VB-GRAMG: केंद्र सरकार ने सोमवार को ग्रामीण रोजगार से जुड़ा एक नया कानून लागू करने की अधिसूचना जारी की है. इस नए कानून का नाम है विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB‑GRAMG), 2025 है. यह कानून करीब 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) कानून की जगह लेगा. यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा. अधिसूचना का मतलब होता है सरकार का आधिकारिक आदेश, जिससे किसी कानून को कानूनी रूप से लागू किया जाता है. अब अधिसूचना जारी होने के बाद राज्यों को कहा गया है कि वे अपने सिस्टम, स्टाफ और योजनाओं को तैयार करें, ताकि तय तारीख से इस नए कानून को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके.
1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार कानून लागू होगा
VB‑GRAMG विधेयक को 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था. इसे 18 दिसंबर 2025 को लोकसभा ने पास कर दिया, जबकि 19 दिसंबर 2025 की आधी रात के बाद राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई. इसके बाद 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली. अब ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी करते हुए साफ कर दिया है कि यह कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा.
मनरेगा (MGNREGA) कानून साल 2005 में लागू हुआ था. इसके तहत हर ग्रामीण परिवार को एक साल में 100 दिन का मजदूरी वाला काम देने की गारंटी थी. इस कानून में राज्य सरकारें जमीन पर काम की मांग के हिसाब से हर साल अपना प्लान भेजती थीं और केंद्र सरकार को उसी के अनुसार पैसा जारी करना पड़ता था. अब नए कानून VB‑GRAMG एक्ट में दो बड़े बदलाव किए गए हैं. एक काम के दिनों की संख्या और दूसरा केंद्र‑राज्य के बीच पैसे देने का तरीका.
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काम के दिन बढ़े
नए कानून के तहत हर पात्र ग्रामीण परिवार को अब एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का काम मिलेगा. इसका मतलब है कि मनरेगा से 25 दिन ज्यादा काम की गारंटी नए कानून के तहत मिलेगी.
फंड देने का तरीका बदलापहले मनरेगा में राज्य सरकारें अपनी जरूरत के हिसाब से काम का प्लान भेजती थीं और केंद्र सरकार पूरी राशि देती थी. इसमें खर्च की कोई तय सीमा नहीं थी. अब केंद्र सरकार हर राज्य के लिए खर्च की एक तय सीमा तय करेगी. अगर, कोई राज्य इस सीमा से ज्यादा खर्च करता है, तो अतिरिक्त पैसा राज्य सरकार को खुद देना होगा.
योजना में पैसा बांटने का तरीकाइस योजना में पैसा बांटने का तरीका 60:40 रखा गया है. यानी 60% खर्च केंद्र सरकार और 40% खर्च राज्य सरकारें करेंगी. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को केंद्र से ज्यादा मदद मिलेगी. जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी. इस योजना पर हर साल कुल खर्च करीब 1.51 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें राज्यों का हिस्सा भी शामिल है. इसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 95,700 करोड़ रहेगा.
नए कानून के तहत यह भी तय किया गया है कि हर काम की योजना विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) से ही ली जाएगी. बाद में इन योजनाओं को ऊपर के स्तर पर जोड़ कर ‘विकसित भारत नेशनल रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक' से जोड़ा जाएगा.
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