- असम सरकार के अधिकारी ने आवाज बदलकर की करोड़ों की ठगी.
- शिकायत के बाद CM स्पेशल विजिलेंस सेल ने जांच शुरू की.
- आरोपी के पास से 18 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं.
असम सरकार के एक सीनियर अधिकारी देबेश्वर बोरा पर आरोप है कि उन्होंने CM की आवाज की मिमिक्री के जरिए ठगी की है. आरोपी ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और दूसरे सीनियर अधिकारियों की आवाज की नकल करने वाले कलाकारों का इस्तेमाल किया, जिससे लोगों को यह यकीन दिलाया जा सके कि सरकार के आला अधिकारियों तक उनकी सीधी पहुंच है. आरोपी देबेश्वर बोरा को मुख्यमंत्री के स्पेशल विजिलेंस सेल ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार कर लिया है.
उन्होंने जांच करने वालों को बताया कि देबास्वर बोरा ने कॉन्ट्रैक्ट के लिए 10 लाख रुपये मांगे थे और बाद में 40 लाख रुपये और मांगे. रोजी कलिता ने कहा, "जब बिजनेसमैन को शक हुआ, तो उसने और पैसे देने से मना कर दिया और अपने 10 लाख रुपये वापस मांगे."
जांच में हुए खुलासे...
अधिकारियों ने उस बैंक अकाउंट की जांच की, जिसमें पैसे जमा किए गए थे और पाया कि वह कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश की एक बिजनेस कंपनी से जुड़ा था.
दो फर्मों, KK एंटरप्राइज और DB एंटरप्राइज के मालिकों ने कथित तौर पर जांच करने वालों को बताया कि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट का वादा करके उनके साथ भी करीब 2.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी.
आखिरकार जांच में कथित मिमिक्री ऑपरेशन का पता चला.
सीनियर अधिकारी रोजी कलिता का कहना है, "वह उनके सामने फोन करता था. यह भी सामने आया है कि वह सरकार के सीनियर अधिकारियों से बात करता था. दूसरी तरफ से कोई मिमिक्री आर्टिस्ट या उसकी टीम का कोई सदस्य जवाब देता था."
पीड़ितों को लगता था कि वे सीनियर अधिकारियों से बात कर रहे हैं और उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि उनका काम हो जाएगा. पीड़ितों को यकीन हो गया था. उन्हें लगा कि वह सच में सरकार के सीनियर अधिकारियों से बात कर रहे हैं.
रोजी कलिता ने कहा, "ये सिम कार्ड कई थर्ड पार्टी से लिए गए थे, जिससे वह अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल कर सके और पकड़े जाने से बच सके."
मुख्यमंत्री बनकर धोखाधड़ी करने के इस मामले ने एक गंभीर कानूनी पहलू भी खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री का रूप धारण करके धोखाधड़ी करना बहुत खतरनाक अपराध है. हमें कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे अपराध साबित हो सकता है. मैं अभी इनकी जानकारी नहीं दे सकती क्योंकि जांच चल रही है."
आरोप है कि जो वित्तीय लेन-देन हुए हैं, उनकी जांच अब चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से की जा रही है. जांच करने वाले अधिकारी अभी भी उस कुल रकम का हिसाब लगा रहे हैं, जो इस मामले में शामिल बताई जा रही है.
कलिता ने कहा, "यह बहुत बड़ी रकम है. यह करोड़ों से भी ज्यादा है. हम हर चीज का हिसाब लगा रहे हैं."
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आरोपी को अदालत में पेश करने की तैयारी...
आरोपी को धेमाजी में गिरफ्तार किया गया, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर गुवाहाटी लाया गया. बाद में उसे कोर्ट में पेश किया गया और चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया.
इसके साथ ही, धेमाजी और गुवाहाटी में उसके घरों और धेमाजी में उसके ऑफिस में तलाशी ली गई. कई दस्तावेज बरामद किए गए.
सीनियर अधिकारी रोजी कलिता ने बताया, "हमने सिर्फ मुख्य आरोपी, यानी देबेश्वर बोरा को गिरफ्तार किया है और हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे."
विजिलेंस सेल ने बताया कि उन्हें असम के बाहर से भी शिकायतें मिली हैं.
रोजी कलिता ने बताया, "दूसरे राज्यों से भी कई फोन कॉल आए. उनका कहना है कि वे सभी दस्तावेजों के साथ आएंगे."
अब जांच का फोकस पैसे के लेन-देन, कई सिम कार्ड और कथित मिमिक्री ऑपरेशन के पीछे के बड़े नेटवर्क पर है.
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