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दिनभर Reels देखने वाले बच्चों के दिमाग में हो रहा है ये बड़ा बदलाव! रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

एक नई इंटरनेशनल रिसर्च के अनुसार, रोजाना घंटों शॉर्ट वीडियो और Reels देखने से बच्चों में तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान भटकने जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. जानिए क्या कहती है यह रिपोर्ट.

दिनभर Reels देखने वाले बच्चों के दिमाग में हो रहा है ये बड़ा बदलाव! रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई
आखिर इतनी लत क्यों लगाती हैं रील्स?
Photo Credit: Unsplash

आजकल बच्चे हो या बड़े, हर कोई बस स्क्रीन पर रील्स स्क्रॉल करने में बिजी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महज कुछ सेकंड के ये मजेदार वीडियो आपके बच्चे के दिमाग को धीरे-धीरे खोखला कर रहे हैं? जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बायरेउथ की एक नई स्टडी ने इस आदत को लेकर बेहद डराने वाले खुलासे किए हैं, जिसे हर माता-पिता को तुरंत जान लेना चाहिए.

इस रिसर्च में करीब 47,000 युवाओं और किशोरों को शामिल किया गया था, जिनकी औसत उम्र लगभग 16.8 वर्ष थी. नतीजों में सामने आया कि लगातार शॉर्ट वीडियो देखने से युवाओं में ध्यान न लगा पाने की बीमारी और मानसिक तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है.

आखिर इतनी लत क्यों लगाती हैं रील्स?

रिसर्चर्स ने शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स के उन तीन मुख्य फीचर्स की पहचान की है जो बच्चों के दिमाग को इसका गुलाम बना देते हैं. पहला है- बहुत तेजी से कंटेंट का बदलना, दूसरा है- एंडलेस स्क्रॉलिंग और तीसरा है- पर्सनलाइज्ड एल्गोरिदम. एल्गोरिदम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह बच्चे की पसंद को समझकर केवल वही वीडियो दिखाता है जिसे देखना वह पसंद करता है. 

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मस्तिष्क और याददाश्त पर सीधा असर

इस जांच में बच्चों के दिमाग पर होने वाले असर को समझने के लिए ईईजी EEG और MRI स्कैन जैसे न्यूरोलॉजिकल टेस्ट का सहारा लिया गया. रिपोर्ट में पाया गया कि जो बच्चे रोजाना चार घंटे या उससे ज्यादा समय रील्स देखने में बिताते हैं, उनकी वर्किंग मेमोरी यानी याददाश्त कमजोर होने लगती है. इसके साथ ही उनमें बिना सोचे-समझे फैसला लेने की आदत भी देखी गई है. ऐसे बच्चों में एकाग्रता पूरी तरह खत्म हो जाती है और वे किसी भी काम पर लंबे समय तक फोकस नहीं कर पाते हैं.

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सभी में एक बात कॉमन पाई गई कि रील्स की अनियंत्रित लत के कारण बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और मानसिक तनाव का लेवल काफी ज्यादा बढ़ चुका है. बिना किसी तय शेड्यूल के देर रात तक रील्स देखना बच्चों की नींद को खराब कर रहा है. नींद पूरी न होने की वजह से उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो रहा है और वे धीरे-धीरे डिजिटल एडिक्शन के शिकार होते जा रहे हैं.
 

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