Justice Indu Malhotra
- सब
- ख़बरें
- वीडियो
-
सुप्रीम कोर्ट की महिला जज इंदु मल्होत्रा का आज आखिरी वर्किंग डे, CJI ने याद दिलाया पुराना वाकया
- Friday March 12, 2021
जस्टिस मल्होत्रा ने सभी बार सदस्यों का शुक्रिया अदा किया. हालांकि, बेंच पर भावुक हो जाने की वजह से वो अपना भाषण पूरा नहीं कर सकीं. सीजेआई ने कहा कि वह भावना को समझ सकते हैं. दूसरे मौके पर इसे पूरा कीजिएगा.
-
ndtv.in
-
महाराष्ट्र में बीफ बैन का मामला : जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने खुद को सुनवाई से अलग किया
- Monday July 1, 2019
महाराष्ट्र में बीफ बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. वे पहले इस केस में बतौर वकील पेश हुई थीं. अब इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजा गया है ताकि नई बेंच का गठन किया जा सके.
-
ndtv.in
-
यौन उत्पीड़न के आरोपों में CJI रंजन गोगोई को क्लीनचिट मिलने के बाद शिकायतकर्ता महिला ने मांगी जांच रिपोर्ट की कॉपी
- Tuesday May 7, 2019
CJI रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को यौन उत्पीड़न के आरोपों में क्लीनचिट मिल गई है. मामले में शिकायतकर्ता महिला ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जांच पैनल से CJI रंजन गोगोई को दी गई क्लीनचिट को लेकर रिपोर्ट की एक कॉपी की मांग की है.
-
ndtv.in
-
CJI रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप- सुप्रीम कोर्ट के इन हाउस पैनल ने खारिज की शिकायत
- Monday May 6, 2019
CJI Ranjan Gogoi News: चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप (Sex Harassment Case) खारिज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इन हाउस पैनल ने महिलाकर्मी की शिकायत को खारिज कर दिया. जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के पैनल ने यह फैसला सुनाया. पैनल ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिले. सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि इन हाउस पैनल की जांच के तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के 2003 के नियमों के तहत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
-
ndtv.in
-
CJI रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी में अब दो महिला जज
- Friday April 26, 2019
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी से जस्टिस रमना ने खुद को अलग कर लिया. इसके बाद जस्टिस इंदु मल्होत्रा (Justice Indu Malhotra) को पैनल में तीसरी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
-
ndtv.in
-
जानिए, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर बहुमत से अलग क्यों रहा जस्टिस इंदु मल्होत्रा का फैसला
- Friday September 28, 2018
- NDTVKhabar News Desk
केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगे रोक से बैन हटा दिया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर के दरवाजे हर उम्र की महिलाओं के लिए खोल दिये. साथ ही बहुमत के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक असंवैधानिक है. बता दें कि अब तक 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. मगर अब सब मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 4-1 के बहुमत से आया. क्योंकि जस्टिस इंदु मल्होत्रा की इस मामले में अलग राय थी.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल
- Friday September 7, 2018
- Virag Gupta
सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.
-
ndtv.in
-
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता दिलाने पर नजर
- Friday September 7, 2018
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को समलैंगिक अपनी आज़ादी के तौर पर देख रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी लंबी लड़ाई अपने मुकाम तक पहुंची है. अब उनकी नज़र समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता दिलाने पर है.
-
ndtv.in
-
निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं
- Thursday September 6, 2018
- Ravish Kumar
कई बार सर्वोच्च अदालत के कुछ फैसलों को इसलिए नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वो आपके हिसाब से आया है, बल्कि इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि फैसले तक पहुंचने से पहले तर्कों की प्रक्रिया क्या है. उसकी भाषा क्या है, भाषा की भावना क्या है.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता पर सियासत...
- Thursday September 6, 2018
- Akhilesh Sharma
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को समाप्त कर दिया. इस फैसले का जमकर स्वागत हो रहा है. लेकिन इस पर सियासत भी शुरू हो गई है.
-
ndtv.in
-
अब महिला और पुरुष के बीच अप्राकृतिक यौनाचार भी अपराध नहीं...
- Thursday September 6, 2018
गुरुवार सुबह तक भारत में समलैंगिकता को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत अपराध माना जाता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है.
-
ndtv.in
-
Section 377 Verdict: समलैंगिकता अब अपराध नहीं, लेकिन इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नहीं पड़ेगा फर्क...
- Thursday September 6, 2018
- NDTVKhabar News Desk
सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने गुरुवार को समलैंगिकता (Homosexuality) को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा. चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने एकमत से यह फ़ैसला सुनाया. करीब 55 मिनट में सुनाए इस फ़ैसले में धारा 377 (section 377) को रद्द कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि LGBT समुदाय को भी समान अधिकार है.
-
ndtv.in
-
इन 5 जजों ने धारा 377 पर दिया ऐतिहासिक फैसला, कहा- समलैंगिकता अपराध नहीं
- Thursday September 6, 2018
- Navneet Mishra
समलैंगिकता पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं.जानिए इनके बारे में.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता अपराध है या नहीं? केंद्र ने कहा- धारा 377 का मसला हम सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं
- Wednesday July 11, 2018
- NDTVKhabar News Desk
समलैंगिकता अपराध है या नहीं, इसे तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. मंगलवार से जारी सुनवाई में कई तरह की बातें आने के बाद बुधवा को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ से कहा कि समलैंगिकता संबंधी धारा 377 की संवैधानिकता के मसले को हम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं.
-
ndtv.in
-
सुप्रीम कोर्ट की महिला जज इंदु मल्होत्रा का आज आखिरी वर्किंग डे, CJI ने याद दिलाया पुराना वाकया
- Friday March 12, 2021
जस्टिस मल्होत्रा ने सभी बार सदस्यों का शुक्रिया अदा किया. हालांकि, बेंच पर भावुक हो जाने की वजह से वो अपना भाषण पूरा नहीं कर सकीं. सीजेआई ने कहा कि वह भावना को समझ सकते हैं. दूसरे मौके पर इसे पूरा कीजिएगा.
-
ndtv.in
-
महाराष्ट्र में बीफ बैन का मामला : जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने खुद को सुनवाई से अलग किया
- Monday July 1, 2019
महाराष्ट्र में बीफ बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. वे पहले इस केस में बतौर वकील पेश हुई थीं. अब इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजा गया है ताकि नई बेंच का गठन किया जा सके.
-
ndtv.in
-
यौन उत्पीड़न के आरोपों में CJI रंजन गोगोई को क्लीनचिट मिलने के बाद शिकायतकर्ता महिला ने मांगी जांच रिपोर्ट की कॉपी
- Tuesday May 7, 2019
CJI रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को यौन उत्पीड़न के आरोपों में क्लीनचिट मिल गई है. मामले में शिकायतकर्ता महिला ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जांच पैनल से CJI रंजन गोगोई को दी गई क्लीनचिट को लेकर रिपोर्ट की एक कॉपी की मांग की है.
-
ndtv.in
-
CJI रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप- सुप्रीम कोर्ट के इन हाउस पैनल ने खारिज की शिकायत
- Monday May 6, 2019
CJI Ranjan Gogoi News: चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप (Sex Harassment Case) खारिज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इन हाउस पैनल ने महिलाकर्मी की शिकायत को खारिज कर दिया. जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के पैनल ने यह फैसला सुनाया. पैनल ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिले. सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि इन हाउस पैनल की जांच के तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के 2003 के नियमों के तहत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
-
ndtv.in
-
CJI रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी में अब दो महिला जज
- Friday April 26, 2019
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी से जस्टिस रमना ने खुद को अलग कर लिया. इसके बाद जस्टिस इंदु मल्होत्रा (Justice Indu Malhotra) को पैनल में तीसरी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
-
ndtv.in
-
जानिए, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर बहुमत से अलग क्यों रहा जस्टिस इंदु मल्होत्रा का फैसला
- Friday September 28, 2018
- NDTVKhabar News Desk
केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगे रोक से बैन हटा दिया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर के दरवाजे हर उम्र की महिलाओं के लिए खोल दिये. साथ ही बहुमत के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक असंवैधानिक है. बता दें कि अब तक 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. मगर अब सब मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 4-1 के बहुमत से आया. क्योंकि जस्टिस इंदु मल्होत्रा की इस मामले में अलग राय थी.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल
- Friday September 7, 2018
- Virag Gupta
सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.
-
ndtv.in
-
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता दिलाने पर नजर
- Friday September 7, 2018
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को समलैंगिक अपनी आज़ादी के तौर पर देख रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी लंबी लड़ाई अपने मुकाम तक पहुंची है. अब उनकी नज़र समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता दिलाने पर है.
-
ndtv.in
-
निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं
- Thursday September 6, 2018
- Ravish Kumar
कई बार सर्वोच्च अदालत के कुछ फैसलों को इसलिए नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वो आपके हिसाब से आया है, बल्कि इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि फैसले तक पहुंचने से पहले तर्कों की प्रक्रिया क्या है. उसकी भाषा क्या है, भाषा की भावना क्या है.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता पर सियासत...
- Thursday September 6, 2018
- Akhilesh Sharma
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को समाप्त कर दिया. इस फैसले का जमकर स्वागत हो रहा है. लेकिन इस पर सियासत भी शुरू हो गई है.
-
ndtv.in
-
अब महिला और पुरुष के बीच अप्राकृतिक यौनाचार भी अपराध नहीं...
- Thursday September 6, 2018
गुरुवार सुबह तक भारत में समलैंगिकता को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत अपराध माना जाता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है.
-
ndtv.in
-
Section 377 Verdict: समलैंगिकता अब अपराध नहीं, लेकिन इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नहीं पड़ेगा फर्क...
- Thursday September 6, 2018
- NDTVKhabar News Desk
सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने गुरुवार को समलैंगिकता (Homosexuality) को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा. चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने एकमत से यह फ़ैसला सुनाया. करीब 55 मिनट में सुनाए इस फ़ैसले में धारा 377 (section 377) को रद्द कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि LGBT समुदाय को भी समान अधिकार है.
-
ndtv.in
-
इन 5 जजों ने धारा 377 पर दिया ऐतिहासिक फैसला, कहा- समलैंगिकता अपराध नहीं
- Thursday September 6, 2018
- Navneet Mishra
समलैंगिकता पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं.जानिए इनके बारे में.
-
ndtv.in
-
समलैंगिकता अपराध है या नहीं? केंद्र ने कहा- धारा 377 का मसला हम सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं
- Wednesday July 11, 2018
- NDTVKhabar News Desk
समलैंगिकता अपराध है या नहीं, इसे तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. मंगलवार से जारी सुनवाई में कई तरह की बातें आने के बाद बुधवा को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ से कहा कि समलैंगिकता संबंधी धारा 377 की संवैधानिकता के मसले को हम कोर्ट के विवेक पर छोड़ते हैं.
-
ndtv.in