Prannoy Roy
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यूपी चुनाव : जाति मायने रखती है लेकिन उतनी नहीं जितना सोचा जाता है...
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
यूपी के पहले के चुनावों के परिणामों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जाति मायने रखती है लेकिन उतना नहीं जितना व्यापक स्तर पर सोचा जाता है. जाति और गढ़ वाली सीटों पर हर पार्टी के वोट का डेटा इस बात का संकेत देता है कि इस धारणा पर फिर से विचार की जरूरत है कि केवल जाति मायने रखती है.
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UP: क्या BJP का जीत का अंतर इतना बड़ा है कि वो चुनाव नहीं हार सकती?
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
उत्तर-प्रदेश में 1996 के बाद हर सत्ताधारी पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है. 1996 के बाद पांच चुनाव हुए और सत्ता में पार्टी भी पांच बार बदली.
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उत्तर प्रदेश एक्जिट पोल्स : बीजेपी vs अखिलेश यादव
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर अधिकतर ओपिनियन पोल्स (opinion polls) का अनुमान है कि बीजेपी स्पष्ट और ठोस अंतर से जीत हासिल करने जा रही है हालांकि पार्टी को वर्ष 2017 की धमाकेदार जीत की तुलना में इस बार करीब 100 सीटें कम मिलने का अनुमान लगाया गया है.
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ndtv.in
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यूपी चुनाव : विपक्षी पार्टियां किस तरह बीजेपी के लिए साबित हो रहीं मददगार...
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
ज्यादातर सर्वेक्षणकर्ता और विश्लेषक यह जानने के लिए कि कौन सी पार्टी सबसे अधिक संख्या में सीट जीतेगी, पार्टियों के लोकप्रिय वोट के प्रतिशत को मापते हैं. हालांकि इस आकलन में एक दूसरा महत्वपूर्ण फैक्टर छूट जाता है जो चुनाव के परिणाम को प्रभावित करता है.
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ndtv.in
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Budget 2022: प्रणय रॉय से उद्योग जगत ने बताया केंद्रीय बजट से क्या है उम्मीदें : पांच अहम बातें
- Saturday January 29, 2022
- Edited by: प्रमोद कुमार प्रवीण
एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. कोरोना काल में उनसे बजट में बड़ी राहत मिलने की लोगों को उम्मीद है. इसी सिलसिले में NDTV के प्रणय रॉय के साथ एक साक्षात्कार में उद्योग जगत के नामी लोगों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वे इस साल के केंद्रीय बजट से COVID-19 महामारी और अर्थव्यवस्था और इसके प्रभाव के बीच क्या उम्मीद कर रहे हैं?
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प्रणय रॉय ने महात्मा गांधी के शुरुआती वर्षों पर लिखी किताब पर गोपाल कृष्ण गांधी से की बातचीत
- Saturday March 27, 2021
- Translated by: सिद्धार्थ चौरसिया
इस किताब में बहुत सारी नई जानकारी है, यह एक नया दृष्टिकोण देता है, और इसमें गांधी के चरित्र में बहुत सारी अंतर्दृष्टि शामिल हैं, विशेष रूप से उनकी ईमानदारी. गांधी के स्वयं के शब्दों में, वह यह नहीं कहते कि वह सबसे महान हैं, जो कभी जीवित रहे और उन्होंने कभी गलती नहीं की. वह अपनी गलतियों के बारे में बहुत ईमानदारी से स्वीकार करते हैं और लिखते हैं. यह वास्तव में एक उल्लेखनीय विशेषता है.
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प्रणय रॉय की अमर्त्य सेन से अर्थव्यवस्था और कृषि कानूनों पर बातचीत
- Sunday March 7, 2021
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
NDTV ने अमर्त्य सेन (Amartya Sen) से पूछा कि आप अभी अमेरिका (US) में हैं और हम सभी ने अमेरिका में बहुत बड़ा बदलाव देखा है. ट्रम्प युग जो कि एक तरह का दुःस्वप्न था बाइडेन के आने के साथ खत्म हो गया है. इसलिए लोकतंत्र वास्तव में मायने रखता है और अमेरिका में इसका प्रभाव दिख रहा है. भारत पर इसका किस तरह प्रभाव पड़ेगा? क्या अमेरिका में अधिक प्रभावी लोकतंत्र की वापसी से भारत के प्रति अमेरिका के रवैये में भी बदलाव आएगा? इस पर प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा कि वैसे तो कई संबंध हैं. और उनमें से एक यह है कि अमेरिका में लोकतंत्र पर संदेह, जो पिछले शासन के दौरान बहुत मजबूत था, भारत में सिर्फ गलत तरह का प्रोत्साहन था. तथ्य यह है कि अमेरिका एक बहुत खराब उदाहरण स्थापित कर रहा था. वहां बहुत सारी चीजें चल रही थीं. चमकदार उदाहरण पेश करने के बजाय अमेरिका में, जैसा कि वे कहते हैं, बिल्कुल इसके विपरीत हो रहा था.
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यूपी चुनाव : जाति मायने रखती है लेकिन उतनी नहीं जितना सोचा जाता है...
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
यूपी के पहले के चुनावों के परिणामों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जाति मायने रखती है लेकिन उतना नहीं जितना व्यापक स्तर पर सोचा जाता है. जाति और गढ़ वाली सीटों पर हर पार्टी के वोट का डेटा इस बात का संकेत देता है कि इस धारणा पर फिर से विचार की जरूरत है कि केवल जाति मायने रखती है.
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UP: क्या BJP का जीत का अंतर इतना बड़ा है कि वो चुनाव नहीं हार सकती?
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
उत्तर-प्रदेश में 1996 के बाद हर सत्ताधारी पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है. 1996 के बाद पांच चुनाव हुए और सत्ता में पार्टी भी पांच बार बदली.
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उत्तर प्रदेश एक्जिट पोल्स : बीजेपी vs अखिलेश यादव
- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर अधिकतर ओपिनियन पोल्स (opinion polls) का अनुमान है कि बीजेपी स्पष्ट और ठोस अंतर से जीत हासिल करने जा रही है हालांकि पार्टी को वर्ष 2017 की धमाकेदार जीत की तुलना में इस बार करीब 100 सीटें कम मिलने का अनुमान लगाया गया है.
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- Tuesday March 8, 2022
- प्रणय रॉय
ज्यादातर सर्वेक्षणकर्ता और विश्लेषक यह जानने के लिए कि कौन सी पार्टी सबसे अधिक संख्या में सीट जीतेगी, पार्टियों के लोकप्रिय वोट के प्रतिशत को मापते हैं. हालांकि इस आकलन में एक दूसरा महत्वपूर्ण फैक्टर छूट जाता है जो चुनाव के परिणाम को प्रभावित करता है.
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Budget 2022: प्रणय रॉय से उद्योग जगत ने बताया केंद्रीय बजट से क्या है उम्मीदें : पांच अहम बातें
- Saturday January 29, 2022
- Edited by: प्रमोद कुमार प्रवीण
एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. कोरोना काल में उनसे बजट में बड़ी राहत मिलने की लोगों को उम्मीद है. इसी सिलसिले में NDTV के प्रणय रॉय के साथ एक साक्षात्कार में उद्योग जगत के नामी लोगों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वे इस साल के केंद्रीय बजट से COVID-19 महामारी और अर्थव्यवस्था और इसके प्रभाव के बीच क्या उम्मीद कर रहे हैं?
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प्रणय रॉय ने महात्मा गांधी के शुरुआती वर्षों पर लिखी किताब पर गोपाल कृष्ण गांधी से की बातचीत
- Saturday March 27, 2021
- Translated by: सिद्धार्थ चौरसिया
इस किताब में बहुत सारी नई जानकारी है, यह एक नया दृष्टिकोण देता है, और इसमें गांधी के चरित्र में बहुत सारी अंतर्दृष्टि शामिल हैं, विशेष रूप से उनकी ईमानदारी. गांधी के स्वयं के शब्दों में, वह यह नहीं कहते कि वह सबसे महान हैं, जो कभी जीवित रहे और उन्होंने कभी गलती नहीं की. वह अपनी गलतियों के बारे में बहुत ईमानदारी से स्वीकार करते हैं और लिखते हैं. यह वास्तव में एक उल्लेखनीय विशेषता है.
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प्रणय रॉय की अमर्त्य सेन से अर्थव्यवस्था और कृषि कानूनों पर बातचीत
- Sunday March 7, 2021
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NDTV ने अमर्त्य सेन (Amartya Sen) से पूछा कि आप अभी अमेरिका (US) में हैं और हम सभी ने अमेरिका में बहुत बड़ा बदलाव देखा है. ट्रम्प युग जो कि एक तरह का दुःस्वप्न था बाइडेन के आने के साथ खत्म हो गया है. इसलिए लोकतंत्र वास्तव में मायने रखता है और अमेरिका में इसका प्रभाव दिख रहा है. भारत पर इसका किस तरह प्रभाव पड़ेगा? क्या अमेरिका में अधिक प्रभावी लोकतंत्र की वापसी से भारत के प्रति अमेरिका के रवैये में भी बदलाव आएगा? इस पर प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा कि वैसे तो कई संबंध हैं. और उनमें से एक यह है कि अमेरिका में लोकतंत्र पर संदेह, जो पिछले शासन के दौरान बहुत मजबूत था, भारत में सिर्फ गलत तरह का प्रोत्साहन था. तथ्य यह है कि अमेरिका एक बहुत खराब उदाहरण स्थापित कर रहा था. वहां बहुत सारी चीजें चल रही थीं. चमकदार उदाहरण पेश करने के बजाय अमेरिका में, जैसा कि वे कहते हैं, बिल्कुल इसके विपरीत हो रहा था.
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