Business Idea: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे से कस्बे के रहनेवाले आदित्य शर्मा ने ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली में कई महीनों तक एक नौकरी तलाश की. एक बीमा कंपनी में जॉब भी मिली, लेकिन सैलरी 22,000 रुपये भी नहीं थे. मायूस होकर जब वो गांव लौटे, तो सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब आगे क्या करें. उन्होंने गौर किया कि इलाके लोग सरकारी कामकाज, आधार सुधार, पैन कार्ड, जाति-आय-आवास प्रमाण पत्र बनवाने, सरकारी योजनाओं का फॉर्म भरने बलिया जिला मुख्यालय दौड़ने को मजबूर थे.
आदित्य ने बताया कि यहीं से उन्हें 'जन-सेवा केंद्र' खोलने का बिजनेस आइडिया आया. लैपटॉप था ही, 5 हजार रुपये में एक प्रिंटर मशीन खरीदी, वाई-फाई लगवाया और अपने घर के बाहर ही एक छोटी सी दुकान में 'डिजिटल जन सेवा केंद्र' खोल लिया. आज स्थिति यह है कि आदित्य न केवल अपने पैरों पर खड़े हैं, बल्कि महीने के 40 से 45 हजार रुपये आसानी से कमा रहे हैं. कई बार तो महीने के 60 हजार रुपये भी हो जाते हैं. कल तक पड़ोस के जिस क्लासमेट रवि गुप्ता (बैंक क्लर्क) के नाम पर उसे ताने दिए जाते थे, वो उसकी सैलरी से ज्यादा कमा रहे हैं. वो भी घर बैठे.
अगर आप भी यूपी, बिहार के किसी गांव-शहर या फिर दूसरे राज्यों के किसी भी छोटे शहर या ग्रामीण इलाके में रहते हैं और कम पैसों में खुद का काम शुरू करना चाहते हैं, तो आदित्य की तरह जन सेवा केंद्र (CSC) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.

पहला सवाल- CSC वाला बिजनेस आइडिया ही क्यों?
छोटे शहरों और गांवों में नौकरी के मौके सीमित होने के बीच डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत युवाओं के लिए कमाई का नया रास्ता खोल रही है.
गांव और छोटे शहरों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के बावजूद हर व्यक्ति ऑनलाइन सरकारी या दूसरी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आसानी से नहीं कर पाता.
सरकारी योजनाओं के आवेदन, स्कॉलरशिप फॉर्म, नौकरी के आवेदन, बिल भुगतान और दस्तावेजों से जुड़े काम के लिए लोगों को अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत पड़ती है, जो ये प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सके.
यही काम जन सेवा केंद्र के जरिए किया जा सकता है.
दूसरा सवाल- पूंजी कितनी लगेगी, शुरू में कितने पैसे चाहिए?
जन सेवा केंद्र शुरू करने के लिए एक छोटी दुकान या कमरे की जरूरत होगी. इसे बाजार, बैंक, स्कूल या किसी ऐसी जगह के पास शुरू किया जा सकता है जहां लोगों की आवाजाही ज्यादा हो.
शुरुआती सेटअप में आम तौर पर ये चीजें शामिल होंगी:
- लैपटॉप या डेस्कटॉप कंप्यूट
- मल्टीफंक्शन प्रिंटर
- स्कैनर (ये काम स्मार्टफोन से भी हो जाता है)
- बायोमैट्रिक डिवाइस
- इंटरनेट कनेक्शन (वाई-फाई लगवाना अब बेहद सस्ता है)
विकास शर्मा ने जो अनुमान बताया, उसके अनुसार शुरुआती सेटअप पर करीब 35,000 से 50,000 रुपये खर्च हो सकते हैं. हालांकि, वास्तविक लागत जगह, उपकरणों और उपलब्ध सेवाओं के हिसाब से अलग हो सकती है.

तीसरा सवाल- कितनी कमाई होगी
इस बिजनेस की खासियत ये है कि कमाई किसी एक सेवा पर निर्भर नहीं रहती. अलग-अलग डिजिटल सेवाओं से छोटी-छोटी फीस या कमीशन मिल सकता है. अनुमानित रूप से 30 से 60 हजार रुपये तक की कमाई हो सकती है.
- ऑनलाइन फॉर्म: बोर्ड परीक्षा, यूनिवर्सिटी एडमिशन, स्कॉलरशिप और नौकरी के आवेदन जैसे फॉर्म भरने के लिए सर्विस चार्ज लिया जा सकता है.
- डॉक्युमेंट्स सेवाएं: आधार में सुधार, पैन कार्ड, वोटर आईडी और आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र से जुड़े आवेदन में ग्राहक की मदद की जा सकती है.
- बैंकिंग सेवाएं: उपलब्ध सेवाओं के तहत आधार आधारित बैंकिंग यानी AEPS जैसी सेवाओं के जरिए ग्राहक पैसे निकालने या दूसरी बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. कमीशन ले सकते हैं.
- बिल और रिचार्ज: बिजली-पानी के बिल, मोबाइल रिचार्ज और दूसरी डिजिटल पेमेंट सेवाओं से भी कमाई की जा सकती है.
- टिकट बुकिंग: IRCTC प्लेटफॉर्म पर एजेंट रजिस्ट्रेशन कर ट्रेन या फ्लाइट टिकट या बस टिकट सेवाएं भी दी जा सकती हैं. इसके लिए तय नियमों का पालन करना होगा.
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चौथा सवाल- ग्राहक कैसे बढ़ेंगे, कमाई कैसे बढ़ेगी
इस बिजनेस में सिर्फ दुकान खोलना काफी नहीं है. ग्राहक का भरोसा बनाना ज्यादा जरूरी है. ग्राहक बढ़ेंगे, भरोसा बढ़ेगा तो जाहिर तौर पर कमाई भी अपने-आप बढ़ेगी. इसके लिए कुछ प्रयास किए जा सकते हैं.
- लोकेशन: दुकान ऐसी जगह हो जहां बुजुर्ग, छात्र और ग्रामीण ग्राहक आसानी से पहुंच सकें.
- एक फीस/चार्ज: हर सेवा का सर्विस चार्ज दुकान पर साफ-साफ लिखें. इससे ग्राहक को पहले से पता रहेगा कि किस काम के लिए कितना पैसा लिया जा रहा है.
- जरूरी जानकारी: अपने इलाके के लोगों को नई सरकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप और ऑनलाइन आवेदन की जानकारी देते रहें. इसके लिए दुकान के बाहर सूचना बोर्ड लगा सकते है.
- तकनीक की मदद: आप अपनी दुकान या जन सेवा केंद्र का सोशल मीडिया अकाउंट बना सकते हैं. फेसबुक, इंस्टाग्राम पेज के अलावा स्थानीय WhatsApp ग्रुप बनाया जा सकता है. हर जगह लोगों के काम की जानकारी शेयर कर सकते हैं.

कुछ जरूरी बातें
जन सेवा केंद्र से कमाई का आंकड़ा हर जगह एक जैसा नहीं होगा. ये ग्राहक संख्या, इलाके की मांग, उपलब्ध सेवाओं, सर्विस चार्ज और कमीशन पर निर्भर करेगा. इसलिए 30-60 हजार रुपये महीने की कमाई को तय आमदनी नहीं, बल्कि एक संभावित उदाहरण के तौर पर देखना चाहिए.
अभी हाल ही में यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का एक बयान खूब वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि नौकरी के चक्कर में क्यों रहना, अपना खुद का काम करो. इसमें उन्होंने ई-रिक्शा का उदाहरण दिया था. बहस और विवाद से इतर ये बात हमेशा से कही जाती रही है कि जॉब-सीकर से ज्यादा बेहतर स्वरोजगार है.
बहरहाल, अगर आप बिहार, यूपी या किसी दूसरे छोटे शहर में रहते हैं और डिजिटल समझ रखते हैं, तो स्थानीय जरूरत को समझते हुए ऐसा सर्विस सेंटर शुरू करना स्वरोजगार का एक विकल्प हो सकता है. शुरुआत भले ही छोटी हो सकती है, लेकिन अलग-अलग सेवाएं जोड़कर कारोबार को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है.
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