दिल्ली सरकार दिवाली तक 20,000 पुरानी और खराब स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट LED लाइटों से बदल देगी. इसके लिए एक सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा जो हर लाइट पर रियल-टाइम में नजर रखेगा और लोगों की शिकायत का इंतजार किए बिना ही खराबी का पता लगा लेगा. यह पहल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के 'स्मार्ट स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट' का हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट के तहत जनवरी 2027 तक पूरी राजधानी में 1 लाख पुरानी स्ट्रीट लाइटों को बदला जाना है.
PWD हेडक्वार्टर में बना कमांड एंड कंट्रोल सेंटर लगातार लाइटों के कामकाज पर नजर रखेगा. इससे अधिकारी दूर से ही खराब या काम न कर रही लाइटों की पहचान कर सकेंगे. इस सिस्टम से विभाग सेंटर से ही लाइटों को कंट्रोल कर सकेगा. सरकार का कहना है कि इससे मेंटेनेंस और रिस्पॉन्स में तेजी आएगी.
रियल टाइम रखी जाएगी नजर
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने गुरुवार को कहा, हर स्ट्रीट लाइट पर रियल-टाइम में नजर रखी जाएगी और किसी भी खराबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा. इस सिस्टम से लाइटों को दूर से कंट्रोल किया जा सकेगा, जिससे रिस्पॉन्स और मेंटेनेंस तेजी से हो पाएगा. अभी कई मामलों में अधिकारियों को खराब स्ट्रीट लाइट के बारे में तभी पता चलता है जब कोई शिकायत मिलती है. नया सिस्टम लाइटों की स्थिति पर लगातार नजर रखकर और खराबी का अपने-आप पता लगाकर इस स्थिति को बदलने के लिए बनाया गया है.
वर्मा ने कहा, पहले रियल-टाइम मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं था. कई मामलों में, खराब लाइट के बारे में जानकारी विभाग को शिकायत मिलने के बाद ही मिलती थी. नए सिस्टम से विभाग को समस्या के बारे में पता चल जाएगा और वे शिकायत का इंतजार किए बिना ही कार्रवाई कर सकेंगे.
सोडियम लाइट की जगह स्मार्ट LED लाइटें लगेंगी
इस प्रोजेक्ट के तहत पुरानी सोडियम लाइटों की जगह कम बिजली खपत वाली स्मार्ट LED लाइटें लगाई जाएंगी. अधिकारियों का अनुमान है कि इस बदलाव से बिजली और रखरखाव (मेंटेनेंस) के खर्च में हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. स्मार्ट स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 473 करोड़ रुपये है, जिसमें पांच साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है. सरकार ने पेमेंट को लाइटिंग नेटवर्क के परफॉर्मेंस से भी जोड़ा है.
प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली प्राइवेट एजेंसी को पेमेंट तभी मिलेगा जब लगाई गई लाइटें पूरी तरह से चालू हो जाएंगी. इससे कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के दौरान लाइटों के परफॉर्मेंस, देखभाल और समय पर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उसी एजेंसी की होगी. इस व्यवस्था का मकसद यह पक्का करना है कि एजेंसी न सिर्फ लाइटें लगाने के लिए, बल्कि उन्हें चालू हालत में रखने के लिए भी जिम्मेदार रहे.
अंधेरी जगहों और सड़क सुरक्षा पर ध्यान
सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दिल्ली में खराब स्ट्रीट लाइटों की वजह से बनी अंधेरी जगहों (डार्क स्पॉट्स) की समस्या को दूर करने में भी मदद करेगा. सरकार ने बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग को सड़क सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा है, खासकर उन इलाकों में जहां कम रोशनी एक चिंता का विषय रही है.
पहला बड़ा लक्ष्य दिवाली तक 20,000 स्ट्रीट लाइटों को बदलना है, और उसके बाद जनवरी 2027 तक कुल 1 लाख लाइटों को बदलना है.
एक बार नया मॉनिटरिंग सिस्टम लागू हो जाने के बाद, PWD अपने कंट्रोल रूम से ही खराबी का पता लगा सकेगा. इसके लिए उसे खराब स्ट्रीट लाइट की पहचान करने के लिए सिर्फ निवासियों की शिकायतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
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