टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने देश के टेलीकॉम ऑपरेटरों जैसे Jio, Airtel, Vi और BSNL को झटका दिया है. इससे यूजर्स को जबरदस्त फायदा मिलेगा. TRAI ने दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (13वां संशोधन) विनियम, 2026 को अंतिम रूप दे दिया है. इसे 21 सितंबर को जारी किया गया है. इसके तहत अब मोबाइल कंपनियों को बिना किसी बंडल डेटा के, केवल वॉयस कॉलिंग और SMS चाहने वाले ग्राहकों के लिए कम वैलिडिटी और कम कीमत वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर (STVs) पेश करने होंगे.
ये नया नियम खासतैर से उन करोड़ों साधारण और कम आय वाले मोबाइल यूजर्स को ध्यान में रखकर लाया गया है जो केवल फोन पर बात करने और मैसेज भेजने के लिए रिचार्ज कराते हैं. उन्हें अनचाहे डेटा के लिए अतिरिक्त पेमेंट करना पड़ता है.
28 दिन के जाल से मुक्ति
21 सितंबर को जारी इस नए नियम के तहत, टेलीकॉम कंपनियों को वॉयस, एसएमएस और डेटा सेवाओं के लिए 30 दिन या उससे कम की वैलिडिटी वाले कई छोटे स्पेशल टैरिफ वाउचर (STVs) बाजार में उतारने होंगे.
TRAI ने पाया कि साल 2024 में '12वें संशोधन' के लागू होने के बाद कंपनियों ने कॉलिंग-ओनली पैक्स तो पेश किए थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इन पैक्स को केवल बहुत लंबी वैलिडिटी के लिए ही लिमिट कर दिया था. इस रणनीतिक कमी के कारण गरीब और कम आय वाले ग्राहक इन्हें खरीद नहीं पाते थे. इस कमी को दूर करने के लिए TRAI ने यह नया और कड़ा संशोधन पेश किया है.
क्या हैं नए नियम?
30 दिन या उससे कम के प्लान्स जरूरी: अब कंपनियों को वॉयस, एसएमएस और डेटा सर्विस के लिए 30 दिन या उससे कम की वैलिडिटी वाले कई शॉर्ट-टर्म विकल्प बाजार में लाने होंगे.
समान तारीख को रिन्यू होने वाला प्लान: सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को कम से कम एक ऐसा स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) पेश करना होगा जो हर महीने की एक ही निश्चित तारीख को रिन्यू हो सके. यदि किसी महीने में वह तारीख नहीं आती (जैसे 31 तारीख), तो रिन्यूअल की तारीख उस महीने का अंतिम दिन (30 या 28/29 तारीख) मान ली जाएगी.
प्रॉपर प्राइसिंग: इसके अलावा, कंपनियों को एक ऐसा STV भी देना होगा जिसकी वैलिडिटी मंथली रेन्यूअबल ऑप्शन से अधिक होगी, जबकि अन्य सभी एसटीवी 30 दिन या उससे कम के होंगे.
जनता की राय के बाद लिया फैसला
यह ऐतिहासिक फैसला अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि ट्राई ने इसके लिए इस साल की शुरुआत से ही एक लंबी परामर्श प्रक्रिया शुरू की थी. 2024 में वॉयस-ओनली पैक्स की कमी और उनके महंगे दामों को करीब से देखने के बाद, ट्राई ने 7 अप्रैल 2026 को इस तेरहवें संशोधन का पहला ड्राफ्ट जारी किया था.
इस ड्राफ्ट पर ट्राई को उद्योग जगत के स्टेकहॉल्डर्स और आम जनता से लिखित सुझाव और प्रतिक्रियाएं मिली थीं. इसके बाद, 15 जून 2026 को ट्राई ने एक ओपन हाउस डिस्कशन भी आयोजित किया. सभी के फीडबैक और विश्लेषण के बाद ही इस अंतिम गाइडलाइन को तैयार किया गया है.
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