अमेरिका ने अपनी आजादी के 250वें स्वतंत्रता दिवस को यादगार बनाने के लिए इतने पटाखे छोड़े कि अपनी राजधानी वॉशिंगटन को दुनिया का सबसे प्रदूषित बड़ा शहर बना दिया. 4 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पटाखे छोड़ने में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने निकली थी लेकिन उसकी वजह से हवा में इतना धुआं भर गया कि लोगों को साफ दिखाई देना भी मुश्किल हो गया. अब इस रिकॉर्ड बनाने की कोशिश पर पर्यावरण और लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
अमेरिका में क्या हुआ
IQAir के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन कुछ समय के लिए दुनिया का सबसे प्रदूषित बड़ा शहर बन गई. इसकी वजह अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर हुई विशाल आतिशबाजी थी, जिसे डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने शानदार बताया. पाइरोटेक्निको नाम की कंपनी को व्हाइट हाउस के फ्रीडम 250 संगठन ने यह आतिशबाजी शो आयोजित करने का जिम्मा दिया था. इस कंपनी ने 8 लाख 50 हजार पटाखे छोड़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का टारगेट रखा था. लेकिन एक्सपर्ट्स ने पहले ही चेतावनी दी थी कि सिर्फ 40 मिनट में इतने ज्यादा पटाखे छोड़ना लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.
4 जुलाई के दिन पूरा अमेरिका जश्न में डूबा होता है. हर साल इस दिन अमेरिका के लोग ब्रिटेन से आजादी मिलने की खुशी में परेड निकालते हैं, मुहल्लों में पार्टियां ऑर्गनाइज की जाती हैं और पटाखे छोड़े जाते हैं. हालांकि इस बार वाशिंगटन में गरज-चमक के साथ आई बारिश की वजह से यह आतिशबाजी का यह कार्यक्रम एक घंटे से ज्यादा देर से शुरू हुआ. आखिरकार यह रात करीब 12 बजे शुरू हुआ.
शाम 8 बजे से ही बढ़ने लगा था प्रदूषण
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार रात करीब 8 बजे से ही वॉशिंगटन की हवा में प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिलने लगे थे. यह शहर के अलग-अलग इलाकों में हो रही आतिशबाजी की वजह से था. लेकिन जब आतिशबाजी का मेन (सरकारी) इवेंट शुरू हुआ तो स्थिति खराब होने लगी. वहां की हवा में बेहद छोटे और खतरनाक कणों का स्तर बहुत तेजी से बढ़ गया. हवा के रुख वाली दिशा में खड़े लोगों के सामने धुएं का इतना बड़ा गुबार पहुंचा कि उनके लिए आतिशबाजी को देखना भी मुश्किल हो गया.

आतिशबाजी का लुत्फ उठाते डोनाल्ड ट्रंप
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार वाशिंगटन की हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषण कण (PM 2.5) एक जगह पर 200 माइक्रोग्राम पर क्यूब मीटर से भी ज्यादा पहुंच गए. अपने छोटे साइट की वजह से यह फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं. ये कण तुरंत नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं. अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के अनुसार, 24 घंटे के लिए सुरक्षित सीमा 35 माइक्रोग्राम पर क्यूब मीटर है.
शहर के बड़े हिस्से में "कोड पर्पल" अलर्ट जारी करना पड़ा. इसका मतलब होता है कि हवा की गुणवत्ता इतनी खराब है कि सिर्फ बीमार या बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की सेहत पर असर पड़ सकता है. यह अलर्ट पड़ोसी राज्यों वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई इलाकों में भी लागू रहा. स्विट्जरलैंड की कंपनी IQAir के मुताबिक, 5 जुलाई (रविवार) की सुबह करीब 3 बजे से 5 बजे के बीच वॉशिंगटन दुनिया का सबसे प्रदूषित बड़ा शहर था.
नोट- खबर लिखे जाने तक वांशिगटन सबसे प्रदूषित शहरों की रैंकिग में 79वें नंबर पर आ गया था. अभी टॉप पर कांगो का शहर किंशासा था.
यह भी पढ़ें: वैज्ञानिकों को मिला एक ऐसा जीव, जो बिना बड़ा हुए ही हो जाता था बूढ़ा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं