लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कोई आम बात नहीं है. करीब 4 दशक बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है. यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
- गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है. उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है.
- गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्ताव लाया जाना अफसोसजनक है. शाह ने कहा, ‘‘अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है.''
- गृह मंत्री ने कहा, ‘‘जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं.'' शाह ने कहा कि बजट सत्र के पिछले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैम्बर में ऐसा माहौल खड़ा किया गया कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई थी.
- उन्होंने कहा कि अगर सदन के नियमों के खिलाफ कोई बोलता है तो लोकसभा अध्यक्ष को उसे रोकने और बाहर निकालने का अधिकार है.
- गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अक्सर सदन के नियमों का उल्लंघन किया है. इनमें से कई नियम जवाहरलाल नेहरू के समय में बनाए गए थे. उन्होंने कहा कि स्पीकर पार्टी लाइन से ऊपर होते हैं और लोकसभा के नियमों के तहत स्पीकर का शब्द आखिरी होता है. उन्होंने विपक्ष पर स्पीकर के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि किसी को भी पार्लियामेंट्री नियमों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है.
- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ की भूमिका दी है. आप मध्यस्थ पर ही शक कर रहे हैं. 75 सालों में, दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को 'पाताल' से भी गहरा बनाया है. विपक्ष ने उस गहरी नींव की साख पर ही सवाल उठाया है."
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "अब तक तीन प्रस्ताव लाए गए हैं. 1956 में, सोशलिस्ट पार्टी ने जी. वी. मावलंकर के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था. 1966 में, सोशलिस्ट पार्टी ने एक बार फिर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जो उस समय लोकसभा के अध्यक्ष थे."
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं लेकिन आंदोकलकारी को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पड़ेगा. नियम 375 के तहत गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन को स्थगित करना है. आप किसी को बोलने ही नहीं देंगे और विरोध करते रहेंगे और प्रधानमंत्री की कुर्सी तक सारी महिला सांसद एकत्रित होकर आ जाएंगी ये मैं नहीं मानता. नियम 380 के अधीन स्पीकर को अधिकार है कि असंसदीय शब्दों और टिप्पणियों को कार्रवाई से हटाना होगा."
- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "...स्पीकर का प्रथम कर्तव्य व्यवस्था और शिष्टाचार बनाए रखना है. कोई भी व्यक्ति खड़े होकर अपने मन से कुछ भी बोलेगा तो स्पीकर को उसे बैठाना पड़ेगा क्योंकि विषय तय होते हैं. शशि थरूर, बालू साहब जैसे कितने वरिष्ठ सदस्य हैं वहां मुझे समझ नहीं आता कि वे क्यों नहीं सिखाते इन्हें. इतना सिखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए."
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "इनमें कितनी गंभीरता है मैं बाताता हूं. 80% से अधिक भाषण स्पीकर के आचरण पर नहीं सरकार का विरोध करने के लिए है. सरकार का विरोध करने के लिए ढेर सारी धाराएं और नियम हैं. आप सरकार का विरोध करने के लिए लोकतंत्र की गरिमा के प्रतीक लोकसभा स्पीकर पर सवालिया निशान लगा रहे हैं."
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "कुछ सदस्यों ने कहा कि यह(अविश्वास प्रस्ताव) माइक के कारण आया है, माइक बंद होता है. अभी गिरिराज सिंह भी खड़े होकर पप्पू यादव के खिलाफ बोल रहे थे तो उनका माइक बंद कर दिया गया. मंत्री होने के बावजूद भी माइक बंद होता है. यह सदन नियमों से चलता है, जो नियमों, अनुशासन से नहीं चलेगा उसका माइक बंद होगा और बंद हो ही जाना चाहिए."