अभी रिश्वत की शिकायतों को सामने लाने के लिए बनाई गई वेबसाइट Bribes.fyi काफी चर्चा में है. लेकिन, फिलहाल ये साइट ऑफलाइन हो गई है. आपको बता दें कि इस प्लेटफॉर्म को B.Tech छात्र आर्यन निषाद ने शुरू किया था. वेबसाइट पर लोग सरकारी अधिकारियों से जुड़े रिश्वत के मामलों की गुमनाम तरीके से शिकायत दर्ज कर सकते थे. बंद होने से पहले प्लेटफॉर्म को दो दिनों में 50 लाख से ज्यादा रिक्वेस्ट मिलीं और 2 लाख से अधिक नए यूजर्स जुड़े.
कानूनी तैयारी के लिए रोकी गई नई शिकायतें
Bribes.fyi के ऑफलाइन होने के बाद आर्यन निषाद और उनके सहयोगी मनीष सहनी ने LinkedIn पर बताया कि वे वेबसाइट के लिए मजबूत लीगल और फाइनेंसशियल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं. फिलहाल नई शिकायतें दर्ज करने और सपोर्ट की सुविधा रोक दी गई है. निषाद ने भारत में टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े अनुभव रखने वाले वकीलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट से मदद की अपील भी की है. वेबसाइट की ओर से कहा गया है कि ये फैसला किसी शिकायत के जवाब में नहीं लिया गया है, बल्कि एक वलंटरी प्रीक्वशनरी स्टेप है.

इसका मतलब यह है कि वेबसाइट को बंद करने की वजह के तौर पर किसी सरकारी शिकायत या कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है. फिलहाल टीम कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है.
इन्वेस्टर ने भी किया जिक्र
एंजल इन्वेस्टर Dr. Aniruddha Malpani ने भी Bribes.fyi को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने Aryan Nishad को 30,000 रुपये का ग्रांट दिया था. Malpani ने कहा कि उन्हें वेबसाइट के ऑफलाइन होने की सही वजह की जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि निषाद ने अच्छे इरादे से वेबसाइट शुरू की थी, लेकिन ऐसे प्लेटफॉर्म को Prevention of Corruption Act समेत लागू कानूनों का पालन करना जरूरी है.
Malpani ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले युवा लोगों की क्षमता पर भी भरोसा जताया. उनका मानना है कि Bribes.fyi जैसे प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी के जरिए बड़े स्तर पर बदलाव लाने में भूमिका निभा सकते हैं.
ऐसे काम करती थी Bribes.fyi वेबसाइट
Bribes.fyi पर किसी रिश्वत की शिकायत दर्ज करने के लिए यूजर्स को घटना से जुड़ी कुछ बेसिक जानकारी देनी होती थी. इसमें संबंधित सरकारी विभाग, शहर और मांगी गई रकम जैसी जानकारी शामिल थी. यूजर्स ये भी बता सकते थे कि उन्होंने रिश्वत दी थी या उसे देने से मना कर दिया था. शिकायत दर्ज होने के बाद उसे अज्ञात रिपोर्ट के तौर पर प्लेटफॉर्म पर दिखाया जाता था.
वेबसाइट पर सबसे ज्यादा रिपोर्ट्स कर्नाटक से दर्ज की गई थीं. यहां 135 शिकायतें दर्ज हुईं. इसके बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का नंबर था. प्लेटफॉर्म पर सरकारी विभाग के हिसाब से भी शिकायतों का डेटा उपलब्ध था. पुलिस विभाग से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा थीं. पुलिस से संबंधित 336 रिपोर्ट्स दर्ज की गई थीं.
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