दुनिया के दो महान फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो आज करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं. दोनों ने खेल के मैदान पर ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें तोड़ना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इन दोनों दिग्गजों की औपचारिक स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी थी. लेकिन इसके बावजूद इन्होंने सक्सेस के ऐसे मुकाम को छू लिया है कि हर युवा इन्हीं की तरह बनना चाहता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पढ़ाई जरूरी नहीं है, बल्कि इनकी कहानी सिखाती है कि अगर पैशन फॉलो किया जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है.
लियोनेल मेसी का बचपन और फुटबॉल
अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने बहुत कम उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था. बचपन में उन्हें ग्रोथ हार्मोन की कमी (Growth Hormone Deficiency) का सामना करना पड़ा. इलाज के लिए उनका परिवार स्पेन गया, जहां एफसी बार्सिलोना की युवा अकादमी ला मासिया (La Masia) ने उन्हें प्रशिक्षण दिया.
फुटबॉल ट्रेनिंग और लगातार अभ्यास के कारण मेसी अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर सके. उन्होंने अपना अधिकांश समय खेल को बेहतर करने में लगाया और आगे चलकर विश्व कप, कोपा अमेरिका और कई बड़े खिताब जीते.
क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फुटबॉल पैशन
पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बचपन भी संघर्षों से भरा रहा. साधारण परिवार से आने वाले रोनाल्डो ने कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें फुटबॉल में करियर बनाना है.
करीब 14 साल की उम्र में उन्होंने फुटबॉल पर पूरा ध्यान देने के लिए स्कूल छोड़ दिया और स्पोर्टिंग लिस्बन की अकादमी में प्रशिक्षण शुरू कर दिया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज उनके नाम कई लीग खिताब, UEFA Champions League ट्रॉफियां और कई पुरस्कार दर्ज हैं.
इन दोनों की सफलता के पीछे केवल प्रतिभा नहीं, अनुशासन भी
मेसी और रोनाल्डो की सफलता केवल प्रतिभा की वजह से नहीं है. दोनों खिलाड़ी अपनी फिटनेस, अनुशासन, नियमित अभ्यास और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं. यही गुण उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल करते हैं.
क्या इससे पढ़ाई की अहमियत कम हो जाती है?
ऐसा नहीं कहा जा सकता. मेसी और रोनाल्डो जैसे उदाहरण दुर्लभ माने जाते हैं क्योंकि अधिकांश लोगों को सफलता पाने के लिए शिक्षा और कौशल दोनों होना जरूरी हैं. पढ़ाई न केवल करियर के अधिक विकल्प देती है, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अगर किसी छात्र का सपना खेल, संगीत, कला या किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाना है, तो उसे पढ़ाई के साथ-साथ अपने कौशल पर भी मेहनत करनी चाहिए.
यहां हैं केवल 2 सड़कें और 30 लोगों की आबादी, क्या ये दुनिया का सबसे छोटा शहर है?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं