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How to merge two PF accounts: दो PF खातों को मर्ज कैसे करें?

अगर आपने एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो अपने सभी पीएफ अकाउंट जरूर चेक करें. दो UAN या कई पीएफ अकाउंट होने की स्थिति में उन्हें जल्द से जल्द मर्ज कराना समझदारी है.

How to merge two PF accounts: दो PF खातों को मर्ज कैसे करें?
दो PF खातों को मर्ज कैसे करें?

PF accounts: अच्छी सैलेरी, करियर ग्रोथ और बेहतर वर्क एनवायरमेंट की चाह में प्राइवेट नौकरी वाले अक्सर स्विच मारते हैं. ऐसा करने से तरक्की तो जरूर मिलती है लेकिन एक परेशानी भी खड़ी हो जाती है. असल में जॉब बदलते समय कई लोग ये भूल जाते हैं कि उनको पीएफ अकाउंट में भी जरूरती बदलाव करने हैं. ऐसा न कर पाने से कई बार दो पीएफ अकाउंट बन जाते हैं. इससे न सिर्फ पीएफ निकालने में दिक्कत आती है. बल्कि इंटरेस्ट और टैक्स से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में पीएफ अकाउंट को मर्ज करना बेहद जरूरी हो जाता है.

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पीएफ अकाउंट मर्ज करना क्यों जरूरी है?

जब आप नौकरी बदलते हैं तो आपकी मेंबर आईडी बदल जाती है. लेकिन UAN वही रहना चाहिए. कई बार जानकारी की कमी या HR की गलती से नया UAN बन जाता है. इससे आपका पीएफ का पैसा अलग अलग खातों में बंट जाता है. अगर अकाउंट मर्ज नहीं किया गया तो बैलेंस ट्रैक करना, ट्रांसफर करना और उसे निकालना मुश्किल हो सकता है.

दो UAN हैं तो क्या करें?

अगर आपके पास दो UAN हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. EPFO के नियमों के अनुसार, आपको लेटेस्ट UAN (जो प्रेजेंट जॉब से जुड़ा है) एक्टिव रखना चाहिए. पुराने UAN से जुड़े पीएफ अकाउंट को नए UAN में मर्ज कराया जा सकता है. इसके लिए EPFO के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर जाकर Form 13 ऑनलाइन भरना होता है.

UAN में KYC अपडेट क्यों जरूरी है?

पीएफ ट्रांसफर सक्सेसफुल हो, इसके लिए KYC अपडेट होना बेहद जरूरी है. इसके लिए आपके एक्टिव UAN में ये जानकारियां जुड़ी होनी चाहिए:

• आधार कार्ड

• पैन कार्ड

• बैंक अकाउंट डिटेल

अगर KYC वेरीफाइड नहीं है, तो पहले उसे अपडेट कराएं. इसके बाद Form 13 सबमिट करते ही पुराना पीएफ बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर हो जाएगा.

पीएफ खाता मर्ज करने के फायदे

• पूरा पीएफ बैलेंस एक ही अकाउंट में आ जाता है

• ब्याज का नुकसान नहीं होता

• टैक्स से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं

• पूरा सर्विस पीरियड जुड़ जाता है

• रिटायरमेंट के समय बड़ी रकम मिलती है

अगर खाते अलग अलग रहें तो कुछ पीएफ अकाउंट इनऑपरेटिव भी हो सकते हैं जिस पर ब्याज और टैक्स दोनों का नुकसान हो सकता है.

पीएफ खाता मर्ज न करने पर क्या दिक्कतें होंगी?

• विदड्रॉअल के समय बार बार क्लेम करना पड़ सकता है

• पूरा पैसा एक साथ नहीं मिल पाता

• ब्याज पर टैक्स लगने की संभावना बढ़ जाती है

• पुराने खाते से पैसा निकालना मुश्किल हो सकता है.

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