केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल को लेकर कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कुछ अन्य लोग यह गलत प्रचार कर रहे हैं कि यह बिल प्रगतिशील नहीं है और इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे. यह दावा सरासर झूठ है.
अगर कोई व्यक्ति काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं पाता है, तो उसे भत्ता दिया जाएगा, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी. योजना में 60 दिन की 'नो वर्क' विंडो का भी प्रावधान किया गया है.
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प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल का असली उद्देश्य ग्रामीण भारत को मजबूत बनाना है. यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाती है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाएगी. इस बिल के तहत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों को ज्यादा काम और आय मिलेगी.
गांवों से पलायन कम होगा
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि 125 दिनों का रोजगार मिलने से गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन कम होगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर काम पर संबंधित अधिकारी निगरानी रखेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे.
प्रह्लाद जोशी ने पूर्ववर्ती योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक मनरेगा में दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हुआ, लेकिन इसके बावजूद ठोस बुनियादी ढांचा खड़ा नहीं हो पाया.
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की मंशा साफ है कि ग्रामीण इलाकों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए और लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराना ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े.
'विकसित भारत-जी राम जी' बिल के तहत हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 125 दिन का काम दिया जाएगा. रोजगार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा. मजदूरी पर होने वाले खर्च में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी. वहीं पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है. बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं