घर खरीदने वाले अक्सर सोचते हैं कि रजिस्ट्री करवाने के बाद वह संपत्ति के मालिक बन गए हैं. लेकिन प्रॉपर्टी कानून के तहत केवल रजिस्ट्री कर लेना प्रॉपर्टी के ऑनर्र नहीं होते हैं. यह एक तरह का लीगल डॉक्यूमेंट है कि बेचने वाले ने खरीदार से रकम लेकर प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का समझौता किया है. आपको प्रॉपर्टी का कानूनी मालिक बनने के लिए आपके पास कई जरूरी डॉक्यूमेंट को पूरा करना होता है. इसमें 5 डॉक्यूमेंट है जो जरूरी होते हैं.
म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज सर्टिफिकेट
म्यूटेशन यानी की दाखिल-खारिज बनवाना जरूरी होता है. यह रजिस्ट्री होने के बाद किया जाता है. म्यूटेशन के जरिए नगर निगम या राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी के पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है. अगर म्यूटेशन नहीं कराया जाता है तो रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज रहता है. ऐसे में वह उस प्रॉपर्टी पर लोन ले सकता है. इसमें आपके साथ धोखाधड़ी हो सकता है.
पजेशन यानी कब्जा
पजेशन जिसे आप प्रॉपर्टी पर कब्जा कहते हैं यह लिखित प्रमाण होता है जो बिल्डर या बेचने वाले के द्वारा जारी किया जाता है. इसके तहत आपको आधिकारिक रूप से संपत्ति पर कब्जा सौंपा जाता है. इस सर्टिफिकेट से आप प्रॉपर्टी के पूरे मालिक बनते हैं.
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि आपने जो प्रॉपर्टी खरीदा है या खरीदने जा रहे हैं उस पर कोई पुराना बकाया बैंक लोन या कानूनी विवाद नहीं है.
प्रॉपर्टी का टैक्स रसीद
रजिस्ट्री और म्यूटेशन होने के बाद नगर निगम या लोकल अथॉरिटी में प्रॉपर्टी के नाम पर खाता खुलवाया जाता है. प्रॉपर्टी के नाम पर टैक्स चुकाया जाता है. टैक्स रसीद एक प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का कानूनी सबूत के रूप में माना जाता है.
NOC
किसी सोसाइटी या अपार्टमेंट में घर ले रहे हैं तो RWA या बिल्डर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना जरूरी होता है.
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