- देश के 8 एयरपोर्ट पर फुल बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे.
- सामानों की चेकिंग के लिए 3D स्कैनिंग का इस्तेमाल होगा.
- एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी BCAS की सभी रेगुलेटरी सेवा.
फ्लाईदुबई विमान की घटना के बाद भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है और एयरपोर्ट पर सुरक्षा पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है. सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए देश के 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स पर मॉडर्न फुल-बॉडी स्कैनर (Full-Body Scanners) लगाने की प्रक्रिया तेजी से जारी है. यानी हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था को अपग्रेड करने जा रही है. सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) मिलकर देश के एयरपोर्ट पर फुल-बॉडी स्कैनर लगाने और पूरी सुरक्षा प्रक्रिया को डिजिटल करने जा रहे हैं.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों से सलाह ली जाएगी और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच जारी है.
देश के 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर की मंजूरी
सुरक्षा जांच को आधुनिक बनाने के लिए देश के 8 चुनिंदा एयरपोर्ट्स पर मॉडर्न फुल-बॉडी स्कैनर (Full-Body Scanners) लगाने की प्रक्रिया तेजी से जारी है. कुछ हवाई अड्डों पर ये मशीनें पहुंच भी चुकी हैं. इसके लिए जिन एयरपोर्ट्स को मंजूरी दी गई है. इनमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, कोच्चि और अहमदाबाद एयरपोर्ट शामिल हैं.
प्राइवेसी का ख्याल और भारतीय पहनावे के लिए विशेष एल्गोरिदम
यात्रियों की प्राइवेसी को लेकर मंत्रालय ने साफ किया है कि स्कैनर में किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान या चेहरा सामने नहीं आएगा. स्क्रीन पर केवल शरीर का एक ग्राफिकल मॉडल दिखाई देगा, जो केवल शरीर पर छिपाई गई किसी संदिग्ध वस्तु या हथियार की इमेज को ही हाइलाइट करेगा. इसके अलावा, भारतीय संस्कृति और पहनावे को ध्यान में रखते हुए इसके सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम में विशेष बदलाव किए जा रहे हैं. फिलहाल सुरक्षा जांच के दौरान महिलाओं का मंगलसूत्र या धार्मिक धागे जैसी चीजें स्कैनर में डिटेक्ट हो जाती हैं, जिससे फॉल्स अलार्म बजता है. अब सिस्टम में ऐसी वस्तुओं को Allowed Items के तौर पर पहचानने की व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि यात्रियों को बेवजह परेशानी न हो.
पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगा BCAS
नागरिक उड्डयन सुरक्षा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए BCAS की सभी रेगुलेटरी सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है. यह नया पोर्टल अक्टूबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है. इसमें आवेदन करने से लेकर क्लियरेंस तक की पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी. वहीं एयरपोर्ट एंट्री परमिट (AEP) के लिए अब यात्रियों या कर्मियों को व्यक्तिगत रूप से फिंगरप्रिंट देने नहीं जाना पड़ेगा. नई व्यवस्था में फेशियल बायोमेट्रिक्स को ऑनलाइन ही रिकॉर्ड किया जाएगा, जिससे यह प्रक्रिया कॉन्टैक्टलेस, पेपरलेस और अत्यधिक सुरक्षित हो जाएगी.
CTX मशीनों से होगी सामान की 3D स्कैनिंग
एयरपोर्ट पर यात्रियों के हैंड बैगेज और सामान की सुरक्षा के लिए CTX (Computered Tomography X-ray) मशीनों को तैनात करने पर भी काम जारी है. यह मशीन सामान की एडवांस 3D स्कैनिंग करती है, जिससे संदिग्ध विस्फोटक पदार्थों का तुरंत और सटीक पता लगाया जा सकता है. इसके तकनीकी मानकों को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञों और इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ चर्चा की जा रही है.
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