मुंबई में मॉनसून की रिकॉर्ड बारिश से लोकल ट्रेन, हाईवे-एक्सप्रेसवे से लेकर उड़ानों तक पर असर पड़ा है. मुंबई के निचले इलाकों में सैलाब है, जो बारिश से निपटने की तैयारियों को पोल खोलता है. लेकिन इसी बारिश और उफान मारती लहरों के बीच समुद्र के बीच एक डराने वाली तस्वीर सामने आई है, जो चकाचौंध भरी माया नगरी का काला सच है. दरअसल, मुंबई में समुद्र में लोगों ने जानबूझकर जो कचरा फेंका, उसे ही कुदरती तरीके से वापस फेंककर प्रकृति ने उसे अहसास कराया है कि वो खुद किस दलदल में फंसता जा रहा है. मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी और दादर चौपाटी पर टनों प्लास्टिक कचरे का अंबार पर्यावरण चुनौती पेश करता है.
औद्योगिक नगरी मुंबई में रोजाना लगभग 6000 से 6500 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है. कभी ये कचरा 9000 मीट्रिक टन से अधिक था, लेकिन डंपिंग ग्राउंड में कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और सोर्स सेग्रीगेशन (कचरा अलग करने) से इसमें कमी आई है. कुल कचरे में 10 से 12% हिस्सा केवल प्लास्टिक होता है. मुंबई में मॉनसून की बारिश में ये समस्या बढ़ जाती है.
मुंबई में रोजाना हजारों टन कचरा
डिजास्टर कंट्रोल रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई रोजाना करीब 600 से 750 टन प्लास्टिक कचरा पैदा करती है. इसमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, पैकेजिंग मैटेरियल, बोतलें और प्लास्टिक थैली शामिल हैं.मुंबई का ज्यादातर कचरा कांजुरमार्ग और देवनार डंपिंग ग्राउंड में जाता है. देवनार कचरे का पहाड़ अपनी क्षमता से कई गुना आगे निकल चुका है, आग लगने और मीथेन गैस के उत्सर्जन का संकट भी इससे उभरा है.
मुंबई में क्यों कचरे का संकट
मुंबई तीन ओर से समंदर से घिरी है. शहर की भौगोलिक बनावट और ड्रेनेज सिस्टम ऐसा है कि जाने-अनजाने में शहर का एक बड़ा कचरा सीधे समुद्र में चला जाता है.पर्यावरणविद और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (NIO) की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के नालों, नदियों (जैसे मीठी नदी, पोइसर, ओशिवारा) और क्रीक के जरिए हर साल टनों प्लास्टिक कचरा सीधे अरब सागर में बह जाता है. मॉनसून के दौरान यह मात्रा कई गुना बढ़ जाता है.
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हाई टाइड का रिटर्न गिफ्ट
मुंबई में ज्वार के दौरान जब समुद्र में 4.5 मीटर से ऊंची लहरें (High Tide) उठती हैं तो समुद्र अपनी सफाई खुद करता है. तटों की ओर उठती लहरों के साथ ये कचरा भी वापस किनारों पर आता है. बीएमसी (BMC) के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के हाई टाइड के दौरान समुद्र तटों से एक दिन में 200 से 500 मीट्रिक टन तक कचरा निकलता है.
मुंबई में प्लास्टिक कचरे का संकट
मुंबई में ब्रिटिश काल का स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (SWD) सिस्टम है. लोग सड़कों और नालों में प्लास्टिक की बोतलें और थैलियां फेंकते हैं. ये नालों के मुहाने और जालियों में फंसने से भारी बारिश के दौरान पानी बाहर नहीं निकल पाता और शहर में बाढ़ सी आ जाती है.
मीठी नदी का दम घुटना
बोरीवली नेशनल पार्क से निकलकर माहिम खाड़ी तक जाने वाली मीठी नदी आज एक विशाल नाला बन चुकी है. इसके किनारों पर बसी अवैध बस्तियों और उद्योगों का प्लास्टिक कचरा सीधे पानी में जाता है, जो समुद्र में मिल जाता है.
माइक्रोप्लास्टिक का खतरा
समुद्र में प्लास्टिक लहरों और धूप से ये कचरा छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है, जिसे माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं. इसे समुद्री मछलियां खा लेती हैं और सी फूड के जरिये यह वापस इंसानों की फूड चेन में शामिल होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बन रहा है.
बीएमसी (BMC) क्या कर रही
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने शहर की प्रमुख नदियों (जैसे मीठी नदी) और बड़े नालों में ट्रैश बूम या लोहे के जाल लगाए हैं, ताकि कचरा बहकर समंदर में न जाए बल्कि नाले में ही रुक जाए, जहां से पोकलेन मशीनों से उसे बाहर निकाला जाता है. जुहू, वर्सोवा, गिरगांव और दादर चौपाटी जैसे समुद्र तटों पर बीएमसी ने बीच क्लीनिंग मशीनें तैनात की हैं. ये रेत छानकर प्लास्टिक कचरा अलग करती हैं. हजारों सफाई कर्मचारियों को 24 घंटे शिफ्ट में लगाया जाता है.
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प्लास्टिक बैन और जब्ती
महाराष्ट्र सरकार के प्लास्टिक प्रतिबंध कानून के तहत बीएमसी की विशेष टीमें बाजारों, मॉल और दुकानदारों पर छापेमारी करती हैं. प्रतिबंधित सिंगल यूज़ प्लास्टिक बेचने वालों पर 5000 से 25000 तक का जुर्माना लगता है.वर्सोवा बीच क्लीन अप मूवमेंट के अगुआ अफरोज शाह जैसे पर्यावरण मित्रों ने भी लाखों टन प्लास्टिक समुद्र से निकाला है.
समस्या का हल कैसे हो
- हर सोसायटी, स्लम और घर के स्तर पर सूखे और गीले कचरे को अलग करना 100% अनिवार्य और सख्ती से लागू किया जाए.
- सूखा प्लास्टिक अगर डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंचेगा तो उसे आसानी से रिसाइकल किया जा सकेगा
- कंपनियां प्लास्टिक पैकेजिंग या बोतलें बनाने वाली कंपनियां खाली बोतलें/पैकेट वापस खरीद की वेंडिंग मशीनें लगाएं
- समुद्र में गिरने वाले सभी 45 बड़े नालों पर अत्याधुनिक मैकेनिकल गेट्स या जाइप नेट लगाए जाने चाहिए
- समुद्र के आसपास प्रतिबंधित प्लास्टिक से बनी सामग्री की खरीद-फरोख्त पर रोक हो
- खुले स्थानों पर प्लास्टिक फेंकने पर भारी भारी जुर्माना लगाया जाए
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