अपना घर खरीदना सभी लोगों का सपना होता है. नौकरी और बिजनेस करने वाले अपनी कमाई से अपना आशियाना खरीदना जरूर चाहते हैं. हालांकि घर खरीदने के लिए लिया गया होम लोन (Home Loan) बड़ी जिम्मेदारी होती है. क्योंकि यह लंबे समय तक चलता है. ऐसे में आपको हमेशा सोच समझ कर सारे काम करने होते हैं. ऐसा इसलिए भी की आपकी छोटी गलतियां भविष्य में सालों तक आपको परेशान कर सकती है और आपकी जेब पर प्रभाव डाल सकती है.
घर की कीमत हमेशा से अधिक ही होती है. ऐसे में लोन अप्रूवल की चुनौती जरूर होती है, लेकिन इससे ज्यादा चुनौती होती है सही फैसला लेने में. क्योंकि आप बार-बार खरीद नहीं सकते और ऐसे में आपको छोटी-छोटी गलतियों से बचना जरूरी है. होम लोने लेने में जरा सी जल्दबाजी बाद में बड़ी परेशानियों का कारण बनती है. ऐसे में आपको 3 बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है.
EMI देखकर लोन का फैसला न करें
घर खरीदते वक्त होम लोन लेने में ज्यादातर लोग केवल EMI को देखते हैं. EMI देखते ही वह लोन का फैसला कर लेते हैं. हालांकि मासिक EMI पूरे खर्च का एक हिस्सा भर है. लेकिन आपको लोन लेते वक्त ड्यूरेशन, टोटल इंटरेस्ट, प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस फीस और बाकी खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. EMI के साथ इसकी लंबी ड्यूरेशन को भी देखना होगा. क्योंकि इसमें इंटरेस्ट के तौर पर आपको भारी भरकम रकम देने पड़ते हैं. ऐसे में केवल महीने की EMI नहीं बल्कि कर्ज की कुल लागत पर भी ध्यान देना जरूरी है.
ज्यादा लोन भी बनता है परेशानी का कारण
बैंक अकसर आपको ज्यादा से ज्यादा लोन देने को तैयार होता है. हालांकि वह आपकी क्षमता के मुताबिक आपके लोन की रकम तय करता है. लेकिन बैंक को नहीं पता कि आपके अपने खर्च कितने हैं. यह क्रेडिट स्कोर और सैलरी या इनकम देखकर बैंक तय करता है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपको बैंक जितना लोन दे उतना पूरा ले लिया जाए. आपको लोन के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों का भी सोचना होगा. बच्चों की पढ़ाई से लेकर रिटायरमेंट प्लानिंग, हेल्थ केयर और माता-पिता की देखभाल जैसे खर्चों को कैलकुलेट करने के साथ बढ़ना होगा. जरूरत से ज्यादा लोन लेने पर आप इन जिम्मेदारियों को निभाने में दिक्कतों का सामना कर सकते हैं. लेकिन सुविधाजनक लोन से आपको फाइनेंशियल फ्लैक्सिबिल्टी मिलती है और टेंशन भी कम रहता है.
घर खरीदने में अतिरिक्त खर्च को भूलना
ज्यादातर लोग घर खरीदने में सीधा-सीधा खर्च को जोड़ते हैं. लेकिन इसमें कई छोटे-छोटे खर्च को नजरअंदाज करने से यह एक बड़ा अमाउंट बन जाता है. क्योंकि घर की कीमत के अलावा आपको रजिस्ट्रेशन चार्ज, स्टैंप ड्यूटी, लीगल फीस, इंटीरियर, मेंटेनेंस डिपॉजिट, शिफ्टिंग का खर्च इन सबका भी कैलकुलेशन करना होगा. यह पूरे प्रॉपर्टी खर्च का 5 प्रतिशत तक हो जाता है. जिसका ध्यान नहीं रखने पर आपका जेब पर भारी प्रभाव पड़ता है.
ऐसे में घर खरीदने के बाद लोगों को पर्सनल लोन की जरूरत होती है, जो आपके फाइनेंसियल भविष्य के लिए सही नहीं है. आप छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको परेशानियों का सामना नहीं करना होगा.
यह भी पढ़ेंः केवल रजिस्ट्री कराने से आप नहीं बनते हैं घर के मालिक, 5 सर्टिफिकेट लेना होता है जरूरी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं