खेल की दुनिया में कई बार कुछ ऐसे वाकये होते हैं, जिन पर दुनिया का ध्यान खिंचा चला आता है. ऐसा ही कुछ फुटबॉल वर्ल्ड कप में इस बार देखने को मिला. लेकिन इसकी वजह किसी खिलाड़ी का कोई धांसू गोल या मैदान पर कोई फाइट नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'दखलंदाजी' है.
हुआ यूं कि 2 जुलाई को अमेरिका और बोस्निया के मैच में अमेरिकन स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को रेफरी ने 'रेड कार्ड' दिखा दिया. इसके बाद ट्रंप ने फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी FIFA को इस फैसले का रिव्यू करने को कहा और आखिरकार 'रेड कार्ड' हटा दिया गया. ट्रंप ने भी इस बात को माना है कि उन्होंने FIFA से इस फैसले को रिव्यू करने को कहा था.
क्या है पूरा मामला?
फोलारिन बालोगुन अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं. 2 जुलाई को बोस्निया के साथ चल रहे मैच में बालोगुन ने अपना तीसरा गोल किया ही था कि 64वें मिनट में रेफरी राफेल क्लॉस ने उन्हें 'रेड कार्ड' दिखा दिया.
हुआ ये था कि रेफरी ने मैच के दौरान खिलाड़ियों के टकराव का स्लो-मोशन रीप्ले देखा, जिसमें बालोगुन का पैर बोस्निया के खिलाड़ी तारिक मुराहेमोविक के टखने से लगता दिख रहा था. इस कारण रेफरी ने उन्हें 'रेड कार्ड' दिखाया.

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इस तरह से अगले मैच के लिए बालोगुन सस्पेंड हो गए. अगला मैच बेल्जियम के साथ होना था, जो अमेरिकी टीम के लिए सबसे बड़ा मैच था.
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फिर ट्रंप ने दिया दखल?
फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 में होने वाले अमेरिका और बेल्जियम मैच से पहले बालोगुन का सस्पेंड होना अमेरिका के लिए बड़ा झटका था.
इसके बाद ट्रंप ने FIFA से बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन के फैसले को रिव्यू करने को कहा. इसके बाद FIFA ने बालोगुन पर लगा सस्पेंशन हटा दिया. ये बात और है कि बेल्जियम के साथ हुए मैच में अमेरिका में बुरी तरह हार गया और वर्ल्ड कप से बाहर हो गया.
लेकिन ट्रंप का फोन कर इस फैसले में दखल देना दुनियाभर की नजरों में आ गया. इसकी आलोचना भी हो रही है. ट्रंप ने सोमवार को कहा, 'बालोगुन हमारा सबसे अच्छा खिलाड़ी है. उसे रेड कार्ड मिला. मुझे नहीं पता था कि इसका क्या मतलब है. लेकिन फिर मैंने सुना कि इसका मतलब है कि आप अगला गेम नहीं खेल सकते.'
Trump on Balogun:
— Clash Report (@clashreport) July 6, 2026
Balogun is our best player. He got a red card. I didn't know what that meant, but then I heard that it means you cannot play in the next game.
That's very unfair. How do you penalize him for a game that hasn't been played yet?
I asked for a review by FIFA. pic.twitter.com/UmMU6N4u6k
उन्होंने कहा कि 'यह बहुत गलत है. आप उसे ऐसे गेम के लिए कैसे सजा दे सकते हैं जो अभी तक खेला ही नहीं गया है?' ट्रंप ने बताया कि उन्होंने FIFA से रिव्यू करने के लिए कहा था.
ये कार्ड का सिस्टम क्या है?
फुटबॉल की दुनिया में दो तरह के कार्ड होते हैं. पहला- येलो कार्ड और दूसरा- रेड कार्ड. ये ठीक वैसे ही काम करते हैं, जैसे ट्रैफिक लाइट में पीली और लाल बत्ती.
जिस तरह से पीली बत्ती धीमी गति से चलने और सावधानी बरतने की चेतावनी देती है और लाल बत्ती पूरी तरह से रुकने का संकेत देती है, उसी तरह से येलो और रेड कार्ड भी खिलाड़ियों को चेतावनी देने के काम आते हैं.
फुटबॉल मैच के दौरान अगर कोई खिलाड़ी खेल के नियम तोड़ता है तो उसे येलो कार्ड दिखाकर चेतावनी दी जाती है. कई तरह की हरकतों की वजह से येलो कार्ड मिल सकता है. लापरवाही से टैकल करना, अफसर से बहस करना, चोट का नाटक करना, समय बर्बाद करना या खेल भावना के खिलाफ कोई भी हरकत करने पर येलो कार्ड मिल सकता है.
एक ही मैच में दो बार येलो कार्ड मिलने का मतलब है रेड कार्ड मिलना और तुरंत खेल से बाहर कर दिया जाना.
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और ये 'रेड कार्ड' क्या होता है?
ज्यादा गंभीर गलतियों के लिए, रेफरी खिलाड़ियों को अनुशासित करने के लिए 'रेड कार्ड' का इस्तेमाल करता है.
मैच के दौरान कई तरह की गलत हरकतों या खेल भावना के खिलाफ बर्ताव के लिए खिलाड़ी को रेड कार्ड मिल सकता है. हिंसक हरकतें, गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, थूकना या जानबूझकर हैंडबॉल फाउल करके विरोधी टीम को गोल करने का मौका न देना... ये सभी ऐसी गलतियां हैं जिनके लिए रेड कार्ड मिल सकता है.
रेड कार्ड के नतीजे टीम के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकते हैं. जिन खिलाड़ियों को रेड कार्ड मिलता है, उन्हें तुरंत खेल के मैदान से बाहर भेज दिया जाता है और वे बाकी मैच में नहीं खेल पाते. FIFA वर्ल्ड कप में, खिलाड़ियों पर अगले मैच में खेलने पर भी रोक लगा दी जाती है.
एक बार जब खिलाड़ी को बाहर भेज दिया जाता है, तो गलती करने वाली टीम का मैनेजर उसकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी को नहीं ला सकता. इसलिए टीम को बाकी मैच विरोधी टीम से एक खिलाड़ी कम के साथ खेलना पड़ता है.

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कैसे हुई इन कार्ड्स की शुरुआत?
फुटबॉल में येलो और रेड कार्ड सबसे पहले मैक्सिको में 1970 के वर्ल्ड कप में शुरू हुए थे. ब्रिटिश रेफरी केन एस्टन चाहते थे कि मैदान पर दी जाने वाली चेतावनियों को साफ तौर पर दिखाया जाए सके और इसी कारण येलो और रेड कार्ड की शुरुआत हुई.
जबकि, इससे पहले तक खिलाड़ियों को मौखिक चेतावनी दी जाती थी. मतलब 1970 से पहले तक मैच के दौरान रेफरी बोलकर खिलाड़ी को चेतावनी देते थे या बाहर भेजते थे. इस कारण दर्शकों को समझ नहीं आता था.
1970 के वर्ल्ड कप में पहली बार येलो और रेड कार्ड्स आए. हालांकि, पहले वर्ल्ड कप में किसी खिलाड़ी को रेड कार्ड नहीं मिला था. पहला रेड कार्ड 1974 के वर्ल्ड कप में चिली के खिलाड़ी कार्लोस केज्स्ली को मिला था.
येलो और रेड कार्ड से जुड़ा एक दिलचस्प इतिहास 2006 के वर्ल्ड कप से जुड़ा है. तब पुर्तगाल और नीदरलैंड के बीच एक बहुत ही तनावपूर्ण मुकाबला हुआ था. इस मैच में कुल 16 येलो कार्ड और 4 रेड कार्ड दिखाए गए थे. एक फाउल के कारण घुटने में चोट लगने से क्रिस्टियानो रोनाल्डो को मैच से बाहर होना पड़ा था.
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