फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. वजह रेड कार्ड के बाद भी फीफा का अचानक फैसला बदलना और इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित भूमिका का होना है.
आखिर पूरा मामला क्या है?
अमेरिका ने राउंड ऑफ 32 के नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया हर्जेगोविना को 2-0 से हराया था. इस मैच में बालोगुन ने शानदार गोल भी किया. लेकिन मैच के दौरान उनका पैर बोस्निया के डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के टखने के ऊपर जा लगा.
NEW: President Trump personally called FIFA President Gianni Infantino to ask him to review the suspension of U.S. player Folarin Balogun, according to the NYT.
— Collin Rugg (@CollinRugg) July 5, 2026
Balogun was given a red card against Bosnia and Herzegovina on Wednesday and was suspended for the next game.
FIFA… pic.twitter.com/svJl6f4N3g
मैदान पर मौजूद ब्राजील के रेफरी राफेल क्लॉस ने पहले इसे सामान्य फाउल भी नहीं माना, लेकिन VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) ने उन्हें घटना दोबारा देखने को कहा. स्लो मोशन रिप्ले देखने के बाद रेफरी ने बालोगुन को सीधे रेड कार्ड दिखा दिया.
फीफा ने दो दिन बाद साफ कर दिया कि रेड कार्ड सही है और नियमों के मुताबिक बालोगुन अगले मैच में नहीं खेल पाएंगे. यानी बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल से उनका बाहर होना तय माना जा रहा था.

जब बालोगुन को रेफरी ने मैच के दौरान दिखाया रेड कार्ड
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फिर अचानक क्या बदल गया?
रविवार को फीफा ने अचानक ही अपना फैसला बदल दिया. उसने कहा कि बालोगुन अब बेल्जियम के खिलाफ खेल सकेंगे. हालांकि फीफा ने रेड कार्ड पूरी तरह खत्म नहीं किया. वह एक साल तक उनके रिकॉर्ड में रहेगा. अगर इस दौरान बालोगुन फिर उसी तरह का गंभीर फाउल करते हैं, तो यह एक मैच का प्रतिबंध तुरंत लागू हो जाएगा.
यहीं से विवाद शुरू हो गया.

रेफरी रेड कार्ड दिखाते हुए
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आखिर फीफा ने नियम कैसे बदले?
असल में फीफा के नियमों में एक प्रावधान है, जिसे आर्टिकल 27 कहा जाता है. इसके तहत फीफा की न्यायिक समिति किसी भी अनुशासनात्मक सजा को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक सकती है.
यानी सामान्य तौर पर सीधे रेड कार्ड के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती, लेकिन आर्टिकल 27 फीफा को विशेष परिस्थितियों में अपना फैसला बदलने का अधिकार देता है.
फीफा ने इसी नियम का इस्तेमाल करते हुए बालोगुन का एक मैच का प्रतिबंध फिलहाल हटा दिया.

डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर तीन बार फीफा अधिकारियों को फोन किया
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ट्रंप की भूमिका क्यों चर्चा में है?
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार से रविवार के बीच फीफा अधिकारियों को तीन बार फोन किया. दावा है कि उन्होंने बालोगुन पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की.
हालांकि न तो व्हाइट हाउस ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है और न ही फीफा ने इन दावों की पुष्टि की है.
रविवार को जब फीफा ने फैसला बदला तो ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि फीफा ने सही काम किया और एक बड़ा अन्याय खत्म कर दिया.
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि व्हाइट हाउस की वर्ल्ड कप टास्क फोर्स ने VAR में स्लो मोशन रिप्ले के इस्तेमाल को आधार बनाकर कानूनी चुनौती देने की तैयारी की थी. हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
🇺🇸🇧🇪 Incroyable : après que Trump a appelé Gianni Infantino, la FIFA annule le carton rouge du joueur américain Folarin Balogun, qui pourra donc être aligné face à la Belgique lundi.
— Cyprien Ronze-Spilliaert (@cyprien_ronze) July 5, 2026
Un carton pourtant indiscutable, au vu du geste extrêmement dangereux.
Même s'il n'est pas… https://t.co/8FZ3kKiZE2 pic.twitter.com/68cEPhlQhI
क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
इसी वर्ल्ड कप में फीफा ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो के मामले में भी आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया था.
रोनाल्डो पर पहले तीन मैचों का प्रतिबंध लगा था, लेकिन बाद में उसे घटाकर एक मैच कर दिया गया. इससे वह वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबलों में खेल सके.
इतिहास में भी ऐसा एक बड़ा उदाहरण मिलता है. ब्राजील के स्टार फुटबॉलर गैरिंचा को 1962 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में रेड कार्ड मिला था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें फाइनल खेलने की अनुमति मिल गई थी और ब्राजील चैंपियन बना था.
चिली के खिलाफ शारीरिक टैकल के जवाब में एक खिलाड़ी को लात मारने के बाद ब्राजील के गैरिंचा को मैदान से बाहर भेज दिया गया था. उस समय, लाल कार्ड के साथ अपने आप अगले मैच से निलंबन नहीं होता था, इसलिए तब उन्हें केवल चेतावनी दी गई थी, जिससे उन्हें फाइनल में खेलने का मौका मिला. हालांकि फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक तब उन्हें फाइनल में खेलते हुए देखने के लिए चिली और पेरू के राष्ट्रपतियों ने फीफा से अनुरोध किया था.

ब्राजील के स्टार फुटबॉलर गैरिंचा
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बेल्जियम क्यों नाराज है?
अब चूंकि बालोगुन को रेड कार्ड के बावजूद खेलने का मौका मिला है तो इससे रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन ने कड़ी नाराजगी जताई है.
बेल्जियम का कहना है कि फीफा ने अपने ही नियमों के खिलाफ जाकर फैसला लिया है. टीम ने आरोप लगाया कि सभी देशों को पहले ही बताया गया था कि सीधे रेड कार्ड मिलने पर अगला मैच अपने आप छूट जाएगा.
बेल्जियम अब कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. उसका कहना है कि अगर ऐसे फैसले होते रहे तो भविष्य में हर रेड कार्ड को अदालत या कानूनी चुनौती मिलने लगेगी, जिससे खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे.

अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन
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अब आगे क्या होगा?
अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले प्री-क्वार्टर फाइनल में बालोगुन खेलेंगे. लेकिन मैदान के बाहर यह विवाद अभी खत्म होता नहीं दिख रहा. अगर बेल्जियम कानूनी कदम उठाता है, तो यह मामला सिर्फ इस वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में फीफा के अनुशासनात्मक नियमों और VAR के इस्तेमाल पर भी बड़ा असर डाल सकता है.
हालांकि कल सुबह साढ़े पांच बजे होने जा रहे अमेरिका और बेल्जियम के बीच मुकाबले में अगर बेल्जियम जीत गया तो उसके बाद यह मामला कितना तूल पकड़ता है यह देखना होगा. फीफा की वर्ल्ड रैंकिंग में अमेरिका, बेल्जियम से कहीं पीछे है. जहां अमेरिका 16वें पायदान पर है वहीं बेल्जियम 9वें स्थान पर काबिज है.
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