Heart Aerospace x1 First Flight: फ्लाइट टिकट की कीमतों को लेकर देश में बहस छिड़ी हुइ है. सर्ज प्राइसिंग और त्यौहारों में अचानक एयर टिकट के दाम 3 से 4 गुने हो जाने के मसले पर एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है तो दूसरी ओर सरकार इस पर कड़े रेगुलेशन बना रही है. इस बीच अमेरिका से एक खबर आई है, जिसे पढ़ते हुए ऐसा लग रहा है जैसे भविष्य में हवाई सफर एकदम सस्ता हो सकता है. सस्ते इतने कि दिल्ली से जयपुर की फ्लाइट का टिकट 50-100 रुपये तक में मिल सकता है.
हम हवा में बातें नहीं कर रहे, बल्कि हवा में उड़ने के खर्च पर बात कर रहे हैं! दरअसल, अमेरिकी एविएशन कंपनी 'हार्ट एयरोस्पेस' (Heart Aerospace) ने पहली बार अपनी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट X1 को उड़ाया है, जिसका खर्च बहुत ही मामूली है.

'हार्ट एयरोस्पेस' कई तरह के एयरक्राफ्ट बना रही है, कुछ एयरलाइन कंपनियां ये विमान लेने की तैयारी में भी हैं.
Photo Credit: Heart Aerospace
27 मिनट की उड़ान, खर्च- 500 रुपये से भी कम
हार्ट एयरोस्पेस के एयरक्राफ्ट X1 ने 27 मिनट की उड़ान भरी और इसमें महज 5 डॉलर की बिजली का खर्च आया. यानी महज 578 रुपये के बराबर. ये एयरक्राफ्ट न्यूयॉर्क के एक रीजनल एयरपोर्ट से उड़ा. करीब 1,100 फीट (335 मीटर) की ऊंचाई तक गया और सिर्फ एक पायलट के साथ ये टेस्ट पूरा किया. इसमें एक भी यात्री नहीं थे. लेकिन अगर इसमें 30 यात्री सफर करते तो प्रति व्यक्ति खर्च 17 रुपये से कम पड़ता. यानी एक अच्छी-सी चाय या कॉफी की कीमत से भी बहुत कम.
भारत के संदर्भ में इसे देखें तो दिल्ली से देहरादून की उड़ान पर इसकी कल्पना कर सकते हैं. आधे घंटे की उड़ान का खर्च 500 रुपये पड़ेगा. इसमें मेंटेनेंस, एयरपोर्ट फीस, इंश्योरेंस, पायलट-क्रू वगैरह की सैलरी और बाकी खर्च भी जोड़ दें तो भी टैक्सी के खर्च में हवाई सफर संभव है.
तो क्या सच में 5 डॉलर के खर्च में उड़ेंगे फ्लाइट?
ऐसा नहीं है. 5 डॉलर का डेटा केवल 27 मिनट की डेमो फ्लाइट के दौरान खर्च हुई बिजली का है. इसमें एयरक्राफ्ट की पूरी ऑपरेटिंग कॉस्ट नहीं है. इसमें पायलट की सैलरी, मेंटेनेंस, एयरपोर्ट चार्ज, इंश्योरेंस, फाइनेंसिंग और बैटरी का डेप्रिसिएशन वगैरह भी तो जुड़ेगा! इसलिए, फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता है कि 500 रुपये के खर्च में फ्लाइट्स उड़ने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

हालांकि, लो एनर्जी कॉस्ट इलेक्ट्रिक एविएशन के सबसे बड़े फायदों में से एक की ओर इशारा करती है. हार्ट एयरोस्पेस के फाउंडर और CEO एंडर्स फोर्सलुंड का कहना है कि इलेक्ट्रिक कमर्शियल एयरक्राफ्ट 'एयरलाइन के इकोनॉमिक्स' को पूरी तरह से बदल सकते हैं और आखिरकार हवाई सफर का खर्च कम कर सकते हैं.
कब तक सर्विस देने के लिए एवलेबल होगा ये एयरक्राफ्ट?
X1 का इस्तेमाल हार्ट एयरोस्पेस के प्लान किए गए ES-30 के लिए टेक्नोलॉजी टेस्ट करने में किया जा रहा है. ये 30 सीटों वाला हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट है, जिसे कंपनी 2031 तक सर्विस में लाने की उम्मीद कर रही है.
हार्ट एयरोस्पेस को उम्मीद है कि ES-30 पारंपरिक रीजनल एयरक्राफ्ट की तुलना में एयरक्राफ्ट ऑपरेटिंग कॉस्ट को 40% तक कम कर देगा. कंपनी इस अनुमानित बचत का कारण कम एनर्जी कॉस्ट, कम मेंटेनेंस की जरूरत और एयरक्राफ्ट की ज्यादा भरोसेमंद क्षमता को मानती है. यूनाइटेड, एयर कनाडा और JSX जैसी एयरलाइंस ने इस एयरक्राफ्ट में पहले ही दिलचस्पी दिखाई है.

सवाल घूम-फिर कर वही कि क्या हवाई यात्रा सस्ती हो जाएगी?
कम ईंधन या बिजली का इस्तेमाल करने वाले और कम मेंटेनेंस की जरूरत वाले छोटे एयरक्राफ्ट, कम दूरी की हवाई सेवाओं को चलाने में सस्ता बना सकते हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट से फ्लाइट टिकट के दाम रातों-रात बहुत सस्ते होने की संभावना कम है. टिकट की कीमतों पर टैक्स, एयरपोर्ट फीस, स्टाफिंग, एयरक्राफ्ट फाइनेंसिंग और डिमांड का असर बना रहेगा. हालांकि अगर टेक्नोलॉजी योजना के मुताबिक काम करती है, तो स्थानीय रूट्स पर यात्री सबसे पहले फर्क महसूस कर सकते हैं.
यहां देखें पहली उड़ान का वीडियो:
First Flight ✅ pic.twitter.com/1HvuAxXPzT
— Heart Aerospace (@heartaerospace) August 13, 2026
ये भी पढ़ें: LPG की जगह PNG, सरकार लाई नई स्कीम, सस्ती-साफ गैस पर पकेगा खाना! न बुकिंग की चिकचिक, न खत्म होने की टेंशन
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं