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Side Effects of Fabric Softeners: प्रेगेंट न हो पाने के पीछे हो सकते हैं फैब्रिक सॉफ्टनर, बढ़ाते हैं अस्‍थमा का खतरा भी, जानें नुकसान

Side effects of fabric softeners: आइए जानते हैं कि आपको फैब्रिक सॉफ्टनर क्यों छोड़ देना चाहिए और इसकी जगह आप कौन सा सुरक्षित विकल्प अपना सकते हैं.

Side Effects of Fabric Softeners: प्रेगेंट न हो पाने के पीछे हो सकते हैं फैब्रिक सॉफ्टनर, बढ़ाते हैं अस्‍थमा का खतरा भी, जानें नुकसान
Side effects of fabric softeners: फैब्रिक सॉफ्टनर के नुकसान.

हम सभी चाहते हैं कि हमारे कपड़े धुलने के बाद एकदम नरम रहें और उनमें से अच्छी खुशबू आए. इसके लिए हम अक्सर Fabric Softeners का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कपड़ों को 'सॉफ्ट' बनाने वाले इन प्रोडक्ट्स में ऐसे खतरनाक केमिकल्स होते हैं, जो आपकी सेहत, आपके कपड़ों की उम्र और हमारी धरती (Environment) को नुकसान पहुंचा सकते हैं? ये शरीर के नेचुरल हार्मोन्स के साथ छेड़छाड़ करते हैं, प्रजनन क्षमता को प्रभाव‍ित कर सकते हैं और बच्चों और बीमार लोगों के लिए सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं कि आपको फैब्रिक सॉफ्टनर क्यों छोड़ देना चाहिए और इसकी जगह आप कौन सा सुरक्षित विकल्प अपना सकते हैं.

फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल बंद करने की बड़ी वजहें

ऊपर से देखने में ये प्रोडक्ट्स भले ही सुरक्षित लगें, लेकिन इनके पीछे छिपे खतरे कुछ और ही कहानी बयां करते हैं:

  1. खतरनाक केमिकल्स की भरमार इनमें Phthalates (थलेट्स), आर्टिफीसियल खुशबू और प्रिजर्वेटिव्स जैसे ढेरों केमिकल्स होते हैं. खासकर 'थलेट्स' हमारे शरीर के Hormonal System (हार्मोनल सिस्टम) को बिगाड़ सकते हैं. वहीं, इनमें मौजूद तेज खुशबू बच्चों या अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की सांस की तकलीफ और स्किन इन्फेक्शन बढ़ा सकती है.
  2. कपड़ों की उम्र कम होना फैब्रिक सॉफ्टनर आपके कपड़ों के धागों पर केमिकल की एक पतली परत चढ़ा देते हैं. इससे कपड़े नरम तो लगते हैं, लेकिन उनके 'सांस लेने' की क्षमता खत्म हो जाती है. यही वजह है कि धीरे-धीरे आपके तौलिए पानी सोखना बंद कर देते हैं और कपड़ों पर एक चिपचिपी परत जमने लगती है.
  3. पर्यावरण पर बुरा असर ये केमिकल्स सिर्फ आपके कपड़ों तक सीमित नहीं रहते. धुलाई के बाद ये पानी के साथ बहकर हमारी नदियों और मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे समुद्री जीवों को नुकसान पहुँचता है और प्रदूषण बढ़ता है.

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Phthalates (थलेट्स) क्या हैं और ये क्यों खतरनाक हैं?

क्या होते हैं थलेट्स?

ये वो केमिकल्स हैं जिनका इस्तेमाल प्लास्टिक को लचीला बनाने के लिए किया जाता है. फैब्रिक सॉफ्टनर में इन्हें इसलिए डाला जाता है ताकि खुशबू लंबे समय तक टिकी रहे.

थलेट्स से सेहत को नुकसान:

थलेट्स को 'एंडोक्राइन डिस्रप्टर' माना जाता है, यानी ये शरीर के नेचुरल हार्मोन्स के साथ छेड़छाड़ करते हैं. जब ये स्किन के जरिए शरीर में जाते हैं या खुशबू के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं, तो ये कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं:

  • प्रजनन क्षमता (Reproductive Health): इससे फर्टिलिटी में कमी और होने वाले बच्चों के विकास में दिक्कत आ सकती है.
  • हार्मोन का असंतुलन: इसके लगातार संपर्क से मूड स्विंग्स, थकान और पीरियड्स में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
  • एलर्जी और अस्थमा: ये बच्चों और बीमार लोगों के लिए सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं.
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सबसे सुरक्षित विकल्प: सफेद सिरका (White Vinegar)

आपको कपड़ों को सॉफ्ट बनाने के लिए महंगे केमिकल की जरूरत नहीं है. आपके किचन में मौजूद सफेद सिरका इसका सबसे बेहतरीन नेचुरल इलाज है.

यह कैसे काम करता है?

सफेद सिरका कपड़ों से डिटर्जेंट की गंदगी को पूरी तरह साफ कर देता है, जिससे कपड़े अपने आप सॉफ्ट हो जाते हैं. यह कपड़ों से स्टेटिक (चिपचिपाहट) कम करता है और उनकी सोखने की क्षमता बनाए रखता है. यह स्किन के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है.

इस्तेमाल करने का तरीका:

  • सिर्फ एक चौथाई (1/4) कप सफेद सिरका लें.
  • इसे वॉशिंग मशीन के उस खाने (Compartment) में डालें जहां आप फैब्रिक सॉफ्टनर डालते हैं.
  • बस अपनी मशीन चला दें. सिरका अपना काम करेगा और कपड़ों से डिटर्जेंट के अवशेष निकाल देगा.
  • तौलिये को फूला हुआ और नरम रखने के लिए सिरके का इस्तेमाल सबसे बेस्ट है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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