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IAS Suhas Yathiraj: कौन हैं सुहास यथिराज? आईएएस अफसर ने लगातार दूसरे पैरालंपिक मेडल के साथ रचा इतिहास

IAS Suhas Yathiraj: पेरिस के ला चैपल एरिना कोर्ट 1 में चल रहे पैरालंपिक खेलों में सुहास यथिराज ने पुरुषों के सिंगल्स SL4 वर्ग में सिल्वर मेडल जीता.

IAS Suhas Yathiraj: कौन हैं सुहास यथिराज? आईएएस अफसर ने लगातार दूसरे पैरालंपिक मेडल के साथ रचा इतिहास
IAS Suhas Yathiraj
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IAS Suhas Yathiraj: पेरिस पैरालंपिक में भारत के लिए एक और मेडल जीतने वाले सुहास यथिराज सिर्फ पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि 2007 बैच के IAS अधिकारी भी हैं. पुरुष एकल SL4 वर्ग के फाइनल में फ्रांस के लुकास माजूर से हारकर उन्होंने रजत पदक जीता. यह उनके करियर का लगातार दूसरा पैरालंपिक सिल्वर है. आइए जानते हैं कि सुहास यथिराज कौन हैं?

कौन हैं सुहास यथिराज?

सुहास यथिराज का जन्म 2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हासन में हुआ था. उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) सुरथकल से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 2006 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और 2007 में IAS अधिकारी बने.

हालांकि प्रशासनिक सेवा में आने के बाद भी उन्होंने खेलों का साथ नहीं छोड़ा. टखने में दिव्यांगता होने के बावजूद उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदला और 2015-16 के दौरान पैरा बैडमिंटन को पेशेवर रूप से अपनाया. इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों और खेल दोनों में शानदार बैलेंस बनाते हुए लगातार सफलता हासिल की.

खेल और प्रशासन, दोनों में बनाई अलग पहचान

सुहास 2018 में राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन चैंपियन बने. 2016 एशियन पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर वह वैश्विक स्तर पर भारत के लिए पदक जीतने वाले पहले कार्यरत भारतीय नौकरशाह बने. 2021 के टोक्यो पैरालंपिक में उन्होंने रजत पदक जीता था, जिसके बाद उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

पेरिस पैरालंपिक में लगातार दूसरा सिल्वर

41 वर्षीय सुहास ने पेरिस पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन किया. ग्रुप स्टेज में उन्होंने इंडोनेशिया के हिकमत रमदानी और दक्षिण कोरिया के ह्वान क्यूंग शिन को सीधे गेम में हराया. सेमीफाइनल में भारतीय खिलाड़ी सुकांत कदम को 2-0 से मात देकर फाइनल में पहुंचे.

फाइनल में उनका सामना एक बार फिर फ्रांस के लुकास माजूर से हुआ. हालांकि उन्हें 9-21, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लगातार दूसरे पैरालंपिक में रजत पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया. इसी साल उन्होंने थाईलैंड में आयोजित BWF पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.

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