सोशल मीडिया दिग्गज Meta ने बच्चों की मेंटल सेफ्टी और प्राइवेसी से जुड़े तीन साल पुराने एक बड़े कानूनी विवाद को सुलझाने के लिए 17.1 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये तक के भुगतान करने पर अपनी सहमति दे दी है. ये समझौता अमेरिका के 47 राज्यों, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और अन्य क्षेत्रों के साथ हुआ है. दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार Meta और उसके CEO मार्क जकरबर्ग के लिए भले ही ये भारी रकम बहुत ज्यादा नुकसानदेह न लगे, लेकिन इस समझौते की शर्तें कंपनी के भविष्य और उसके काम करने के पूरे तौर-तरीके पर बड़ा असर डालने वाली हैं.
समझौते की सबसे अहम शर्त ये है कि मेटा को Instagram-Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों और टीनएजर्स की पहुंच को कंट्रोल करना होगा. इसके तहत बच्चों के लिए रोज की स्क्रीन टाइम लिमिट तय की जाएगी और स्कूल के घंटों के दौरान उनकी ऐप तक पहुंच को ब्लॉक किया जाएगा. इसके अलावा माता-पिता को पहले से ज्यादा सख्त मॉनिटिरिंग टूल्स दिए जाएंगे. ये बदलाव मेटा के लिए बेहद सेंसेटिव है. पिछले दो दशकों से कंपनी का पूरा कारोबारी ढांचा युवा पीढ़ी को अपने ऐप्स से बांधे रखने पर टिका रहा है. अगर नई पीढ़ी ही इन प्लेटफॉर्म्स से दूर होती है, तो दुनिया की नंबर-वन सोशल मीडिया कंपनी बने रहने का मेटा का दावा खतरे में पड़ सकता है.
Mark Zuckerberg खेल रहे बड़ा दांव
यही वजह है कि मार्क जकरबर्ग ने इस संकट से निपटने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. जकरबर्ग चाहते हैं कि जो कड़े नियम और पाबंदियां मेटा पर लागू हो रही हैं, वही नियम यूट्यूब (YouTube) और टिकटॉक (TikTok) जैसे कंपीटीटर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू हों. वे नहीं चाहते हैं कि बच्चे Instagram छोड़कर सीधे दूसरे ऐप्स पर चले जाएं.
मेटा ने राज्यों के अटॉर्नी जनरल के साथ हुए समझौते में एक खास आर्थिक रणनीति तैयार की है. समझौते के मुताबिक, मेटा का बुनियादी जुर्माना 12 बिलियन डॉलर का है और उसने बच्चों के लिए प्रतिदिन दो घंटे की टाइम लिमिट तय करने पर सहमति जताई है. हालांकि, मेटा ने प्रस्ताव रखा है कि यूट्यूब और टिकटॉक भी बच्चों के लिए एक घंटे की डेली लिमिट सीमा को स्वीकार करें और राज्यों को 5 बिलियन डॉलर का भुगतान. अगर वे ऐसा करते हैं तो मेटा भी अपनी टाइम लिमिट कम करके एक घंटा कर देगा और अपनी तरफ से बाकी 5 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त पेमेंट भी कर देगा.
कंपनी ने TikTok और YouTube को लिखा पत्र
न्यू यार्क टाइम्स के अनुसार, मेटा ने बाकायदा TikTok और YouTube के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए उन्हें इस अभियान में शामिल होने और टीनेजर्स की सुरक्षा के लिए समान नियम लागू करने की अपील की है. इसके साथ ही कंपनी प्रमुख अमेरिकी अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देने की भी तैयारी कर रही है. हालांकि, यूट्यूब और टिकटॉक की ओर से इस पर कोई पॉजिटिव रिस्पांस नहीं आया है. यूट्यूब ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, वहीं टिकटॉक ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है. उधर अमेरिकी सांसदों का कहना है कि सिर्फ मेटा ही नहीं, बल्कि पूरी सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए ऐसे सेफ्टी स्टैंडर्ड अनिवार्य होने चाहिए.
आपको बता दें कि इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2023 के मुकदमों से शुरू होती हैं. जब अमेरिकी राज्यों ने मेटा पर गंभीर आरोप लगाए थे कि उसने जानबूझकर ऐसे एल्गोरिद्म और फीचर्स डेवलप किए, जिससे नाबालिगों को अपने प्लेटफॉर्म्स की लत लग जाए. अब जकरबर्ग इस समझौते को बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नए इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के रूप में पेश कर रहे हैं. हालांकि, आलोचकों का मानना है कि मेटा अपनी गिरती साख को बचाने और कंपीटीटर्स को घेरने के लिए खुद को एक जिम्मेदार कंपनी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है.
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