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G-RAM-G योजना पर केंद्रीय मंत्री ने दी गुड न्‍यूज, लागू होने की तारीख और पूरा प्‍लान बता दिया

नई योजना में राज्यों को कुल खर्च का 40 प्रतिशत वहन करना होगा. मनरेगा की तरह यह योजना भी मांग आधारित होगी और ग्राम पंचायतें गांव के उपयोगी काम तय करेंगी.

G-RAM-G योजना पर केंद्रीय मंत्री ने दी गुड न्‍यूज, लागू होने की तारीख और पूरा प्‍लान बता दिया
VB-G RAM G Scheme: विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)

G-RAM-G योजना पर केंद्रीय मंत्री ने दी गुड न्‍यूज, लागू होने की तारीख और पूरा प्‍लान बता दिया 

भारत सरकार मनरेगा की जगह लाए गए नए VB-G RAM G यानी 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना को नोटिफाई कर उसे 1 अप्रैल, 2026 से लागू करने पर गंभीरता से  विचार कर रही है. केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, नए कानून को संसद की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने के लिए जरूरी रूल्स फ्रेम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इस बारे में एक मसौदा तैयार किया है, जिसपर इंटर-मिनिस्टीरियल कंसल्टेशन जारी है. अधिसूचना जारी होने के 6 महीने के अंदर राज्यों को नयी  "विकसित भारत - जी राम जी" योजना को लागू करना होगा. 

योजना पर शिवराज सिंह ने क्‍या कहा? 

शिवराज सिंह ने दिल्ली में कहा, 'हम जल्दी ही "विकसित भारत - जी राम जी" कानून को नोटिफाई करेंगे. हम रूल्स फ्रेम कर रहे हैं. रूल्स जल्दी ही तैयार कर लिए जायेंगे.' ग्रामीण विकास मंत्री के मुताबिक, 'विकसित भारत - जी राम जी' योजना पर नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 1,51,282 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्तावित प्रावधान है, जिसमें 95,600 करोड़ रुपये से अधिक केंद्र सरकार देगी, जिससे ग्रामीण विकास के लिए संसाधन और मजबूत होंगे.

राज्‍यों को देना होगा 40 फीसदी खर्च, लेकिन... 

नए 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना में राज्यों को कुल खर्च का 40% वहन करना होगा. इस पर कांग्रेस और विपक्षी दलों के सवालों पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा, 'मनरेगा पर 86–88 हजार करोड़ रुपये के पिछले बजट से इसे 1,51,282 करोड़ तक बढ़ाने की घोषणा की गयी है. जब तक ‘विकसित भारत जी-राम-जी' योजना पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक मनरेगा के तहत जहां भी जितने काम की आवश्यकता होगी, वहां काम की कमी नहीं आने दी जाएगी. मैं लगभग चार टर्म एक राज्य का मुख्यमंत्री रहा हूं. कभी पैसे की कमी नहीं आई. कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में इस योजना पर कभी 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च ही नहीं किया. अब अकेले 95,600 करोड़ रुपये से ज्यादा केंद्र सरकार दे रही है. यह राज्यों के लिए बोझ नहीं, विकास में निवेश है और गांव का विकास तो राज्यों को भी करना है.'

पंचायतें तय करेंगी- कौन से काम होंगे? 

शिवराज सिंह के मुताबिक, मनरेगा की तरह ये नयी योजना भी डिमांड ड्रिवन ही है. पहले केवल डिमांड के नाम पर कहीं भी गड्ढा खोद देना या सड़क पर मिट्टी डाल देना आम बात थी, लेकिन अब ग्राम पंचायतें तय करेंगी कि गांव में कौन-कौन से उपयोगी काम होंगे.

कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों द्वारा ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने के आरोपों पर शिवराज सिंह ने कहा, 'ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी चिट्ठी झूठ और फरेब से भरी हुई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी झूठा प्रचार और भ्रम फैलाकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि नई ‘विकसित भारत जी-राम-जी (G-RAM-G)' योजना गरीबों, मजदूरों और गांवों के विकास के लिए एक मजबूत कदम है.'

कांग्रेस पर लगाए ये सारे आरोप 

शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपना आइडिया, आइडियोलॉजी और आइडियल तीनों छोड़ दिए हैं, 1971 में 'गरीबी हटाओ' का नारा देने वाली कांग्रेस ने गरीबों को ही हाशिए पर धकेल दिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं.

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, मनरेगा से बनी 10 करोड़ संपत्तियों में से करीब साढ़े आठ करोड़ संपत्तियां मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान बनी हैं. कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों ने जहां लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मनरेगा पर खर्च किए, वहीं मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक लगभग 9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिनमें कोविड काल के दौरान खर्च किये गए 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये शामिल हैं.

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