आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि AI में लगाया जा रहा पैसा इससे होने वाली कमाई से बहुत ज्यादा है. ये बात हाल ही में जाने-माने निवेशक Nikhil Kamath ने NDTV World Summit 2026 में कही थी. अब Elon Musk ने भी ऐसी ही चेतावनी दी है. टेक अरबपति ने साफ तौर पर कहा है कि सैकड़ों AI क्लाउड स्टार्टअप्स जल्द ही पूरी तरह बंद हो सकते हैं. चलिए आपको पूरी बात बताते हैं.
NDTV World Summit 2026 में बोलते हुए Nikhil Kamath ने कहा कि हर साल AI में लगभग $1 ट्रिलियन का निवेश हो रहा है, जबकि इसके मुकाबले AI से होने वाली कमाई केवल $100 बिलियन से $200 बिलियन के बीच ही है. उन्होंने आगे कहा, "AI में जितना पैसा लगाया जा रहा है और इससे जितनी कमाई हो रही है, उसके बीच एक बहुत बड़ा अंतर है." उनके अनुमान के मुताबिक, ये अंतर हर साल करीब $700 बिलियन से $800 बिलियन के आसपास हो सकता है.
लगातार नया फंड लाना मुश्किल
उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट और दुनिया भर के बड़े निवेशकों का बहुत सारा पैसा पहले ही अमेरिका में AI कंपनियों में लग चुका है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये इंडस्ट्री हर साल इतना बड़ा नया फंड लगातार ला पाएगी? उन्होंने कहा, "हर साल इतना बड़ा नया फंड जुटाना, और ये बहुत बड़ी रकम है. ये लगभग एक ट्रिलियन डॉलर के नए पैसे जैसा है, जो कि बहुत मुश्किल है."
उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था लगभग $100 ट्रिलियन से $120 ट्रिलियन की है, जिसमें से आधा या 60% हिस्सा सर्विस सेक्टर का है. अगर AI इस क्षेत्र के केवल 10% हिस्से में भी सुधार लाता है, तो यह काम करने की क्षमता (प्रोडक्शन) में $6 ट्रिलियन से $7 ट्रिलियन की बंपर बढ़ोतरी कर सकता है. हालांकि, Kamath ने कहा कि उन्होंने अभी तक असल जिंदगी में ऐसे बड़े सुधार नहीं देखे हैं. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि मैंने अभी तक धरातल पर ऐसा होते देखा भी है या नहीं." उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में पैसा जुटाना इस साल या पिछले साल की तुलना में काफी मुश्किल हो सकता है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि जो लोग अभी बहुत सारा फंड जुटाने में कामयाब हो रहे हैं और उसे अपने पास बचाकर रख सकते हैं, वे सबसे सुरक्षित और बेहतर स्थिति में रहेंगे.
Elon Musk ने भी जताई चिंता
अब Elon Musk ने भी लगभग मिलती-जुलती बात कही है. उनका मानना है कि कई छोटी कंपनियों के लिए जल्द ही एक कठिन दौर आने वाला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हाल ही में हुई एक बातचीत में, इस मस्क ने भविष्यवाणी की कि टेक इंडस्ट्री में जल्द ही "अधूरे पड़े डेटा सेंटर्स में बिना इस्तेमाल वाले चिप्स" का एक बड़ा ढेर देखने को मिलेगा. उन्होंने समझाया कि कर्ज देने वाले बैंकों और बाजारों ने ऐसी कंपनियों को नया पैसा उधार देना लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है जो अपनी कमाई के लिए केवल AI डेटा सेंटर्स पर निर्भर हैं.
Elon just said that most neoclouds will eventually die. And we might already be seeing it play out. Even if AI is the biggest tech revolution of our lifetime, that doesn't mean every company building AI infrastructure will survive. Some will thrive. Many will struggle. Most will be liquidated. And we've seen this before during the internet boom. The internet changed the world, but plenty of companies that built the infrastructure went bankrupt along the way. This time won't be different.
— Lin (@Speculator_io) October 25, 2026
मस्क के अनुसार, छोटे क्लाउड प्रोवाइडर्स (जिन्हें अक्सर "neoclouds" कहा जाता है) जो दूसरी कंपनियों को AI चिप्स किराए पर देते हैं, वे बड़ी मुसीबत में हैं. उन्होंने लिखा, "इसका मतलब ये है कि 200 से अधिक नियोक्लाउड जल्द ही जबरन बंद होने की कगार पर होंगे. उन्होंने ये भी कहा कि कुछ कंपनियां इस आर्थिक संकट से बच सकती हैं. असली समस्या यह है कि AI डेटा सेंटर्स बनाने के लिए अरबों डॉलर की जरूरत होती है, खासतौर से एडवांस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) खरीदने और उन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली का इंतजाम करने के लिए. अब कर्ज देने वाले बैंक पैसा देने से पहले ये मांग कर रहे हैं कि कंपनियों के पास कमाई के दूसरे मजबूत और अलग जरिए होने चाहिए.
मस्क की ये टिप्पणी वेंचर कैपिटलिस्ट Chamath Palihapitiya की बात के जवाब में आई थी. जिन्होंने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आने वाले इस संकट को लेकर आगाह किया था. Palihapitiya ने भविष्यवाणी की थी कि 2027 एक बेहद "अशांत साल" होगा जो गलत दांव लगाने वाले और कमजोर कंपनियों को पूरी तरह साफ कर देगा. उन्होंने बताया कि बिजली ग्रिडों पर अत्यधिक लोड, जनता के भारी विरोध और सरकारी नियमों के कारण डेटा सेंटर्स के निर्माण में बहुत ज्यादा देरी हो रही है. इसके साथ ही बिजली ग्रिड से जुड़ने में आने वाली अड़चनों और यदि कंपनियां अपने किए गए प्रॉमिस यूटिलाइजेशन रेट्स को पूरा करने में फेल होती हैं, तो उन पर भारी मुआवजे के दावों का कानूनी संकट भी बढ़ सकता है. इसके कारण, कंपनियों की ओर से खरीदे गए करोड़ों रुपये के बेहद महंगे AI चिप्स केवल अधूरे पड़े डेटा सेंटर्स में रखे धूल फांकते रहेंगे, क्योंकि कंपनियों को बिजली मिलने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा.
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