विज्ञापन

Ravish Kumar On Farmer Protest

'Ravish Kumar On Farmer Protest' - 5 News Result(s)
  • किसान आंदोलन - कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    किसान आंदोलन - कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    जिस देश में आज़ादी की लड़ाई का आंदोलन 1857 से 1947 तक अलग अलग रूप में चला हो, उस देश के सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग धरने के बाद किसानों के धरने को लेकर चल रही बहस में अजीब अजीब किस्म के सवाल उठ रहे हैं कि आंदोलन कब तक चलेगा, क्यों चल रहा है, अनंत काल के लिए सड़कें बंद नहीं हो सकती हैं.

  • किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    एक महीना पहले हाईवे को बीच से काट देने और सीमेंट के बने भीमकाय बोल्डरों से रास्ता रोकने की तस्वीरों से लगा था कि किसान बैरिकेड की दीवार नहीं पार कर पाएंगे. बेशक सरकार ने किसानों को दिल्ली आने से रोक दिया लेकिन किसानों ने भी अपने आंदोलन को बैरिकेड में बदल दिया है. किसान आंदोलन सरकार के बनाए बैरिकेड की दीवारों से अपनी दीवार ऊंची करने लगा. मगर बैरिकेड सिर्फ वही नहीं थे जिसे पुलिस लगा रही थी.

  • प्राइम टाइम : किसानों की दुर्दशा के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    प्राइम टाइम : किसानों की दुर्दशा के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    14 मई को राजस्थान के एक किसान भागीरथ शर्मा ने मुझे व्हाट्सऐप किया कि फसल बीमा के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है. बैंक ने उनसे 2301 रुपये प्रीमियम की राशि काट ली है मगर बीमा कंपनी कहती है कि 216 रुपया ही प्रीमियम का जमा हुआ है.

  • किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    हमने पिछले कई सालों में किसानों के कई आंदोलन देखे. 29-30 इस आंदोलन के केंद्र में दो मुद्दे प्रमुख रूप से रहे. फसलों का सही दाम दिया जाए और फसल बिकने की व्यवस्था सही की जाए. मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपने वादे के हिसाब से लागत से डेढ़ गुना देने का दावा करती है लेकिन तथ्य कुछ दूसरे भी होते हैं.

  • किसानों से ही दिल्ली है, फिर दिल्ली किसानों के लिए क्यों बंद है...?

    किसानों से ही दिल्ली है, फिर दिल्ली किसानों के लिए क्यों बंद है...?

    आज के दिन तमाम सरकारी और रूटीन कार्यक्रमों के बाद राजघाट के रास्ते उन लोगों के लिए खोल देने चाहिए थे, जो अपनी मांगों को लेकर वहां जाना चाहते थे. राजघाट सिर्फ राजनयिकों और राष्ट्रप्रमुखों के माल्यार्पण के लिए नहीं है. किसानों के भाषण के लिए भी है. दिल्ली किसानों से दूर जाएगी, तो किसान दिल्ली आएंगे ही. रास्ता नहीं रोका जाता, तो आराम से आते और किसान चले जाते.

'Ravish Kumar On Farmer Protest' - 5 News Result(s)
  • किसान आंदोलन - कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    किसान आंदोलन - कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    जिस देश में आज़ादी की लड़ाई का आंदोलन 1857 से 1947 तक अलग अलग रूप में चला हो, उस देश के सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग धरने के बाद किसानों के धरने को लेकर चल रही बहस में अजीब अजीब किस्म के सवाल उठ रहे हैं कि आंदोलन कब तक चलेगा, क्यों चल रहा है, अनंत काल के लिए सड़कें बंद नहीं हो सकती हैं.

  • किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    एक महीना पहले हाईवे को बीच से काट देने और सीमेंट के बने भीमकाय बोल्डरों से रास्ता रोकने की तस्वीरों से लगा था कि किसान बैरिकेड की दीवार नहीं पार कर पाएंगे. बेशक सरकार ने किसानों को दिल्ली आने से रोक दिया लेकिन किसानों ने भी अपने आंदोलन को बैरिकेड में बदल दिया है. किसान आंदोलन सरकार के बनाए बैरिकेड की दीवारों से अपनी दीवार ऊंची करने लगा. मगर बैरिकेड सिर्फ वही नहीं थे जिसे पुलिस लगा रही थी.

  • प्राइम टाइम : किसानों की दुर्दशा के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    प्राइम टाइम : किसानों की दुर्दशा के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    14 मई को राजस्थान के एक किसान भागीरथ शर्मा ने मुझे व्हाट्सऐप किया कि फसल बीमा के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है. बैंक ने उनसे 2301 रुपये प्रीमियम की राशि काट ली है मगर बीमा कंपनी कहती है कि 216 रुपया ही प्रीमियम का जमा हुआ है.

  • किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    हमने पिछले कई सालों में किसानों के कई आंदोलन देखे. 29-30 इस आंदोलन के केंद्र में दो मुद्दे प्रमुख रूप से रहे. फसलों का सही दाम दिया जाए और फसल बिकने की व्यवस्था सही की जाए. मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपने वादे के हिसाब से लागत से डेढ़ गुना देने का दावा करती है लेकिन तथ्य कुछ दूसरे भी होते हैं.

  • किसानों से ही दिल्ली है, फिर दिल्ली किसानों के लिए क्यों बंद है...?

    किसानों से ही दिल्ली है, फिर दिल्ली किसानों के लिए क्यों बंद है...?

    आज के दिन तमाम सरकारी और रूटीन कार्यक्रमों के बाद राजघाट के रास्ते उन लोगों के लिए खोल देने चाहिए थे, जो अपनी मांगों को लेकर वहां जाना चाहते थे. राजघाट सिर्फ राजनयिकों और राष्ट्रप्रमुखों के माल्यार्पण के लिए नहीं है. किसानों के भाषण के लिए भी है. दिल्ली किसानों से दूर जाएगी, तो किसान दिल्ली आएंगे ही. रास्ता नहीं रोका जाता, तो आराम से आते और किसान चले जाते.