राजधानी दिल्ली हर साल लाखों पर्यटक घूमने के लिए आते हैं. यहां कई मशहूर ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर और धार्मिक स्थल हैं. इन्हीं में से गुरुद्वारा बंगला साहिब सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है. ये 'मस्ट-विजिट' स्पॉट माना जाता है. यह सिख धर्म का एक बड़ा और पवित्र तीर्थ स्थल है. टूरिस्ट से लेकर लोकल लोगों तक यहां हर दिन हजारों लोग माथा टेकने और शांति का अनुभव करने आते हैं. बंगला साहिब आस्था, सेवा और लोगों की मदद करने की भावना के लिए जाना जाता है.
बंगला साहिब गुरुद्वारा का इतिहास और महत्व
गुरुद्वारा बंगला साहिब का इतिहास और धार्मिक महत्व बहुत खास है. यह स्थान सिखों के आठवें गुरु, गुरु हरकृष्ण साहिब जी से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि साल 1664 में जब दिल्ली में हैजा और चेचक जैसी बीमारियां फैली थीं, तब गुरु हरकृष्ण साहिब जी इसी जगह पर ठहरे थे. उन्होंने बीमार और जरूरतमंद लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा की और उनकी मदद की. कहा जाता है कि गुरुद्वारे के पवित्र सरोवर का जल लोगों के लिए आशीर्वाद और स्वास्थ्य का स्रोत बना. बाद में साल 1783 में सिख नेता सरदार बघेल सिंह ने यहां गुरुद्वारे का निर्माण कराया. आज भी यह पवित्र सरोवर गुरुद्वारा परिसर का अहम हिस्सा है. श्रद्धालु यहां आकर सरोवर का जल श्रद्धा के साथ अपने घर ले जाते हैं और इसे गुरु साहिब का आशीर्वाद मानते हैं.

बंगला साहिब गुरुद्वारा में क्या-क्या है खास?
पवित्र सरोवर
गुरुद्वारा परिसर के बीचों-बीच एक बड़ा पवित्र सरोवर है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस सरोवर के जल का आध्यात्मिक महत्व है. इसलिए यहां आने वाले लोग सरोवर के दर्शन करते हैं, आशीर्वाद लेते हैं और कई श्रद्धालु श्रद्धा के साथ इसका जल अपने घर भी ले जाते हैं.
लंगर सेवागुरुद्वारा बंगला साहिब का लंगर भी बेहद खास माना जाता है. यहां हर दिन हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है
ठहरने की सुविधादिल्ली के बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए गुरुद्वारा परिसर में ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध है. यहां यात्री निवास और गुरु नानक निवास जैसे आवास बनाए गए हैं, जहां लोग आराम से रुक सकते हैं.

बंगला साहिब गुरुद्वारा जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
गुरुद्वारे में एंट्री करने से पहले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपना सिर रुमाल, दुपट्टे या स्कार्फ से ढकना जरूरी होता है. साथ ही, परिसर में जाने से पहले जूते उतारना भी जरूरी होता है. गुरुद्वारा परिसर का माहौल बेहद शांत और आध्यात्मिक होता है, इसलिए यहां आने वाले लोगों से मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है. सुरक्षा और धार्मिक महत्व को देखते हुए परिसर के कुछ हिस्सों में फोटोग्राफी की अनुमति भी नहीं होती है. दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को कढ़ा प्रसाद दिया जाता है, जिसे सिख धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है.
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