उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सबसे ज़्यादा भीड़-भाड़ वाली सड़कों से गुज़रने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है. क्योंकि शहर का पहला इंटीग्रेटेड डबल-डेकर मेट्रो-फ़्लाईओवर प्रोजेक्ट जल्द तैयार हो जाएगा. दिल्ली सरकार ने बुधवार को बताया कि करावल नगर प्रोजेक्ट का 88 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. इस प्रोजेक्ट की संशोधित लागत 291 करोड़ रुपये मंजूर की गई है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
इस स्ट्रक्चर में एक ही प्रोजेक्ट के तहत रोड फ़्लाईओवर और एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर दोनों होंगे, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी और नीचे की सड़कों पर दबाव कम होगा.
इस प्रोजेक्ट के बारे में 10 खास बातें
- यह प्रोजेक्ट नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के व्यस्त यमुना विहार-भजनपुरा रूट पर बनाया जा रहा है, जहाँ अक्सर भारी ट्रैफिक जाम रहता है.
- 1.40 किलोमीटर लंबा यह स्ट्रक्चर यमुना विहार और भजनपुरा मेट्रो स्टेशनों के बीच बनेगा और मंगल पांडे मार्ग पर करावल नगर, घोंडा और बृजपुरी जंक्शन को कवर करेगा.
- इसे दिल्ली के पहले इंटीग्रेटेड डबल-डेकर स्ट्रक्चर के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें एक ही प्रोजेक्ट के तहत मेट्रो कॉरिडोर और रोड फ्लाईओवर दोनों शामिल हैं.
- सरकार का अनुमान है कि फ्लाईओवर खुलने के बाद 65 से 70 प्रतिशत ट्रैफिक एलिवेटेड कॉरिडोर पर शिफ्ट हो जाएगा. इसके बाद नीचे की सड़क का इस्तेमाल मुख्य रूप से लोकल ट्रैफिक के लिए होने की उम्मीद है.
- यह प्रोजेक्ट गोकुलपुरी से सिग्नेचर ब्रिज तक खजूरी खास होते हुए एक सिग्नल-फ्री रूट देगा, जिससे रोज़ाना यात्रा करने वाले हज़ारों लोगों का समय बच सकता है.
- लगभग 88 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. 22 जुलाई तक, 80 में से 74 डेक स्लैब लगाए जा चुके थे, जबकि छह अभी बाकी हैं.
- योजना के अनुसार 5,600 मीटर क्रैश बैरियर में से 4,100 मीटर का काम पूरा हो चुका है. 18 में से चौदह एक्सपेंशन जॉइंट भी लगाए जा चुके हैं.
- बाकी बचे कामों में रैंप का निर्माण, सड़क की आखिरी सतह बिछाना और 100 इलेक्ट्रिक पोल लगाना शामिल है. क्रैश बैरियर की पेंटिंग और कंक्रीट स्ट्रक्चर पर सुरक्षात्मक एंटी-कार्बोनेशन कोटिंग का काम भी अभी बाकी है.
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी की बैठक में 291 करोड़ रुपये की संशोधित प्रोजेक्ट लागत को मंज़ूरी दी गई. इस प्रोजेक्ट को मूल रूप से 220.10 करोड़ रुपये की लागत के लिए मंज़ूरी मिली थी.
- फ्लाईओवर में दोनों तरफ तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर होगा. यह स्ट्रक्चर 23 मीटर चौड़ा होगा और इसके दोनों सिरों पर 140 मीटर लंबे रैंप होंगे.
इस प्रोजेक्ट को दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा पूरा किया जा रहा है. पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और DMRC के बीच 24 फरवरी, 2021 को एक समझौता हुआ था.
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस फ्लाईओवर का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से किया जा रहा है. इसमें दोनों दिशाओं में 3-3 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है. परियोजना में प्री-कास्ट वायाडक्ट, रैंप पर आरई वॉल और 1000 मिमी व्यास की मजबूत नींव (बोरड कास्ट-इन-सीटू पाइल) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. फ्लाईओवर की कुल लंबाई 1.40 किलोमीटर होगी. दोनों ओर 140-140 मीटर लंबे रैंप बनाए जा रहे हैं. इसकी कुल चौड़ाई 23 मीटर होगी और इसके लोअर डेक पर 6 लेन का फ्लाईओवर बनाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य राजधानी के लोगों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराना है. दिल्ली की पहली इंटीग्रेटेड डबल-डेकर फ्लाईओवर-मेट्रो परियोजना उत्तर-पूर्वी दिल्ली की यातायात व्यवस्था को नई मजबूती देगी. हमारी सरकार सभी विकास परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
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