दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर दिया है. इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया. यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि उन सभी होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है जो सुरक्षा इंतजामों को हल्के में लेते हैं.
होटल और रेस्टोरेंट ऐसी जगहें होती हैं जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं. यहां किचन में गैस, तेल और बिजली के कई उपकरण लगातार इस्तेमाल होते हैं. ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. अगर आप नया होटल, रेस्टोरेंट या कैफे शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाकर आग लगने के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं किन बातों को ध्यान में रखकर इस तरह के खतरे को टाला जा सकता है.
किचन की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी
किसी भी रेस्टोरेंट या होटल में आग लगने का सबसे बड़ा खतरा किचन से होता है. तंदूर, डीप फ्रायर और गैस रेंज जैसे उपकरण लगातार गर्म रहते हैं. इसलिए इनके ऊपर ऑटोमैटिक किचन फायर सिस्टम लगवाना चाहिए. यह सिस्टम आग लगने पर अपने आप सक्रिय होकर उसे फैलने से रोकता है. तेल से लगी आग पर पानी डालना खतरनाक हो सकता है, ऐसे सिस्टम फोम या विशेष केमिकल से आग बुझाते हैं.
किचन के एग्जॉस्ट हुड की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. समय के साथ इसमें तेल और चिकनाई जमा हो जाती है, जो आग पकड़ सकती है.
इसके अलावा गैस लीक डिटेक्टर जरूर लगवाएं. अगर किचन में गैस रिसाव होता है, तो ये डिटेक्टर तुरंत अलार्म बजाकर अलर्ट करते हैं.
बिजली से जुड़ी लापरवाही न करें
- शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग भी आग लगने की बड़ी वजह होती हैं. इसलिए MCB और ELCB जैसे सुरक्षा उपकरण लगवाएं. ये किसी खराबी की स्थिति में बिजली की सप्लाई तुरंत बंद कर देते हैं.
- हर 6 महीने में वायरिंग की जांच करवाएं. पुरानी वायरिंग, ढीले कनेक्शन और एक ही सॉकेट पर कई उपकरण चलाना खतरनाक साबित हो सकता है.
- ओवन, डीप फ्रीजर और एसी जैसे भारी उपकरणों के लिए अलग बिजली लाइन होनी चाहिए.
- रेस्टोरेंट और होटल में पर्याप्त संख्या में ABC टाइप फायर एक्सटिंग्विशर रखें, साथ ही कर्मचारियों को भी इन्हें इस्तेमाल करना सिखाएं.
- किचन, स्टोर रूम, डाइनिंग एरिया और स्टाफ रूम में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म लगाना भी जरूरी है.
- किसी भी आपात स्थिति में सबसे पहले स्टाफ ही मौके पर मौजूद होता है. इसलिए कर्मचारियों को नियमित फायर सेफ्टी ट्रेनिंग दें.
- महीने में कम से कम एक बार मॉक ड्रिल कराएं ताकि सभी कर्मचारियों को पता हो कि आग लगने पर क्या करना है और ग्राहकों को सुरक्षित बाहर कैसे निकालना है.
- किचन स्टाफ को खासतौर पर यह जानकारी होनी चाहिए कि तेल की आग पर कभी पानी नहीं डालना चाहिए.
- किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में कम से कम दो सुरक्षित निकासी मार्ग रखें, ताकि अगर मुख्य रास्ता बंद हो जाए तो लोग दूसरे रास्ते से बाहर निकल सकें.
- इमरजेंसी लाइट और ग्रीन एग्जिट साइन भी जरूरी हैं ताकि धुएं या अंधेरे में भी रास्ता दिखाई देता रहे.
- एग्जिट गेट और रास्तों पर कभी ताला नहीं लगाएं.
- दिन खत्म होने पर गैस का मुख्य वॉल्व बंद करें, बिजली के अनावश्यक स्विच ऑफ करें और किचन में ज्वलनशील सामान न छोड़ें.
- गैस सिलेंडर को हवादार जगह पर रखें और जरूरत से ज्यादा सिलेंडर स्टोर न करें.
होटल या रेस्टोरेंट शुरू करने से पहले फायर एनओसी लेना जरूरी है. इसके साथ ही समय-समय पर फायर सेफ्टी ऑडिट भी कराना चाहिए. इस तरह सुरक्षा नियमों का पालन कर आप न केवल किसी भी तरह के बड़े हादसे को टाल सकते हैं, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में कानूनी और आर्थिक नुकसान से भी बच सकते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं