टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक चौंकाने वाली खोज सामने आई है, जहां कपड़े अब सिर्फ पहनने की चीज़ नहीं रहेंगे बल्कि खुद सोचने और फैसले लेने की क्षमता भी रखेंगे. चीन के शंघाई शहर में मौजूद फुदान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बेहद पतले और लचीले फाइबर के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाने में सफलता हासिल की है. इस नई तकनीक को ‘फाइबर चिप' नाम दिया गया है, जो कपड़ों को कंप्यूटर की तरह जानकारी प्रोसेस करने में सक्षम बनाता है, वो भी बिना कपड़े की नरमी और लचीलापन खत्म किए.

कैसे काम करता है फाइबर चिप?
आमतौर पर कंप्यूटर चिप्स हार्ड होते हैं, जिन्हें सिलिकॉन जैसी सख्त सामग्री पर बनाया जाता है. फाइबर गोल होते हैं और उनकी सतह बहुत कम होती है, इसलिए अब तक उनमें पर्याप्त इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स फिट करना मुश्किल माना जाता था. इसी समस्या को हल करने के लिए फुदान यूनिवर्सिटी की टीम ने फाइबर की सिर्फ बाहरी सतह पर काम करने की बजाय उसके अंदर की जगह का इस्तेमाल करने का तरीका निकाला. उन्होंने मल्टी-लेयर स्पाइरल डिजाइन तैयार किया, जिसमें फाइबर के अंदर कई परतों में सर्किट बनाए गए, जिससे उपलब्ध पूरी जगह का सही उपयोग हो सका.
एक मिलीमीटर फाइबर में 10,000 ट्रांजिस्टर
रिसर्च के मुताबिक, सिर्फ एक मिलीमीटर लंबे फाइबर चिप में 10,000 तक ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं. ट्रांजिस्टर इलेक्ट्रॉनिक्स में छोटे स्विच की तरह काम करते हैं, जो डेटा प्रोसेसिंग के लिए जरूरी होते हैं. इतनी क्षमता वाला फाइबर चिप उतनी ही प्रोसेसिंग पावर देता है, जितनी हार्ट पेसमेकर में इस्तेमाल होने वाली चिप देती है. अगर इसी फाइबर को एक मीटर लंबा कर दिया जाए, तो इसमें लाखों ट्रांजिस्टर फिट किए जा सकते हैं, जिससे इसकी ताकत एक सामान्य डेस्कटॉप कंप्यूटर प्रोसेसर के बराबर हो सकती है.

हेल्थकेयर और ब्रेन टेक्नोलॉजी में क्रांति
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा हेल्थकेयर सेक्टर में देखने को मिल सकता है. ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस यानी BCI सिस्टम में अभी सख्त इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल होता है, जिन्हें बाहरी कंप्यूटर से जोड़ना पड़ता है. फाइबर चिप की मदद से ऐसा क्लोज्ड-लूप सिस्टम बनाया जा सकता है, जिसमें सेंसिंग, डेटा प्रोसेसिंग और मेडिकल स्टिमुलेशन तीनों काम एक ही मुलायम फाइबर के अंदर हो सकेंगे.
रिसर्च से जुड़े प्रोफेसर पेंग हुईशेंग के अनुसार, ये फाइबर सिर्फ 50 माइक्रोमीटर जितने पतले होते हैं और दिमाग के टिश्यू जितने लचीले होते हैं, जिससे न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में यह ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी साबित हो सकते हैं.
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