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कौन हैं कीर्ति शर्मा: स्कूल में उठाया था धनुष, किसान पिता ने कर्ज लेकर पूरा किया सपना, अब गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

भारत की महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह भारत का एशियन गेम्स में रिकर्व का पहला गोल्ड है.

कौन हैं कीर्ति शर्मा: स्कूल में उठाया था धनुष, किसान पिता ने कर्ज लेकर पूरा किया सपना, अब गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
हरियाणा के जिंद जिले के एक गांव रिटौली में पली-बढ़ी कीर्ति की पहली प्राथमिकता पढ़ाई थी

भारत को एशियन गेम्स 2026 में 11वां गोल्ड मेडल मिल गया है. शुक्रवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत की महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भारतीय टीम की 10 बार की चैंपियन दक्षिण कोरिया पर यह जीत ऐतिहासिक है. महिला रिकर्व आर्चरी टीम का एशियन गेम्स इतिहास में यह पहला गोल्ड है. भारत की महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर में खेले गए फाइनल में मुश्किल हालात में मजबूत कोरियाई टीम को 5-3 से हराकर मेडल जीता.

भारतीय टीम में शामिल कुमकुम मोहोद, अंकिता भक्त और कीर्ति शर्मा ने धैर्य के साथ साहसिक खेल का प्रदर्शन किया. कुमकुम मोहोद फाइनल की स्टार रहीं, जिन्होंने दबाव में भी कमाल का संयम दिखाया. 17 साल की इस खिलाड़ी ने बार-बार जरूरी 10 पॉइंट बनाए. अंकिता भक्त ने कीमती अनुभव और लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि कीर्ति पर फाइनल के दौरान दबाव के पल आए. लेकिन तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर देश के लिए सोना जीत लिया. 

कौन हैं कीर्ति शर्मा

हरियाणा के जिंद जिले के एक गांव रिटौली में पली-बढ़ी कीर्ति की पहली प्राथमिकता पढ़ाई थी. जब वह चौथी कक्षा में थी तो उनके पिता ने उनका दाखिला जींद के पास एक निजी स्कूल में भी करा दिया था.  आठवीं कक्षा तक, कीर्ति का खेलों से जुड़ा एकमात्र अनुभव कभी-कभार होने वाली दौड़ प्रतियोगिता ही था. फिर संयोग से, स्कूल ने तीरंदाजी शुरू करने का फैसला किया.

उन्होंने 2019-2020 के आसपास अपने स्कूल के दिनों में तीरंदाजी की शुरुआत की थी. कीर्ति को इस खेल से परिचित कराने में उनके स्कूल ने अहम भूमिका निभाई, क्योंकि स्कूल परिसर में ही तीरंदाजी का मैदान था. शुरुआत में, वह उन सीनियर छात्रों से प्रेरित हुईं जो पहले से ही तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे थे, और उनमें खुद भी इस खेल को अपनाने की गहरी रुचि पैदा हुई.

स्पोर्टस्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बांस से बने भारतीय धनुष से शूटिंग शुरू करने के छह महीने बाद, कीर्ति ने फाइबरग्लास लिम्ब वाले रिकर्व बो (धनुष) से ​​शूटिंग करने का फ़ैसला किया. इसकी कीमत 60,000 रुपये थी. कीर्ति के पिता, जो एक किसान थे, के लिए यह एक बड़ा खर्च था, लेकिन आख़िरकार वे इसे खरीदने के लिए तैयार हो गए. 

उनके पिता विजय शर्मा कहते हैं,"मुझे अंदाज़ा नहीं था कि धनुष इतना महंगा होगा और मेरे पास सिर्फ़ 2 किला (एकड़) ज़मीन है. लेकिन मैं हमेशा से साफ़ था कि बच्चों के भविष्य के लिए मैं कोई कसर नहीं छोड़ूंगा. मैं पहले से ही उसकी पढ़ाई पर काफ़ी पैसे खर्च कर रहा था, इसलिए जब उसकी आर्चरी पर कुछ खर्च करने की बात आई, तो मैंने मना करने के बारे में कभी नहीं सोचा. मैं आढ़तिया (साहूकार) के पास गया और धनुष खरीदने के लिए लोन लिया."

कोविड-19 महामारी के कारण उनकी शुरुआती प्रगति में कुछ समय के लिए रुकावट आई, क्योंकि पाबंदियों की वजह से वह नियमित रूप से ट्रेनिंग ग्राउंड नहीं जा पा रही थीं. इस रुकावट के बावजूद, महामारी के बाद उन्होंने फिर से ट्रेनिंग शुरू की और अपनी स्किल्स को बेहतर बनाना जारी रखा. स्कूल स्तर पर लगभग दो साल की ट्रेनिंग के बाद, कीर्ति शर्मा 2022 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) से जुड़ीं.  तब से, वह SAI के हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम के तहत ट्रेनिंग कर रही हैं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि एशिया कप थाईलैंड 2026 में रही, जहां उन्होंने महिला रिकर्व टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

जीत पर क्या बोले कोच

आर्चरी कोच लोकेश चंद टीम की जीत पर कहते हैं कि कीर्ति स्थापित नामों को ट्रायल्स में हराकर भारतीय टीम में आईं. चार दिन चले ट्रायल्स में कीर्ति ने अपने से कहीं ज़्यादा अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा. उन्होंने एशियन गेम्स मेडलिस्ट सिमरनजीत कौर, चार बार की ओलंपियन दीपिका कुमारी और फिर ओलंपिक सेमीफाइनलिस्ट अंकिता भकत को हराया. 

लोकेश टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले टीम मैनेजर के तौर पर जापान गए थे. जहां कुरोबो शहर में भारतीय टीम ने 10 दिन जमकर ट्रेनिंग की थी. लोकेश चंद बताते हैं कि कीर्ति एक सामान्य परिवार से आती हैं.

भारतीय महिला टीम का यह स्वर्ण कई मायनों में ऐतिहासिक है. क्योंकि महिला टीम ने न सिर्फ पहली बार एशियन गेम्स में रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड जीता है बल्कि उसने 10 बार की ओलंपिक चैंपियन कोरिया को हराया है. लोकेश चंद इस मेडल के कारणों में आर्चरी प्रीमियर लीग को एक मानते हैं. 

लोकेश कहते हैं,"एपीएल ने काफी अहम रोल निभाया है. दुनिया के सबसे बेहतर आर्चर आते हैं. लगातार 10 दिनों तक शूटिंग होती है. इस दौरान सभी खिलाड़ियों को एक दूसरे से मिलने और उनके बात करने का अनुभव होता है. साथ ही दिग्गजों को पास से ट्रेनिंग करते देखने का भी फायदा होता है." 

भारत को लंबे समय तक रिकर्व में कोरिया से हार का सामना करना पड़ा है. हालांकि, लोकेश बताते हैं कि अब सामने आ रहे युवा खिलाड़ियों के मन में कोरियाई खिलाड़ियों का किसी भी तरह का कोई भय नहीं है. 

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