Who is Dhakshineswar Suresh: भारतीय टीम को डेविस कप में शानदार सफलता मिली है. बेंगलुरु में खेले गए मुकाबले में दक्षिणेश्वर सुरेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया की नंबर छह टीम नीदरलैंड्स के खिलाफ भारत को 3-2 से जीत दिलाई. इस जीत के साथ भारत ने सितंबर में होने वाले क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में जगह बना ली है, जहां आठ टीमों के डेविस कप फाइनल्स में प्रवेश के लिए मुकाबला होगा. सुरेश भारत के हीरो बनकर उभरे. शनिवार को उन्होंने डच टीम के टॉप रैंक खिलाड़ी जेस्पर डी जोंग के खिलाफ सिंगल्स में जीत दिलाकर भारत को अहम बढ़त दिलाई. इसके बाद रविवार को उन्होंने युकी भांबरी के साथ डबल्स में डेविड पेल और सैंडर एरेंड्स की जोड़ी को 7-6(0), 3-6, 7-6(1) से हराया. यह दोनों खिलाड़ियों की पहली साझेदारी थी, जिसने तीन घंटे तक चले रोमांचक मुकाबले में भारत को टाई में बढ़त दिलाई.
हालांकि रिवर्स सिंगल्स में सुमित नागल को डी जोंग के खिलाफ 5-7, 6-1, 6-4 से हार का सामना करना पड़ा और स्कोर बराबर हो गया.नागल ने दाहिनी जांघ में ग्रेड टू टियर के बावजूद मुकाबला खेला, जिससे टीम को निर्णायक मैच से पहले जरूरी समय मिला.
निर्णायक मुकाबले में वर्ल्ड नंबर 457 सुरेश ने गाइ डेन ओडेन को सीधे सेटों में हराकर भारत की जीत पक्की कर दी। इस प्रदर्शन के साथ वह 2004 में लिएंडर पेस के बाद एक ही डेविस कप टाई में तीन मैच जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए. यह जीत भारत के लिए पिछले 15 वर्षों में डेविस कप में सबसे गहरा सफर भी साबित हुई, जिसने देश के टेनिस भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं.
दक्षिणेश्वर सुरेश के प्रदर्शन और डेविस कप में सफलता पर भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने प्रतिक्रिया दी है.पंत ने भारत की ऐतिहासिक जीत की तारीफ करते हुए एक्स पर लिखा, "डेविस कप क्वालिफायर में भारतीय टेनिस के लिए बड़ी जीत. नीदरलैंड्स को हराकर दूसरे राउंड के लिए क्वालीफाई करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए. शानदार खेल, लड़कों."
कौन है दक्षिणेश्वर सुरेश
तमिलनाडु के मदुरै में जन्मे सुरेश की हाइट की वजह से वह स्टीप एंगल से शॉट मार पाते हैं, जिससे जब वह लय में होते हैं तो उनका पहला सर्व लगभग अनरिटर्नेबल हो जाता है. "टच एंड वॉली" के पारंपरिक भारतीय स्टाइल के उलट, डीके एक मॉडर्न, पावर-ओरिएंटेड गेम खेलते हैं, और अपने भारी फोरहैंड से पॉइंट्स पर हावी रहते हैं. डेविस कप तक सुरेश का सफ़र आम नहीं था. उन्होंने अमेरिका की वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी में अपने खेल को निखारा. "कॉलेज टेनिस" सिस्टम ने उन्हें ऐसा माहौल दिया जिसने डेविस कप टीम इवेंट्स के दौरान उनमें ज़बरदस्त धैर्य पैदा किया.
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