देश में मानसून जमकर बरस रहा है. दिल्ली के साथ कई राज्यों में लगातार बारिश हो रही है, जिसकी वजह से ट्रैफिक की रफ्तार थमी है और सड़कें तालाब में बदल गई हैं. हर साल मानसून के आते ही इलेक्ट्रिक व्हीकल मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल आता है कि क्या लगातार बारिश और बाढ़ जैसी कंडीशन में इलेक्ट्रिक कार चलाना सेफ है? इसका बिना कुछ सोचे सीधा जवाब है हां.
मॉर्डन ईवी कारों को इस तरह से बनाया जाता है कि वो हर मौसम में अच्छे से काम कर सकें. हालांकि एक बात आपको बता दें, गाड़ी दमदार रहे, कोई दिक्कत भविष्य में ना आए, इसके लिए उसका ध्यान रखना जरूरी है. मानसून में सड़कों पर भरा हुआ पानी, गंदगी लगे हुए चार्जिंग पोर्ट, जेब पर भारी पड़ सकता है. इसलिए चाहे आपने कुछ दिन पहले ही पहली ईवी खरीदी हो या आप सालों से इसे चला रहे हों, मानसून के इस सीजन में इन 5 प्रैक्टिकल टिप्स के जरिए आप ट्रैवलिंग और ईवी कार को अच्छे से मैनेज कर पाएंगे.
ऐसे में सड़क पार करना पड़ेगा भारी
देश में मौजूद ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों के बैटरी पैक और हाई-वोल्टेज कंपोनेंट्स को बहुत सेफ्टी के साथ सील किया जाता है, जिससे पानी अंदर नहीं जा पाए. इसलिए बारिश में गाड़ी चलाना कोई परेशानी की बात नहीं है, दिक्कत तब शुरू होती है, जब इसे गहरे पानी से भरी सड़कों पर उतार देते हैं. इसलिए अगर आपको नहीं पता कि पानी कितना गहरा है, तो वहां जाने का रिस्क बिल्कुल ना लें. भले ही बैटरी सील्ड हो, लेकिन लगातार गंदे पानी की वजह से व्हील बियरिंग्स, सस्पेंशन पार्ट्स, ब्रेकिंग हार्डवेयर और इलेक्ट्रिकल कनेक्टर्स डैमेज हो सकते हैं.
चार्जिंग बाद में पहले पोर्ट की सफाई जरूरी
अमूमन नई ईवी लेने के बाद बारिश के मौसम में ग्राहक इस चार्जिंग करने से डरते हैं. सच तो ये है कि बारिश में भी चार्जिंग करना पूरी तरह सेफ है क्योंकि कार और चार्जर दोनों में सेफ्टी के कई लेयर्स होते हैं, जो तब तक करेंट शुरू नहीं करते जब तक कनेक्शन लॉक ना हो जाए. लेकिन समस्या तब आती है, जब चार्जिंग पोर्ट के अंदर नमी और गंदगी है जमा हो जाती है. इसलिए प्लग लगाने से पहले चेक करें कि पोर्ट में गंदगी, पत्तियां या पानी तो नहीं हैं. अगर ऐसा है तो उसे पहले कपड़े से साफ कर लें. साथ ही, एक बात का और ध्यान रखिए कि बारिश में लोकल या डैमेज्ड एक्सटेंशन कॉर्ड का इस्तेमाल नहीं करना है.
एक्सीलेटर और ब्रेक का इस्तेमाल एकदम नहीं
मानसून के समय सड़क और टायर के बीच ग्रिप कम हो जाती है. इलेक्ट्रिक कारें एक दम से मैक्सिमम टॉर्क बनाती हैं. ऐसे में अगर गीली सड़क पर अचानक एक्सीलेटर दबाएंगे, तो पहिए तेजी से स्पिन होकर ग्रिप खो सकते हैं. इसलिए मानसून में सेफ ड्राइविंग का बेस्ट तरीका है कि आप धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाएं और आगे चल रही गाड़ी से अच्छा खासा स्पेस बनाकर रखें. अगर ईवी में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग को एडजस्ट करने का ऑप्शन है, तो बारिश में इसे कम या लाइट सेटिंग पर रखें, जिससे कार एकदम से स्लिप ना हो.
पानी में गई कार, अब इन पार्ट्स की करें जांच
देखा गया है कि लोग बारिश में कार चलाने के बाद ऊपर से तो कार को चमका लेते हैं, लेकिन नीचे के हिस्से को भूल जाते हैं. आप किसी भरे हुए पानी वाले इलाके से आए हैं, तो अपनी गाड़ी के अंडरबॉडी को जरूर चेक करें. देखें कि कहीं कोई प्लास्टिक कवर ढीला तो नहीं है, कोई पैनल लटक तो नहीं रहा या कोई नया स्क्रैच तो नहीं आया. अगर पानी से निकलने के बाद आपके डैशबोर्ड पर कोई भी वॉर्निंग लाइट जलती है, तो कार को ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर चेक जरूर कराएं. ये ना सोचें कि अभी कोई दिक्कत लग नहीं रही तो बाद में दिखा लेंगे.
कीचड़ जमने के बाद काम कार को धोना ना भूलें
मानसून के पानी में मिट्टी, तेल और सड़क की ग्रिट मिली होती है, जो कार के व्हील आर्च, चार्जिंग फ्लैप और अंडरबॉडी पर जमा हो जाती है. इसे कई दिनों तक ऐसे ही छोड़ देने से मेटल पार्ट्स में जंग लगने के चांस बढ़ जाते हैं. इसलिए बारिश के बाद कार को एक बार नॉर्मल पानी से जरूर साफ लें. सफाई के समय चार्जिंग फ्लैप और कनेक्टर एरिया पर को जरूर एक बारी चेक कर लें, जिससे फ्यूचर में चार्जिंग को लेकर कोई समस्या ना बने.
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