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WhatsApp की प्राइवेसी पर बड़ा खुलासा? Elon Musk और Telegram CEO ने उठाए सवाल!

WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. कंपनी का कहना है कि WhatsApp में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होता है, जिससे मैसेज सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है.

WhatsApp की प्राइवेसी पर बड़ा खुलासा? Elon Musk और Telegram CEO ने उठाए सवाल!
क्या WhatsApp सुरक्षित नहीं है? जानिए Meta ने क्या दिया जवाब!

WhatsApp की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है. Telegram के CEO Pavel Durov और Tesla के मालिक Elon Musk ने WhatsApp के एन्क्रिप्शन सिस्टम पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि WhatsApp यूजर्स को पूरी तरह से सुरक्षित होने का भरोसा देता है, लेकिन असल में यह उतना सुरक्षित है नहींय.

हालांकि, WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. कंपनी का कहना है कि WhatsApp में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होता है, जिससे मैसेज सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है.

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Pavel Durov और Elon Musk ने क्या कहा?

Telegram के CEO Pavel Durov ने WhatsApp की सिक्योरिटी को 'इतिहास का सबसे बड़ा कंज्यूमर फ्रॉड' तक कह दिया. उनका आरोप है कि WhatsApp यूजर्स को गुमराह कर रहा है और उनके मैसेज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के कर्मचारी या थर्ड पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स यूजर डेटा तक पहुंच सकते हैं.

वहीं, Elon Musk ने भी X (पहले Twitter) पर WhatsApp को लेकर अविश्वास जताया और लिखा कि 'WhatsApp पर भरोसा नहीं किया जा सकता.' उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म के मैसेजिंग फीचर को ज्यादा सुरक्षित बताया.

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Meta ने क्या जवाब दिया?

Meta ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है. कंपनी का कहना है कि WhatsApp 'Signal Protocol' पर बेस्ड एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करता है, जिससे कोई भी तीसरा व्यक्ति आपके मैसेज नहीं पढ़ सकता.

Meta ने यह भी साफ किया कि WhatsApp का मॉडरेशन सिस्टम एन्क्रिप्शन को नहीं तोड़ता. अगर कोई यूजर किसी चैट को रिपोर्ट करता है, तो उसी आधार पर जांच होती है, न कि सीधे मैसेज एक्सेस करके.

क्या WhatsApp मैसेज एक्सेस किए जा सकते हैं?

इस विवाद की असली वजह यह है कि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि WhatsApp के मैसेज थर्ड पार्टी द्वारा मॉडरेशन के लिए देखे जा सकते हैं. यानी अगर कोई मैसेज रिपोर्ट किया जाता है, तो उसे चेक करने के लिए बाहरी कंपनियों की मदद ली जा सकती है. इसी बात को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है कि क्या उनकी निजी चैट सच में पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं. यह सवाल अब डिजिटल प्राइवेसी की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है.

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