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आधार कार्ड फोटोकॉपी देने का झंझट खत्म होगा, होटल-अस्पताल से नौकरी तक ऑनलाइन होगा सत्यापन, UIDAI का नया सिस्टम

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बड़ा बदलाव किया है, इससे किसी भी व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए होटल, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल या सरकारी विभागों में आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी.

आधार कार्ड फोटोकॉपी देने का झंझट खत्म होगा, होटल-अस्पताल से नौकरी तक ऑनलाइन होगा सत्यापन, UIDAI का नया सिस्टम
Aadhaar App offline verification
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नई दिल्ली:

आज आप किसी स्कूल, अस्पताल या किसी भी सरकारी ऑफिस जाते हैं तो आपसे आधार कार्ड मांगा जाता है. कहीं घूमने-फिरने जाते हैं तो आधार की फोटोकॉपी मांगी जाती है. आपका आधार नंबर कितनी जगह इस्तेमाल होता है, आपको खुद पता नहीं होता है.होटल में ठहरने से लेकर मंदिर में दर्शन तक आधार जरूरी हो गया है. लेकिन जल्द ही आपको आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने के इस झंझट से छुटकारा मिलेगा.भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) इसके लिए डिजिटल नेटवर्क को मजबूत कर रहा है. वो 300 से ज्यादा संगठनों का ऑफलाइन वेरीफिकेशन सिस्टम तैयार कर रहा है. इसमें रोजाना की जरूरतों के दौरान किसी व्यक्ति की पहचान को प्रामाणिक करने के लिए अपनेआप सत्यापन हो जाएगा. 

स्कूल-अस्पताल से निजी कंपनियां तक जुड़ीं

इन 300 संस्थानों को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSE) के तौर पर रजिस्टर्ड किया गया है. इनमें होटल-रेस्तरां, अस्पताल, यूनिवर्सिटी-कॉलेज जैसे शिक्षा संस्थान, आयोजनकर्ता कंपनियां, स्विगी-जोमैटो जैसी कंपनियां और सरकारी सेवाओं से जुड़े संस्थान शामिल हैं. जनवरी 2027 से ये सिस्टम ज्यादा बेहतर तरीके से लागू होगा. UIDAI लंबे समय से सरकारी, अर्धसरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों, होटल-रेस्तरां आदि को इस सिस्टम से जुड़ने के अभियान में लगा है, ताकि वो फोटोकॉपी की बजाय ऐप बेस्ड डिजिटल पहचान प्रमाण सत्यापन को अपनाएं. UIDAI ने एक साल में 100 से ज्यादा ऐसे बड़े संगठनों को जोड़ा है. अभी गैस-पानी, बिजली कनेक्शन से लेकर किसी भी सरकारी काम में आधार की फोटोकॉपी लगती है. बैंक, बाजार में छोटे-बड़े काम में आधार फोटोकॉपी मांग ली जाती है.

आधार का ऑनलाइन सत्यापन 

इस योजना का उद्देश्य आधार से पहचान के लिए कागजी दस्तावेज इकट्ठा करने की जगह ऑनलाइन तरीके से सत्यापन कराना है. इससे कागजी झंझट घटेगा और किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा भी नहीं होगा. कोई भी यूजर किसी भी स्कूल-अस्पताल या सरकारी विभाग किसी सेवा के लिए जाता है तो उसे बस सहमति देनी होगी. यूजर की रजामंदी लेने के बाद एप के माध्यम से उसकी पहचान का ब्योरा साझा हो जाता है. इसमें आप यह तय कर सकते हैं कि आपको आधार से जुड़ी कितनी जानकारी किसी सरकारी या प्राइवेट कंपनी से शेयर करनी है. इस कवायद में आपका 12 अंकों का यूनीक आईडी नंबर सत्यापन करने वाले संगठन को नहीं भेजते हैं.

UIDAI ने भरोसा दिलाया है कि सेवाओं का ये विस्तार पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत वैध और पूरी तरह सुरक्षित है. इसमें सहमति के आधार पर यूजर्स का कम से कम डेटा इस्तेमाल होता है. इससे मोबाइल फोन के माध्यम से बिना कागजी झंझट के पहचान हो जाएगी. 

आधार ऐप का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

डिजिटल पहचान सत्यापन के अलावा एप का इस्तेमाल निजी डेटा अपडेट करने में भी हो रहा है. आधार एप 7.5 करोड़ यूजर डाउनलोड कर चुके हैं. UIDAI के ऐप से 22 लाख से ज्यादा बार एड्रेस और 40 लाख ईमेल अपडेट हो चुके हैं. 86 लाख से ज्यादा लोग इसका डेली इस्तेमाल कर रहे हैं. सिक्योरिटी फीचर्स में भी आधार ऐप का इस्तेमाल बढ़ा है. करीब साढ़े चार करोड़ से ज्यादा बायोमेट्रिक अपडेशन हो चुके हैं.यूजर्स अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंख की पुतली) आधारित आइडेंटिफिकेशन को अपडेट सकते हैं. 

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