'Prime time'

- 781 न्यूज़ रिजल्ट्स
  • Blogs | रवीश कुमार |गुरुवार जनवरी 27, 2022 11:30 PM IST
    क्या चुनावों के समय जाति और समुदाय के नेता ही नाराज़ होते हैं, उन्हें मनाने के नाम पर मंत्रियों की लाइन लगी रहती है लेकिन नौकरी मांग रहे छात्रों को नाराज़ क्यों नहीं माना जाता है, उन्हें मनाने के लिए कोई मंत्री उनके हास्टल या प्रदर्शन में क्यों नहीं जाता है?
  • Blogs | रवीश कुमार |मंगलवार जनवरी 25, 2022 12:29 AM IST
    हम बात नौकरी की भी करेंगे और नेता जी भी करेंगे. थोड़ी नेताजी की थोड़ी नौकरी की. जब भी चुनाव आता है, और स्वास्थ्य से लेकर रोज़गार पर बात करने का अवसर मिलता है, नेता और मीडिया बहस की दिशा को इतिहास और धर्म की तरफ मोड़ देते हैं. किसी महापुरुष को याद करने के नाम पर खुद को महापुरुष साबित करने की होड़ शुरू हो जाती है. मूर्ति, स्मारक, पार्क इत्यादि के नाम रखने के बहाने याद किया जाने लगता है. ट्वीटर पर मीम और टीवी चैनलों पर डिबेट के ज़रिए इतिहास की पढ़ाई होने लगती है. जहां पढ़ाई होनी चाहिए वहां न तो शिक्षक हैं और न ही लाइब्रेरी में किताबें. वोट के लिए इतिहास चालू टॉपिक हो गया है. नेता पार्ट टाइम से अब फुल टाइम इतिहासकार हो गए हैं और इतिहास से एमए रिज़र्व बैंक के गर्वनर बन रहे हैं. ग़लत इतिहास को सही करने के नाम पर अपने मन के हिसाब से ग़लत किए जा रहे हैं. इतिहास को सही करने के नाम पर आपके साथ जो ग़लत हो रहा है उसे समझना आपके बस की बात नहीं है और समझाना हमारे बस की बात नहीं.
  • Blogs | रवीश कुमार |शनिवार जनवरी 15, 2022 12:49 AM IST
    हज़ार दुखों से गुज़र रही भारत की पत्रकारिता का दुख आज हज़ार गुना गहरा लग रहा है. जिस पेश को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया है. कमाल ख़ान हमारे बीच नहीं हैं. हम देश और दुनिया भर से आ रही श्रद्धांजलियों को भरे मन से स्वीकार कर रहे हैं. आप सबकी संवेदनाएं बता रही हैं कि आपके जीवन में कमाल ख़ान किस तरीके से रचे बचे हुए थे. कमाल साहब की पत्नी रुचि और उनके बेटे अमान इस ग़म से कभी उबर तो नहीं पाएंगे लेकिन जब कभी आपके प्यार और आपकी संवेदनाओं की तरफ उनकी नज़र जाएगी, उन्हें आगे की ज़िंदगी का सफर तय करने का हौसला देगी. उन्हें ग़म से उबरने का सहारा मिलेगा कि कमाल ख़ान ने टीवी की पत्रकारिता को कितनी शिद्दत से सींचा था. एनडीटीवी से तीस साल से जुड़े थे. एक ऐसे काबिल हमसफर साथी को अलविदा कहना थोड़ा थोड़ा ख़ुद को भी अलविदा कहना है. 
  • Blogs | रवीश कुमार |गुरुवार जनवरी 13, 2022 12:08 AM IST
    सरकारों ने अपनी तरह से इस पर कंट्रोल किया ताकि प्रोपेगैंडा फैला सकें तो दूसरी ओर धर्म, रंग, जाति के नाम पर सर्वोच्चता की सनक से लैस नफरती तबके ने इस पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया. अब कई उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि किसी खास समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार में सोशल मीडिया पर चले नफरती अभियान की भी भूमिका थी.
  • Blogs | रवीश कुमार |मंगलवार जनवरी 11, 2022 10:55 PM IST
    अगर आप प्राइम टाइम के नियमित दर्शक हैं तो पिछले सात साल के दौरान आपने हमें कई बार कहते सुना होगा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज़रिए झूठ का जाल बिछा दिया गया है ताकि हर दूसरे लड़के में दंगाई बनने की संभावना पैदा हो जाए. धर्म के नाम पर नफरत का ऐसा माहौल बन जाए कि हर सवाल करने वाला या सरकार का विरोधी उसकी आड़ में निपटा दिया जाए. कुछ सड़क पर उतर कर दंगा करें तो कुछ सोशल मीडिया पर वैसी भाषा लिखने बोलने लग जाएं जो हर नरसंहार या दंगों के पहले बोली जाती है. व्हाट्सएप के फैमिली ग्रुप में रिटायर्ड अंकिलों और NRI अंकिल नफरत की दुनिया के चौकीदार हैं. इस एक सेगमेंट के एक हिस्से ने बच्चों को बर्बाद करने और ज़हर से भरने का जो काम किया है उतना किसी ने नहीं किया है.
  • Blogs | रवीश कुमार |गुरुवार जनवरी 6, 2022 12:03 AM IST
    भारत में महंगाई के सपोर्टर की तरह क्या बेरोज़गारी के भी सपोर्टर हैं? जब भी लाखों की संख्या में नौजवान सरकारी भर्ती की परीक्षा को लेकर बीजेपी से लेकर कांग्रेस की सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं, उन्हें कोसने वाले आ जाते हैं कि सरकार कितनों को नौकरी देगी, अपना बिजनेस क्यों नहीं करते.
  • Blogs | रवीश कुमार |बुधवार दिसम्बर 22, 2021 11:07 PM IST
    अयोध्या में कुछ भी ग़लत नहीं होता है, क्योंकि यहां एक सिस्टम है. जिस पर आरोप लगता है वही जांच करता है और फैसला देता है कि कुछ भी ग़लत नहीं हुआ है. इस सिस्टम के कुछ डिपार्टमेंट की जानकारी बुधवार के इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से मिलती है जिसमें बताया गया है कि जिस ट्रस्ट के खिलाफ ज़मीन के मामले की जांच हो रही है उसी ट्रस्ट की दूसरी ग़ैर विवादित ज़मीन उन अधिकारियों के रिश्तेदारों ने खरीदे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आने से पहले जून की रिपोर्ट को याद करना ज़रूरी है जिसे हमारे सहयोगी आलोक, कमाल और प्रमोद ने की थी और मीडिया में कुछ जगहों पर इसकी रिपोर्टिंग हुई थी.
  • Blogs | रवीश कुमार |बुधवार दिसम्बर 22, 2021 11:03 AM IST
    आधार ऐसे ही आता है. स्वेच्छा के नाम पर आता है तब भी धीरे-धीरे अनिवार्य बन जाता है. व्यवहार में आधार को लेकर अनिवार्य और स्वेच्छा का फर्क मिट गया है. गिनती के लोग होंगे जो आधार नंबर मांगे जाने पर चेक करते होंगे कि अनिवार्य है या स्वेच्छा. ऐसी आदत हो गई है कि अब सारे विकल्पों को छोड़ कर आधार ही सबसे पहले जमा कर दिया जाता है. कोरोना के टीके के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं बनाया गया लेकिन इसका अध्ययन होगा तो पता चल जाएगा कि वैकल्पिक होने के बाद भी कितने लोगों ने टीका लगाने के लिए आधार का प्रयोग किया है.
  • Blogs | रवीश कुमार |सोमवार दिसम्बर 27, 2021 02:05 PM IST
    यूपी की राजनीति में विकास अकेला नहीं चल पा रहा है. इसे धक्का देने के लिए एक नया शब्द लाया गया है विरासत. विरासत अरबी का शब्द है. शायद इसका इस्तेमाल इसलिए हो रहा है ताकि व से विरासत और व से विकास की तुकबंदी हो सके. गौर करने की बात है कि अब विकास रोजगार की बात नहीं करता है. विकास महंगाई से परेशान जनता की बात नहीं करता है. विकास अस्पतालों में डॉक्टरों के ख़ाली पदों की बात नहीं करता है. विकास कस्बों के खस्ताहाल कालेजों और सरकारी स्कूलों की बात नहीं करता है. विकास पेंशन की भी बात नहीं करता है. विकास की बात हो सके इसके लिए भाषणों में विरासत का तड़का दिया जा रहा है ताकि श्रोताओं में ताली बजाने और नारे लगाने का जोश भरा जा सके. क्या विरासत इसलिए ज़ुबान पर है ताकि धर्म का सीधे-सीधे नाम लेने पर चुनावी आचार संहिताओं को ढोना न पड़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरासत और विकास की बात करने लगे हैं. 
  • Blogs | रवीश कुमार |सोमवार दिसम्बर 20, 2021 11:45 PM IST
    यूपी की राजनीति में विकास अकेला नहीं चल पा रहा है. इसे धक्का देने के लिए एक नया शब्द लाया गया है विरासत. विरासत अरबी का शब्द है. शायद इसका इस्तेमाल इसलिए हो रहा है ताकि व से विरासत और व से विकास की तुकबंदी हो सके. गौर करने की बात है कि अब विकास रोजगार की बात नहीं करता है. विकास महंगाई से परेशान जनता की बात नहीं करता है. विकास अस्पतालों में डॉक्टरों के ख़ाली पदों की बात नहीं करता है. विकास कस्बों के खस्ताहाल कालेजों और सरकारी स्कूलों की बात नहीं करता है. विकास पेंशन की भी बात नहीं करता है. विकास की बात हो सके इसके लिए भाषणों में विरासत का तड़का दिया जा रहा है ताकि श्रोताओं में ताली बजाने और नारे लगाने का जोश भरा जा सके. क्या विरासत इसलिए ज़ुबान पर है ताकि धर्म का सीधे-सीधे नाम लेने पर चुनावी आचार संहिताओं को ढोना न पड़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरासत और विकास की बात करने लगे हैं. 
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