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ट्रंप बने फुटबॉल एक्सपर्ट? समझिए रेड कार्ड पर अमेरिकी राष्ट्रपति का यह तर्क गलत क्यों है, फीफा कर रहा ऐसे बचाव

डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने यह स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने फीफा प्रमुख से फोलारिन बालोगुन को दिखाए गए रेड कार्ड फैसले के मामले में दखल देने को कहा था जिसके बाद फीफा के फैसले को लेकर बवाल मचा हुआ है.

ट्रंप बने फुटबॉल एक्सपर्ट? समझिए रेड कार्ड पर अमेरिकी राष्ट्रपति का यह तर्क गलत क्यों है, फीफा कर रहा ऐसे बचाव
Donald Trump, FIFA World Cup 2026:

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप राजनीति में अपने बड़बोलेपन के लिए तो जाने जाते ही हैं. अब फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में अमेरिकी खिलाड़ी को दिखाये गए रेड कार्ड के फैसले को पलटने के लिए उन्होंने फीफा में दखलंदाज़ी की बात खुलकर मान ली है. लेकिन इस वाकये ने कई सवालों के साथ फीफा की साख पर बट्टा भी लगा दिया है.फीफा के अमेरिकी खिलाड़ी से मैच के बाद रेड कार्ड के फ़ैसले को वापस लेने की इसकी दुनिया भर में आलोचना हो रही है. बड़ी बात ये है कि डॉनल्ड ट्रंप अपनी आदत के मुताबिक अपनी दखलंदाज़ी की बात छाती ठोककर मान रहे हैं. और आदतन सोशल मीडिया पर पर इसे ज़ोर-शोर से रख रहे हैं. हालांकि, फीफा ने जो फैसला लिया है, वह संस्था के नियम के तहत ही लिया है. 

ट्रंप ने छाती ठोककर मानी ‘रेड कार्ड पर समीक्षा' की बात

डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बैलोगुन के रेड कार्ड रिवर्सल के फ़ैसले पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. ट्रंप ने कहा, “मैंने आज तक ऐसा कुछ नहीं देखा. मैंने वो खेल देखा... वो फाउल ही नहीं था. वो कोई उल्लंघन ही नहीं था. वो सिर्फ दो खिलाड़ी थे जो पूरी रफ्तार से दौड़ रहे थे और आपस में टकरा गए... इसलिए हां, मैंने फीफा से समीक्षा करने के लिए कहा था."
 

सबसे बड़ा खेल विवाद- फीफा की छवि खराब 

अमेरिका और बेल्जियम के बीच राउंड ऑफ़ 16 का मैच 7 जुलाई यानी मंगलवार के सुबह 5:30 बजे होना है. और, फीफा वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और बेल्जियम के राउंड ऑफ 16 मुकाबले से कुछ घंटे पहले ही सामने आ गया. अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बैलोगुन को रेडकार्ड दिखाये जाने के बाद आख़िरकार खेलने की मंजूरी मिलते ही विवाद बड़ा हो गया. फीफा की छवि पर धब्बा लगा है. फीफा ने रेड कार्ड के बाद लगा उनका ऑटोमैटिक सस्पेंशन सनसनीखेज तरीके से पलट दिया. ये साफ़ हो गया है कि यह फैसला तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर फ़ीफ़ा अध्यक्ष जियानी इंफ़ैंटिनो से इस घटना की समीक्षा करने की गुज़ारिश की.

ज़ाहिर है ट्रांप के फ़ोन पर फ़ीफ़ा के इस रिवर्स फ़ैसले ने फ़ुटबॉल की सर्वोच्च संस्था पर राजनीतिक हस्तक्षेप के साथ उसकी साख को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं. फ़ीफ़ा की निष्पक्षता पर तो सवाल उठ ही रहे हैं. 

फोलारिन को कैसे मिला रेड कार्ड?

फोलारिन बैलोगुन ने वर्ल्ड कप में अमेरिका के लिए अब तक सबसे ज़्यादा 3 गोल किये हैं. फ़ोलारिन को बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ रेफ़री ने रेड कार्ड दिखाया था. 1 जुलाई को खेले गए राउंड ऑफ़ 32 के मैच में अमेरिका ने बोस्निया हर्ज़ेगोविना को 2-0 से शिकस्त दी. अमेरिका ने राउंड ऑफ 32 में बोस्निया को 2-0 से हराया था. इसी मुकाबले में वीडियो रिव्यू (VAR) के बाद बालोगुन को सीधा रेड कार्ड दिखाया गया था. उन पर बोस्निया के एक डिफेंडर के पैर पर स्टड  (जूते के स्पाइक)  पड़ने का आरोप लगा था.फीफा के नियमों के मुताबिक, सीधे रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी पर एक मैच का अपने आप प्रतिबंध लग जाता है और उसकी टीम इस फैसले के खिलाफ अपील भी नहीं कर सकती

क्या कहता है फीफा का नियम !

फीफा के नियमों के अनुसार, सीधा रेड कार्ड मिलने पर एक मैच का ऑटोमैटिक सस्पेंशन होता है. लेकिन रविवार (5 जलाई ) को फीफा ने एकाएक यह फैसला पलट दिया. ऐसा माना जा रहा है कि यहां आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया गया. 

फीफा नियमों के अनुसार ट्रंप क्यों 'गलत' हैं? 

फीफा चार्टर के आर्टिकल 2(2) और आर्टिकल 15(c) के अनुसार, कोई भी सरकार या राजनेता फुटबॉल के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन करना और फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड बैन को हटाने के लिए दबाव बनाना फीफा के नियम का एक उल्लंघन है. 

इस मामले में क्या है फीफा का फैसला !

फीफा ने कहा कि बैलोगुन का एक मैच का सस्पेंशन एक साल की प्रोबेशन अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है. इस दौरान अगर दोबारा ऐसी गलती हुई तो बैन फिर से लागू हो जाएगा. लेकिन अब फ़ीफ़ा के इस फैसले से दुनिया भर में विरोध शुरू हो गया है. 

फीफा इस नियम से कर रहा बचाव

ट्रंप के फोन कॉल के बाद, फीफा की अनुशासनात्मक समिति ने अनुशासनात्मक कोड के आर्टिकल 27 का हवाला दिया है. इस नियम के अनुसार फीफा को किसी भी अनुशासनात्मक प्रतिबंध पूरी तरह या निलंबित करने और खिलाड़ी को निगरानी अवधि पर रखने का विशेष अधिकार देता है. ट्रंप और व्हाइट हाउस का तर्क है कि उन्होंने रेफरी के एक "गलत फैसले" की समीक्षा करने की अपील की है. 

आखिर आर्टिकल 27" क्या है

2026 वर्ल्ड कप के दौरान यह बात सामने आई कि कैसे राजनेता फीफा के अपने विवेक अधिकार का फायदा उठाते हैं. नियमों के मुताबिक, रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी को अगले मैच से बाहर बैठना पड़ता है. लेकिन फीफा के अनुशासनात्मक कोड के आर्टिकल 27 के तहत, अधिकारियों के पास खिलाड़ी को सस्पेंड करने के बजाय 1 से 4 साल के निगरानी अवधि पर रखने की शक्ति होती है. जब राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद टूर्नामेंट के बीच में ऐसे फैसले लिए जाते हैं, तो विरोधी टीमें इसे खेल की निष्पक्षता और रेफरी के फैसलों के खिलाफ मानती हैं और अपनी नाराजगी जाहिर करती है. 

बेल्जियम करेगा अपील?

गार्सिया ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या बेल्जियम अपील करेगा या ट्रंप के हस्तक्षेप ने फीफा को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि उनका ध्यान सिर्फ अमेरिका को हराने पर है. अमेरिकी टीम को कथित तौर पर ये बात ट्रेनिंग के लिए जाते वक्त सोशल मीडिया के ज़रिए पता चला कि बैलोगुन फिर से राउंड ऑफ़ 16 मैच के लिए उपलब्ध हैं

अमेरिकी खिलाड़ियों ने क्या कहा?

इससे पहले अमेरिकी खिलाड़ियों ने अपने स्ट्राइकर का बचाव किया था और कहा था कि टैकल के पीछे कोई इरादा नहीं था. अमेरिकी खिलाड़ी क्रिश्चियन पुलिसिच ने कहा, "फ्लो का वापस आना बहुत बड़ी बात है. वो हमें एक नया आयाम देता है, वो हमेशा खतरा है, और पूरे टूर्नामेंट में वो हमारे लिए बहुत अहम रहा है."

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