- दिल्ली मेट्रो में विवाद होने पर तुरंत इमरजेंसी टॉक बैक बटन दबाकर ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क करें मदद के लिए
- मेट्रो स्टेशन पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को तुरंत घटना की जानकारी देकर सहायता प्राप्त की जा सकती है.
- मेट्रो में झगड़ा या गाली गलौज करने पर मेट्रो रेलवे अधिनियम के तहत 2 हजार 5 सौ रुपये तक जुर्माना लगाया जाता है.
मेट्रो दिल्ली-एनसीआर समेत देश के सभी बड़े शहरों में लोकप्रिय साधन बनकर उभरा है, देशभर में लाखों लोग हर दिन दफ्तर आने जाने के लिए मेट्रो इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इस बीच मेट्रो में सफर के दौरान कई ऐसी खबरें भी सामने आती है, जिससे रूह कांप जाती है. अभी हाल ही में दिल्ली मेट्रो में सीट के लिए हुए मामूली विवाद में एक शख्स को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि अगर मेट्रो में सफर के दौरान कोई विवाद हो जाए, तो कैसे कानूनी मदद हासिल कर सकते हैं.
मेट्रो परिवहन का सबसे लोकप्रिय साधन बन चुका है, लेकिन कई बार यात्रियों के बीच छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं. अगर मेट्रो परिसर या कोच के अंदर कोई बदतमीजी करने लगे, तो घबराने या कानून हाथ में लेने के बजाय तुरंत आधिकारिक मदद लेनी चाहिए. दरअसल, मेट्रो या मेट्रो परिसर में नियम तोड़ने पर प्रशासन और पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है.
तुरंत मदद पाने के सबसे तेज तरीके
मेट्रो कोच के अंदर दरवाजों के पास एक इमरजेंसी टॉक बैक बटन होता है. लड़ाई या आपातकालीन स्थिति में इस बटन को दबाकर आप सीधे मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर से बात कर सकते हैं. वे तुरंत अगले स्टेशन पर सुरक्षा गार्ड को सतर्क कर देंगे. अगर आप स्टेशन या प्लेटफॉर्म पर हैं, तो तुरंत स्टेशन कंट्रोल रूम या कस्टमर केयर सेंटर पर जाएं. वहां मौजूद अधिकारी तुरंत सुरक्षाकर्मियों को मौके पर भेजेंगे. दरअसल, प्लेटफॉर्म, एंट्री गेट और टिकट काउंटर पर हमेशा सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. उन्हें तुरंत घटना की जानकारी दें.
हेल्पलाइन नंबरों की भी ले सकते हैं मदद
- दिल्ली मेट्रो: 24*7 हेल्पलाइन 155370
- CISF सुरक्षा नियंत्रण: 1911
- आपातकालीन पुलिस सेवा:112
- X Handle: @Official_DMRC
- मेट्रो कस्टमर केयर नः 18001805014
लड़ाई-झगड़ा करने पर कितना लगेगा जुर्माना
मेट्रो में विवाद करने, गाली गलौज करने या सहयात्रियों को असुविधा पहुंचाने पर मेट्रो रेलवे अधिनियम, 2002 और भारतीय न्याय संहिता के तहत सख्त कार्रवाई होती है.
मेट्रो अधिनियम के तहत जुर्माना
मेट्रो के भीतर लड़ाई करने या हंगामा करने पर जुर्माना बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, साथ ही सुरक्षा अधिकारी आपको तुरंत मेट्रो से बाहर कर सकते हैं. वहीं, महिला कोच में अनाधिकृत प्रवेश करने के बाद विवाद करने पर जुर्माना 5,000 रुपये तक हो सकता है.
BNS के तहत आपराधिक मामले और जेल
- शांति भंग करने पर बीएनएस धारा 352 के तहत जानबूझकर गाली देना या उकसाने पर 2 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.
- महिला की गरिमा को ठेस के मामले में बीएनएस धारा 79 के तहत महिला के खिलाफ अभद्र भाषा या अश्लील हरकत करने पर यह गैरजमानती अपराध बनता है, जिसमें कड़ी सजा मिलती है.
- आपराधिक धमकी के मामले में बीएनएस की धारा 351 के तहत जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देने पर 2 से 7 साल तक की कैद हो सकती है.
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भूलकर भी न करें ये गलतियां
- हाथापाई करना कानूनी अपराध है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस स्टेशनों पर ही आरोपियों को दबोच लेती है.
- बिना ठोस कारण के अलार्म बटन दबाने पर भी जुर्माना लग सकता है.
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