2026 के शुरुआती छह महीनों में ही टेक इंडस्ट्री में इतनी बड़ी तादाद में नौकरियां गई जिसने साल 2025 के पूरे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. डेटा ट्रैकिंग वेबसाइट Layoffs.fyi की नई रिपोर्ट के मुताबिक, टेक जगत में AI के आने के बाद से नौकरियों पर जो खतरा मंडरा रहा था, वह अब सच साबित हो रहा है. 1 जुलाई 2026 तक वैश्विक स्तर पर AI के कारण 1.28 लाख से अधिक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है. यह आंकड़ा साल 2025 में पूरे साल के दौरान हुई 1.25 लाख छंटनियों से भी कहीं ज्यादा है. कंपनियां अपनी लागत को कम करने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए तेजी से वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं, जिसका सीधा शिकार आम कर्मचारी बन रहे हैं.
छंटनी के मामले में भारत दूसरे नंबर पर
जनवरी 2020 से जुलाई 2026 के बीच हुई कुल छंटनी में सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका का रहा है. दुनिया भर में हुई कुल छंटनी में अमेरिका की हिस्सेदारी 71.33 प्रतिशत है. इसके बाद 7.16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर आता है. भारत के बाद जर्मनी (3.43 प्रतिशत) और यूनाइटेड किंगडम (2.64 प्रतिशत) का नंबर है. इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय टेक प्रोफेशनल्स इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहे हैं.
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भारत का एजुकेशन सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
भारत के भीतर भी यह छंटनी सभी सेक्टर्स में एक जैसी नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा गाज एजुकेशन सेक्टर (EdTech) पर गिरी है, जहां कुल छंटनी का 21.67 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है. ऑनलाइन पढ़ाई और AI लर्निंग टूल्स के आने से पारंपरिक जॉब्स तेजी से खत्म हो रहे हैं. इसके बाद फाइनेंस सेक्टर दूसरे नंबर पर है, जहां 14.73 प्रतिशत छंटनी देखी गई है. फूड (12.26 प्रतिशत), ट्रांसपोर्ट (11.03 प्रतिशत) और कंज्यूमर बिजनेस (11 प्रतिशत) भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
नए मौके भी दे रहा है AI
भले ही पारंपरिक नौकरियों में लगातार कटौती हो रही है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि बाजार में नई तरह की नौकरियों की डिमांड बढ़ रही है. इस समय मशीन लर्निंग (ML), डेटा साइंस और AI डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में करियर के नए और शानदार अवसर पैदा हो रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलते दौर में कर्मचारियों को खुद को अपग्रेड करना होगा ताकि वे बाजार की नई जरूरतों के हिसाब से खुद को ढाल सकें.
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