनगणना पहली बार पूरी तरह से डिजिटल स्वरूप में आयोजित की जाएगी, जिससे कागजी बोझ कम होगा
- सरकार एक राष्ट्रीय सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल लॉन्च करेगी, जिससे आप स्वयं स्मार्टफोन से जानकारी दर्ज कर सकेंगे
- प्रत्येक परिवार को एक 11 अंकों की SE ID मिलेगी, जो पहचान सुरक्षित रखने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी
Census 2026-27 India: सोचिए, क्या ऐसा हो सकता है कि देश की इतनी बड़ी जनगणना में आपको लंबी-चौड़ी पूछताछ से गुज़रना ही न पड़े? जी हां,2026-27 की जनगणना में ऐसा ही होने जा रहा है. देश के इतिहास में जनगणना पहली बार पूरी तरह 'डिजिटल' होने जा रही है जो न सिर्फ कागजों के बोझ को पीछे छोड़ देगी बल्कि आपको भी लंबी पूछताछ से मुक्ति दिलाएगी. स बार सबसे बड़ा बदलाव 'सेल्फ-एन्युमरेशन' यानी 'स्व-गणना' का विकल्प. जिसके तहत भारत सरकार एक विशेष पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जिसके ज़रिए आप खुद अपने स्मार्टफोन से अपने परिवार का ब्यौरा दर्ज कर सकेंगे. इस प्रक्रिया में हर परिवार को एक विशिष्ट 11 अंकों की SE ID मिलेगी, जो न सिर्फ आपकी पहचान को सुरक्षित रखेगी बल्कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया को बेहद सटीक और पारदर्शी बना देगी. यह सिर्फ लोगों की गिनती नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया के सफर में एक मील का पत्थर है, जो भविष्य की सरकारी नीतियों और रिसर्च के लिए एक पुख्ता आधार तैयार करेगा.
आखिर ये 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) क्या है ?
इसे आसान भाषा में समझें तो यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप ऑनलाइन ट्रेन की टिकट बुक करते हैं या फूड ऑर्डर करते हैं. पहले जनगणना अधिकारी घर आते थे और आपसे सवाल पूछकर कागज पर जानकारी भरते थे. लेकिन 'स्व-गणना' में सरकार आपको एक ऑनलाइन पोर्टल की चाबी दे देगी.आपको बस सरकार के अधिकृत 'सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल' पर जाना है.

जैसे ही आप ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी भरेंगे, सिस्टम आपके लिए 11 अंकों की एक खास पहचान तैयार करेगा, जिसे 'स्व-गणना आईडी' (SE ID) कहा जाएगा. यह आईडी 'H' अक्षर से शुरू होगी. यह सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि आपकी सुरक्षा की चाबी है. जब जनगणना अधिकारी आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो आपको उन्हें कोई मोटा रजिस्टर दिखाने या घंटों बैठकर सवाल-जवाब करने की जरूरत नहीं होगी. बस अपनी यह आईडी दिखा दीजिए और चंद सेकंड में आपकी जनगणना पूरी मान ली जाएगी. सरकार का असली मकसद यह है कि आपके डेटा का इस्तेमाल भविष्य की बेहतर योजनाओं और रिसर्च के लिए एकदम सटीक तरीके से किया जा सके. दूसरे शब्दों में कहें तो अब सरकार हर परिवार और व्यक्ति को एक धागे में पिरोने की तैयारी कर रही है.
इस पोर्टल पर काम कैसे करना है?
अब आप सोच रहे होंगे कि इस पोर्टल पर काम कैसे करना है? तो बता दें कि सरकार ने इसे आपके सोशल मीडिया अकाउंट लॉगिन करने जितना ही आसान बनाया है. आपको बस 'सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल' (se.census.gov.in) पर जाना है. वहां परिवार का मुखिया अपने मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन करेगा, जिसे एक ओटीपी (OTP) से वेरीफाई किया जाएगा. इसके बाद आप अपनी पसंदीदा भाषा चुन सकते हैं. सरकार की ओर से कुल 16 भाषाओं का विकल्प मिलेगा. इस पोर्टल की एक और कमाल की बात यह है कि इसमें मैप का विकल्प भी होगा, जहां आप अपने घर की बिल्कुल सही लोकेशन मार्क कर पाएंगे. फिर आपको अपने घर की सुविधाओं और परिवार के सदस्यों से जुड़े कुछ आसान सवालों के जवाब देने होंगे. जैसे ही आप 'फाइनल सबमिट' बटन दबाएंगे, आपकी स्क्रीन पर वह जादुई SE ID चमकने लगेगी, जो आपके मोबाइल पर SMS के जरिए भी भेज दी जाएगी.
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क्या हर राज्य के लिए अलग-अलग वेबसाइट पर जाना होगा?
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या हर राज्य के लिए अलग-अलग वेबसाइट पर जाना होगा? तो इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं ! सरकार ने इसे एकदम सॉर्टेड रखा है. पूरे देश के लिए एक ही 'नेशनल सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल' होगा. हां, इतना जरूर है कि अलग-अलग राज्यों में इसके खुलने का समय थोड़ा अलग हो सकता है. नियम यह है कि आपके राज्य में जब जनगणना अधिकारी फील्ड पर निकलने वाले होंगे, उससे ठीक 15 दिन पहले आपके लिए पोर्टल का लिंक एक्टिव हो जाएगा. इससे न तो वेबसाइट पर एक साथ बहुत ज्यादा लोड आएगा और न ही आपको कोई परेशानी होगी. सरकार का दावा है कि सब कुछ एक सिस्टम के तहत स्मूथ तरीके से चलता रहेगा.
जब ऑनलाइन सब भर दिया तो अधिकारी क्यों आएंगे?
अब शायद आपके मन में ये सवाल आए कि जब ऑनलाइन सब भर ही दिया है, तो फिर अधिकारी घर क्यों आएंगे? असल में यह 'हाइब्रिड मॉडल' डेटा की सुरक्षा और शुद्धता को पक्का करने के लिए है. जब जनगणना अधिकारी आपके घर आएंगे, तो वह बस आपकी SE ID अपने मोबाइल ऐप में डालेंगे. उनके पास आपकी भरी हुई जानकारी पहले से ही होगी, जिसे वो बस एक बार आपके साथ मिलकर 'क्रॉस-चेक' करेंगे. अगर इस दौरान घर में कोई बदलाव हुआ है या कोई जानकारी अपडेट करनी है, तो वो उसे तुरंत कर देंगे. इससे कागजी कार्रवाई में होने वाली गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और भारत के पास अपनी नीतियों को बनाने के लिए एक ऐसा मजबूत डेटा होगा जिस पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकेगा.
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